दोस्त बने कन्हैया के बॉडीगार्ड्स, कैम्पेन का सपोर्ट करने पर प्रोफेसर का तबादला

नई दिल्ली.देशद्रोह के आरोपी जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन लीडर कन्हैया की सिक्युरिटी का जिम्मा उनके ही साथी संभाल रहे हैं। फिक्र इतनी है कि वे कुछ ही घंटों में कन्हैया का ठिकाना बदल रहे हैं। दूसरी ओर, आईआईएमसी के प्रोफेसर ने सरकार पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है। आईबी मिनिस्ट्री ने प्रोफेसर का ट्रांसफर कर दिया ओडिशा कर दिया था।
हॉस्टल में नहीं, एक प्रोफेसर के घर में रुका स्टूडेंट लीडर…
 – पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद उनके साथियों की सबसे बड़ी फिक्र कन्हैया की सिक्युरिटी को लेकर है।
– शुक्रवार को कन्हैया जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आए तो साथी ह्यूमन चेन बनाकर साथ चल रहे थे।
– किसी भी अनजान शख्स को उनके करीब जाने की इजाजत नहीं दी जा रही थी।
– अंग्रेजी अखबार ‘मेल टुडे’ ने कन्हैया के एक साथी के हवाले से बताया कि कन्हैया कुछ ही घंटों में अपना ठिकाना बदल रहे हैं।
– उनकी लोकेशन के बारे में कोई बात भी नहीं करता ताकि, दूसरों को कुछ पता नहीं लगे।
– कन्हैया जेएनयू के ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में रहते थे। लेकिन जेल से रिहाई के बाद वो अपने रूम में नहीं आए।
– जानकारी के मुताबिक, रिहा होने के ठीक बाद कन्हैया को एक प्रोफेसर के घर ले जाया गया था।
– उसके बाद से वे कहां रहते हैं? इसकी जानकारी कुछ चुनिंदा साथियों को ही है।
जेएनयू कैम्पेन और रोहित वेमुला का समर्थन करने वाले प्रोफेसर का इस्तीफा
 – इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के प्रोफेसर अमित सेनगुप्ता दिल्ली का तबादला दिल्ली कर दिया गया था।
– प्रोफेसर ने इस्तीफा दे दिया। उनका आरोप है कि इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री के अफसर ने उन्हें परेशान कर रहे थे।
– अमित ने इसे राजनीतिक फैसला करार दिया है। वहीं, आईबी मिनिस्ट्री के एक अफसर ने कहा है कि अमित फेसबुक पर कुछ ऐसे पोस्ट कर रहे थे जो अनुशासनहीनता के दायरे में आती हैं।
– अमित ने ये भी कहा कि उन्होंने जो कुछ किया वो उनका डेमोक्रेटिक राइट है।
क्या है विवाद?
 – जेएनयू में 9 फरवरी को लेफ्ट स्टूडेंट्स के ग्रुप्स ने संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के को-फाउंडर मकबूल भट की याद में एक प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया था। इसे कल्चरल इवेंट का नाम दिया गया था।
– साबरमती हॉस्टल के सामने शाम 5 बजे उसी प्रोग्राम में कुछ लोगों ने देश विरोधी नारेबाजी की। अफजल और कश्मीर की आजादी के सपोर्ट में नारे लगाए।
– इसके बाद लेफ्ट और एबीवीपी स्टूडेंट्स के बीच झड़प हुई।
– 10 फरवरी को नारेबाजी का वीडियो सामने आया। दिल्ली पुलिस ने 12 फरवरी को देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया।
– इसके बाद जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार को अरेस्ट कर लिया गया।
– उमर खालिद फरार हाे गया था। बाद में पता चला कि वह जेएनयू कैम्पस में ही था। कुछ दिन बाद उसने सरेंडर कर दिया। वह अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में है।
– वहीं, कन्हैया हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट से 6 महीने की इंटरिम बेल मिलने के बाद तिहाड़ जेल से छूटा।
जेल में पढ़ी मुंशी प्रेमचंद की कहानियां
– कन्हैया ने शुक्रवार को बताया था कि जेल में रहते हुए उन्होंने प्रोफेसर तुलसी और बाबा साहेब आंबेडकर के वॉल्यूम की मांग की। वह जेल लाइब्रेरी में नहीं था। तो मुंशी प्रेमचंद की कहानियां पढ़ीं। अखबार भी पढ़ने काे मिलता था।
– कन्हैया ने कहा, ‘जेएनयू विवाद को लेकर मैंने जो वहां समय गुजारा है उस पर मैं किताब लिखना चाहता हूं। ताकि अपनी विचारधारा लोगों के सामने ला सकूं।’
बंगाल में प्रचार करेंगे कन्हैया?
– इस बीच, कन्हैया की राजनीति में एंट्री पर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि स्टूडेंट लीडर बंगाल सहित बाकी राज्यों में भी चुनाव प्रचार करेगा।
– 294 सीटों वाले बंगाल में 4 अप्रैल से वोटिंग होगी। 140 सीटों वाले केरल में 16 मई को वाेट डाले जाएंगे। दोनों राज्यों में लेफ्ट की मौजूदगी है।
– बंगाल में तृणमूल और केरल में यूडीएफ की सरकार है।
जेएनयू स्टूडेंटस शनिवार को देखेंगे ‘अलीगढ़’
 – होमोसेक्शुअलिटी जैसे सेंसेटिव सब्जेक्ट पर बनी हंसल मेहता की फिल्म ‘अलीगढ़’ आज जेएनयू में दिखाई जाएगी।
– ये फिल्म अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रामचंद्र सिरास की जिंदगी पर बनी है।
– सिरास को उनके सेस्शुअल ओरिएंटेशन की वजह से यूनिवर्सिटी से सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में उन्होंने सुसाइड कर लिया था।
– मनोज बाजपेयी ने फिल्म में प्रोफेसर का रोल प्ले किया है। हंसल मेहता ने खुद अपने फेसबुक पेज पर जेएनयू में फिल्म दिखाए जाने की जानकारी दी है।
– फिल्म दिखाए जाने पर एक स्टूडेंट ने कहा- जेएनयू इस फिल्म को दिखाए जाने के लिए सबसे बेहतर जगह है। यहां लोग खुले विचार रखते हैं।