देश का पहला भू-गर्भीय ताप बिजली घर छत्तीसगढ़: डॉ. रमन सिंह

Tatpar 6 Sep 2013

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि देश की पहला भू-गर्भीय ताप बिजली परियोजना छत्तीसगढ़ के नवगठित बलरामपुर-रामनुजगंज जिले के तातापानी में स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गयी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए विकास के मामले में राज्य के सीमावर्ती जिलों को प्रदेश शासन द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि चाहे सुकमा हो या सूरजपुर, कोरिया हो या कोण्डागांव सभी नये पुराने सीमावर्ती जिले राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता में है। मुख्यमंत्री आज सवेरे राज्य के बलरामपुर-रामानजुगंज जिले के मुख्यालय बलरामपुर में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। डॉ. सिंह ने बलरामपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा जिले के विकासखंड और तहसील मुख्यालय राजपुर पहुंचकर लगभग 91 करोड़ 61 लाख रूपए के 65 नवनिर्मित कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन कर एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया। उन्होंने वहां विभिन्न योजनाओं के तहत दो हजार 570 हितग्राहियों को सामग्री और अनुदान राशि का भी वितरण किया।
डॉ. रमन सिंह ने इसके पहले आज सवेरे बलरामपुर में स्थानीय पत्रकारो से कहा कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के निर्माण भी इसी उददेश्य से किया गया है कि छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में शासन और प्रशासन जनता के और नजदीक पहुंचे तथा वहां जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आए। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्राकृतिक सौन्दर्य और नैसर्गिंक वन तथा जल सम्पदा से परिपूर्ण इस नये जिले में विकास की अपार संभावनाएं हैं। एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नये जिले के लिए यह एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी कि भारत की पहली भू-गर्भीय ताप बिजली परियोजना इस जिले के तातापानी में शुरू की जाएगी, जहां जमीन के नीचे गर्म पानी के रूप में ताप बिजली का एक बडा स्त्रोत उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया कि इस परियोजना निर्माण के लिए राज्य सरकार ने लगभग छह महीने पहले 16 फरवरी को केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय ताप बिजली निगम (एन.टी.पी.सी.) के साथ एम.ओ.यू. कर लिया है। इसके पहले विगत पांच दिसम्बर 2012 को रायपुर में  मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य सरकार ने इस परियोजना के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया था। अब एम.ओ.यू. होने के बाद राज्य सरकार की एजेंसी छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) और केन्द्रीय उपक्रम एन.टी.पी.सी. द्वारा संयुक्त रूप से इस परियोजना की स्थापना के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। संयंत्र की डिजाईनिंग, स्थापना, वित्त पोषण और संचालन की जिम्मेदारी एन.टी.पी.सी. को दी गयी है। एन.टी.पी.सी. द्वारा कार्यस्थल पर प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। भू-गर्भीय  ताप के कारण वहां उपलब्ध गर्म पानी को वाष्प में परिवर्तित कर विशेष टेक्नॉलॉजी के माध्यम से बिजली तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरगुजा राजस्व संभाग के इस नये जिले के साथ-साथ सम्पूर्ण सरगुजा अंचल में नक्सल समस्या काफी हद तक खत्म हो गयी है। जनता के सहयोग से ही ऐसा हो पाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नक्सल पीड़ित जिलों में जनता की बेहतरी के लिए शांतिपूर्ण विकास की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश व्यापी विकास यात्रा को राज्य की जनता ने अभूतपूर्व सहयोग और समर्थन दिया है। विकास यात्रा का समापन कार्यक्रम कल सात सितम्बर को सरगुजा जिले के मुख्यालय अम्बिकापुर में आयोजित किया जाएगा, जहां सर्वश्री राजनाथ सिंह और नरेन्द्र मोदी जैसे देश के दिग्गज नेता भी शामिल होंगे और जनता को सम्बोधित करेंगे। अम्बिकापुर में विकास यात्रा की रैली ऐतिहासिक होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले के जिला मुख्यालय बलरामपुर में राज्य सरकार ने लगभग पांच करोड़ 19 लाख रूपए की लागत से एक सौ बिस्तरों वाले अस्पताल निर्माण का निर्णय लिया है। लगभग बारह करोड़ रूपए की लागत से बलरामपुर में संयुक्त जिला कार्यालय भवन का निर्माण भी किया जाएगा। इसमें आम जनता की सुविधा के लिए शासन के  सभी प्रमुख विभागों के जिला स्तरीय कार्यालय एक ही भवन में संचालित होने लगेंगे। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बलरामपुर-रामनुजगंज जिला डीपाडीह जैसी अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए भी छत्तीसगढ़ के मानचित्र में अपना विशेष महत्व रखता है। डीपाडीह में पांचवी से आठवीं शताब्दी तक के पुरातात्विक अवशेष मिले हैं। राज्य सरकार इसके संरक्षण और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताय कि नये जिले में कन्हर नदी पर 25 करोड़ 59 लाख रूपए की लगात से खुटपाली व्यपवर्तन सिंचाई योजना का निर्माण भी प्रगति पर है। इसके अलावा इस जिले में विगत कुछ वर्षों में 266 करोड़ रूपए की लागत से 33 पुल-पुलियों का निर्माण पूर्ण किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 41 करोड़ 76 लाख रूपए की लागत से जिले में 312 ग्रामीण सड़कों को बारहमासी सड़क बनाने के प्रस्ताव मंजूर किए गए थे। इनमें से अब तक 281 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश की जनता से किए गए प्रत्येक वायदे को पूर्ण किया है।