दुआ कीजिए कि न बरसे पानी : शीला

tatpar 23 july 2013

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : भारी बारिश की वजह से पैदा होने वाली मुसीबतों से बचना चाहते हैं तो भगवान से दुआ कीजिए कि पानी नहीं बरसे। यह कहना है दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने का दावा करने वाली सूबे की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का। राजधानी में शनिवार को महज दो घंटे की बरसात के बाद पैदा हुए हालात को लेकर पूछने पर दीक्षित ने सोमवार को यह टिप्पणी की। वह इस मामले में किसी सरकारी एजेंसी की जिम्मेदारी तय कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने के हक में भी नहीं हैं।

राजधानी का हुआ बुरा हाल

महज दो दिन पहले शनिवार को हुई भारी बारिश से राजधानी मानो ठहर सी गई। प्रशासनिक तैयारियों की चूलें हिल गई। सड़कों पर चारों ओर लबालब पानी भर गया। ट्रैफिक लाइटें बंद हो गई। पूरे शहर में जगह-जगह वाहनों की कतार लग गई। पानी भर से साकेत व मालवीय नगर मेट्रो स्टेशनों को बंद कर देना पड़ा। एयरपोर्ट तक अछूता नहीं रहा। वहां भी पानी भर गया। टर्मिनल-3 से यात्रियों का निकलना मुश्किल हो गया। बिजली सप्लाई बंद हो गई, कई जगह दीवारें भी गिर गई।

मुसीबत पर सियासत

इस मुसीबत पर सूबे की कांग्रेसी सरकार व भाजपा शासित नगर निगमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। सोमवार को भी लोकनिर्माण मंत्री राजकुमार चौहान ने इस हालत का ठीकरा नगर निगमों के सिर फोड़ा। उनकी मानें तो उनके विभाग के पास शहर के केवल 1250 किलोमीटर लंबे नाले ही हैं। 33,198 किलोमीटर सड़कों के किनारे बने नालों का बाकी हिस्सा नगर निगमों के पास ही है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अथवा दिल्ली छावनी का इलाका भी बहुत सीमित है। लिहाजा, सारी जिम्मेदारी नगर निगमों की है। वहीं नगर निगमों के नेता भी पीछे नहीं हैं। उनकी मानें तो सारी गलती लोकनिर्माण विभाग की है। दक्षिणी दिल्ली की महापौर सरिता चौधरी ने कहा कि यह पूरी तरह दिल्ली सरकार की विफलता है।

नालों में बह गए करोड़ों रुपये

बरसात पूर्व तैयारियों के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये नालों की सफाई पर खर्च किए जाते हैं। इस साल भी लोकनिर्माण विभाग ने 20 करोड़ रुपये तो नगर निगमों ने तीन करोड़ रुपये खर्च किए हैं। चौहान इसकी वजह बताते हैं कि नालों से निकली गाद को की डंपिंग के लिए लोकनिर्माण विभाग को ढाई सौ रुपये प्रति टन के हिसाब से नगर निगमों को चुकाना पड़ा। दूसरी ओर महापौर सरिता चौधरी कहती हैं कि नगर निगमों के पास नाले साफ करने के लिए अपने कर्मचारी हैं, लिहाजा उनका खर्च कम हुआ।

यातायात पुलिस भी निशाने पर

शनिवार को बारिश से सरकारी तंत्र की हुई फजीहत को लेकर सरकार व यातायात पुलिस के बीच भी एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने का खेल चल रहा है। लोकनिर्माण मंत्री चौहान ने कहा कि यातायात लाइटें बंद हो जाने से सड़क जाम की स्थिति पैदा होती है। दूसरी ओर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) अनिल शुक्ला का कहना है कि उनके विभाग ने ऐसी स्थिति से निपटने के हर इंतजाम किए हैं, लेकिन नाले भर जाने से सड़कों पर पानी भर गया। इससे यातायात बाधित हुआ।

रेनकोट पहन कर निकलें दोपहिया वाले

‘शहर के दोपहिया चालक बारिश के दिनों में रेनकोट पहनकर निकलें। बारिश होने पर दोपहिया चालक विभिन्न फ्लाईओवरों, फुट ओवरब्रिजों आदि के नीचे खड़े हो जाते हैं। वे वाहन भी सड़क पर खड़े कर देते हैं। जाम की एक बड़ी वजह यह भी है।’

राजकुमार चौहान, लोकनिर्माण मंत्री, दिल्ली सरकार