दूसरे मामले में भी रामपाल को उम्रकैद; सजा सुनकर बोला था- परमात्मा ने जो किया, वह ठीक है

  • रामपाल समेत 23 लोग सतलोक आश्रम में 2014 में हुई हिंसा के दोषी
  • 5 महिलाओं और एक बच्चे की मौत के पहले मामले में भी रामपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई
  • दूसरा मामला बंधक बनाई गई एक अन्य महिला की मौत से जुड़ा

हिसार.  बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में 2014 में हुई हिंसा के दूसरे मामले में भी रामपाल समेत 14 लोगों को बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दोषियों पर दो लाख पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। यह मामला आश्रम में एक महिला की मौत से जुड़ा था।

इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने पांच महिलाओं और एक बच्चे की मौत के मामले में रामपाल समेत 15 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। छह लोग ऐसे हैं जो दोनों मामलों में दोषी करार दिए गए। इस तरह कुल दोषियों की संख्या 23 है।

ललितपुर के सुरेश ने दायर किया था दूसरा केस : सतलोक आश्रम में हिंसा का दूसरा केस उत्तरप्रदेश के ललितपुर निवासी सुरेश की शिकायत पर दर्ज हुआ था। उसका आरोप था कि 8 नवंबर 2014 को वह पत्नी रजनी और दादी कांसी बाई के साथ आश्रम में आया था। 11 नवंबर को वापस घर जाने लगा तो रामपाल के कहने पर लाठियों से लैस उसके समर्थकों और कमांडो ने उन्हें रोककर आश्रम में बंधक बना लिया। 18 नवंबर को प्रशासनिक अमले पर पथराव किया गया। इस दौरान बंधक बनाकर रखी पत्नी और दादी की तबीयत बिगड़ गई। बाद में अस्पताल में पत्नी ने दम तोड़ दिया।

बाकी दोषियों ने रामपाल को लेटकर किया प्रणाम :  स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को जब पहले मामले में रामपाल को सजा सुनाई तो उसने कहा था- परमात्मा ने जो किया है, वह ठीक है। यह देखकर बाकी 14 दोषियों ने रामपाल को फर्श पर लेटकर प्रणाम किया। कभी जूनियर इंजीनियर रहा रामपाल अब कैदी नंबर 1005 बनकर सजा काटेगा। उसे जेल में लघु उद्योग या बागवानी का भी काम मिल सकता है, जिसके ऐवज में मेहनताना भी मिलेगा। रामपाल कभी साढ़े 12 एकड़ में बने सतलोक आश्रम में ऐशो-आराम से रहता था।

पहले मामले में इन्हें मिली सजा :  रामपाल, उसका बेटा वीरेंद्र, भांजा जोगेंद्र, बहन पूनम और मौसी सावित्री के अलावा बबीता, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, सतबीर सिंह, सोनू दास, देवेंद्र, जगदीश, सुखवीर सिंह, खुशहाल सिंह और अनिल कुमार को कोर्ट ने दोषी ठहराया था।

‘मैंने कमांडो से कहा था महिलाओं और बच्चों को पीटकर कमरे में बंद कर दो’

रामपाल ने पुलिस के सामने कबूल किया था,  “मैंने कमांडो से कहा था कि महिलाओं और बच्चों को पीटकर कमरे में बंद कर दो। रात को देखा कि एक बच्चे और महिलाओं की मौत हो चुकी है। उनके शवों को आश्रम से बाहर फेंक दिया था ताकि उनकी मौत का जिम्मेदार पुलिस को ठहराया जा सके। मेरे कहने पर ही कमांडो फोर्स का गठन हुआ था। मेरी गिरफ्तारी को रोकने के लिए मुझसे जुड़े सदस्यों और निजी कमांडो ने साथ दिया था।”

कब, क्या हुआ था, कैसे जेल पहुंचा रामपाल

  •  नवंबर 2014 में हाईकोर्ट ने करौंथा में युवक की मौत मामले में रामपाल को पेश होने के आदेश दिए थे।
  •  5 नवंबर, 2014 को हाईकोर्ट ने रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए।
  •  10 नवंबर को पुलिस के पास रामपाल को कोर्ट में पेश करने का समय था।
  •  रामपाल को समर्थकों ने अस्वस्थ बताकर पेश नहीं होने दिया था।
  •  रामपाल के हाईकोर्ट में पेश नहीं होने पर सरकार और प्रशासन को फटकार लगी थी।
  •  पुलिस ने कोर्ट में पेश करने के लिए ऑपरेशन शुरू किया, जो 10 दिन चला था।
  •  18 नवंबर, 2014 को पुलिस ने रामपाल की गिरफ्तारी के लिए आश्रम में प्रवेश करना चाहा तो समर्थकों से टकराव हुआ था।
  •  19 नवंबर तक रामपाल समर्थकों और पुलिस के बीच टकराव रहा। इस दौरान छह लोगों की मौत हो गई थी। दोनों तरफ से कई घायल हुए थे।
  •  20 नवंबर, 2014 को रामपाल की गिरफ्तारी के बाद आश्रम खाली करवाकर पुलिस ने कब्जे में लिया।
  •  11 अक्टूबर, 2018 को हत्या के दो मुकदमों में रामपाल समेत 29 को दोषी करार दिया गया था।

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