धीरे-धीरे आएगा चुनाव परिणाम, कांग्रेस की ये मांग है वजह

इस बार मतगणना का परिणाम धीरे-धीरे आएगा और देर रात तक नतीजे घोषित होने की संभावना है। इसके पीछे वजह कांग्रेस की आशंका और चुनाव आयोग का एक फैसला है। दरअसल, मध्य प्रदेश में निर्वाचन आयोग ने वोटों की गिनती की स्थायी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते सभी निर्वाचन अधिकारी और पर्यवेक्षकों को प्रत्येक राउंड के परिणाम घोषित करने होंगे और प्रत्याशियों या उनके एजेंटों को प्रमाण पत्र देने होंगे। इसके बाद ही दूसरे राउंड की गिनती शुरू की जा सकेगी। ऐसा करने से नतीजे आने में देरी होने की आशंका है।

प्रदेश में 11 दिसंबर को मतगणना होनी है। कांग्रेस ने मतगणना में धांधली की आशंका जताते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपा था। पार्टी ने मांग की थी कि मतगणना में विशेष सावधानी बरती जाए और प्रत्येक राउंड का रिजल्ट सार्वजनिक किया जाए। इसके बाद ही अगले राउंड की गिनती कराई जाए। सीईओ ने कांग्रेस का ज्ञापन भारत निर्वाचन आयोग को भेजा था। आयोग ने इस पर सीईओ को मतगणना की स्थायी प्रक्रिया का सख्ती से पालन कराने को कहा है।

आयोग ने कहा है कि प्रत्येक चरण की गणना पूरी होने पर पर्यवेक्षक और रिटर्निग ऑफिसर गणना का परीक्षण करें और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद प्रमाण पत्र जारी करें। इस पर दोनों अफसरों के हस्ताक्षर होने चाहिए। ये प्रमाण पत्र मतगणना स्थल पर मौजूद प्रत्याशियों, उनके एजेंटों और मीडिया के सामने सार्वजनिक करना होगा। इसके अलावा डिस्प्ले बोर्ड पर चस्पा करने के साथ आयोग के सर्वर पर भी अपलोड करना होगा। इसके बाद ही अगले चरण के वोटों की गिनती की जा सकेगी।

परिणाम आने में होगी देरी
वैसे तो यही प्रक्रिया हर बार अपनाई जाती है, लेकिन इस बार परिणाम आने में देरी होने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। ऐसे में प्रत्येक राउंड में वोटों की गिनती और परिणाम को लेकर शिकवा-शिकायतें होंगी। जिनका निराकरण करने में ज्यादा समय लगेगा। इस कारण हर राउंड में 10 से 15 मिनट का समय ज्यादा लग सकता है।
मॉक पोलिंग में हुई गलती, कम अंतर से हार-जीत होने पर वीवीपैट की पर्चियों की गिनती 
मतदान की पारदर्शिता और निष्पक्षता के मद्देजनर ईवीएम में कराया गया मॉकपोल मध्य प्रदेश के 27 जिलों के 144 मतदान केंद्रों में विवाद का कारण बन सकता है। यहां मॉकपोल में ईवीएम में दर्ज मतों को मतदान से पहले नहीं हटाया गया। इससे ये वोट भी वास्तविक मतदान में प्रत्याशियों को मिले मतों में शामिल हो गए। इसको लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेज दी है। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संदीप यादव ने भी इसकी पुष्टि की।

बताया जा रहा है कि मतगणना में इन मशीनों में दर्ज मतों को तभी गिनती में लिया जाएगा, जब हार–जीत में इन मशीनों में दर्ज मत असर डाल सकते हैं। चूंकि, पीठासीन अधिकारियों ने वीवीपैट से मॉकपोल की पर्चियां हटा दी थीं, इसलिए बाकी पर्चियों से ही गिनती की जाएगी। हालांकि, इस बारे में अंतिम निर्णय चुनाव आयोग लेगा।

सूत्रों के मुताबिक, मतदान के बाद पीठासीन अधिकारियों ने पहले तो इस गलती को छुपाया। जब पर्यवेक्षकों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने पड़ताल कराई। इसमें 27 जिलों के 144 मतदान केंद्रों में मॉकपोल में दर्ज किए गए मतों को मतदान से पहले ईवीएम से नहीं हटाने की गलती पकड़ में आई।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि मतदान से आधा घंटे पहले मॉकपोल इसलिए कराया जाता है, ताकि सभी प्रत्याशी या उनके प्रतिनिधि निश्चिंत हो जाएं कि ईवीएम ठीक काम कर रही है। सामान्यत: एक प्रत्याशी से पांच–पांच वोट डलवाए जाते हैं। इसके नतीजे से संतुष्ट होने पर पीठासीन अधिकारी ईवीएम में दर्ज रिकॉर्ड को हटाकर मतदान कराता है। इन 144 केंद्रों के पीठासीन अधिकारियों ने यह काम नहीं किया और मतदान करा दिया। कम मतों के अंतर से होने वाली हार–जीत में इन 144 केंद्रों की मशीनें विवाद का सबब बन सकती हैं।

मतगणना में संभवत: अलग रखी जाएगी ये मशीनें 
सूत्रों का कहना है कि मतगणना के दौरान इन मशीनों को संभवत: अलग रखा जाएगा। यदि हार–जीत का अंतर कम रहता है तो फिर इन ईवीएम के मतों को गणना में शामिल किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इन ईवीएम में औसत पांच सौ वोट हो सकते हैं।

मॉकपोल और मतदान का प्रोटोकॉल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि ईवीएम सही काम कर रही है या नहीं, इसके लिए मॉकपोल में सभी प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों से पांच-पांच मत डलवाए जाते हैं। इसका रिजल्ट भी सभी को बताया जाता है। संतुष्टि होने पर इस रिकॉर्ड को क्लीयर कर मतदान की शुरआत कराई जाती है। इसके लिए पीठासीन अधिकारी को क्लोज, रिजल्ट और क्लीयर की बटन दबानी होती है। इसके बाद ईवीएम मतदान के लिए तैयार हो जाती है।

इन जिलों में हुई गड़बड़ी
इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, भिंड, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिंगरौली, विदिशा, रायसेन, गुना, बालाघाट, दमोह, सागर, सतना, पन्ना, टीकमग़़ढ, छतरपुर, रीवा, कटनी, रतलाम, झाबुआ, नीमच, देवास, ब़़डवानी, राजग़़ढ और छिंदवाड़ा।

मतगणना की नहीं होगी वेबकास्टिंग, सीसीटीवी से निगरानी
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की मतगणना से ठीक दो दिन पहले मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने अब मतगणना की वेबकास्टिंग नहीं करने का निर्णय लिया है। मतगणना हॉल में वाईफाई नेटवर्क का भी इस्तेमाल भी नहीं होगा। सिर्फ सीसीटीवी का उपयोग किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस और भोपाल शहर की तीन विधानसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशियों ने रविवार को वेबकास्टिंग और एक निजी सेवा प्रदाता कंपनी के नेटवर्क का उपयोग किए जाने पर आपत्ति उठाई थी। साथ ही आरोप लगाया था कि निजी सेवा प्रदाता कंपनी के उपकरण प्रयोग में लाए जा रहे हैं। कंपनी के कर्मचारी विभिन्न तरह के उपकरण लेकर ईवीएम के आसपास घूम रहे हैं और वाईफाई लगाने का काम कर रहे हैं।

पार्टी ने ईवीएम की हैकिंग और वेबकास्टिंग के डाटा से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई थी। शिकायत चुनाव आयोग को भी भेजी गई। इसके बाद देर रात मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने वेबकास्टिंग नहीं करने और मतगणना हॉल में वाईफाई नेटवर्क नहीं रखने का निर्णय लिया।

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