नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने का संकल्प लें

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नदियों को प्रदूषित न करने का संकल्प लेने की बात सभी से की है। उन्होंने कहा कि नदियों को भारतीय संस्कृति में पूजनीय माना गया है हम नदियों की पूजा तो करते हैं लेकिन नदियों को प्रदूषित भी हम लोग ही करते हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज होशंगाबाद जिले में नर्मदा-तवा नदी के संगम-स्थल बान्द्राभान में चौथे अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इसके पूर्व श्री चौहान एवं उनकी धर्म पत्नी श्रीमती साधना सिंह ने देशभर की विभिन्न नदियों के जल से भरे कलश का पूजन किया। श्री चौहान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के काम में सरकार को तब तक सफलता नही मिल सकती जब तक कि हम सब मिलकर स्व-प्रेरणा से कार्य नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने नदी संरक्षण कार्य के लिये श्री दवे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों से मौसम चक्र में बदलाव हो रहा है। शीत, वर्षा एवं ग्रीष्म ऋतु अपने-अपने निर्धारित समय के अलावा भी प्रभाव दिखा रही है। मौसम में यह बदलाव पर्यावरण को हो रही क्षति का दुष्प्रभाव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नदियों में मछली, कछुए, मगर जैसे जीव बड़ी संख्या में पाये जाते थे। खेतों में रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से खेतों के प्रदूषित पानी के नदियों में मिलने से जीव-जंतुओं का जीवन-चक्र टूटने लगा है। उन्होंने कहा कि त्यौहारों पर मूर्तियों तथा फूल-माला आदि के विसर्जन से जल प्रदूषित हो गया है। श्री चौहान ने नगरीय निकायों से आव्हान किया कि नदियों में शहरी गंदगी की सीवर लाइन प्रवाहित होने से रोके। श्री चौहान ने खेती में रसायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के स्थान पर जैविक कीटनाशक उपयोग करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले साल उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ को पॉलीथिन मुक्त बनाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए नागरिकों को संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। सिंहस्थ से पूर्व पर्यावरण संरक्षण विषय पर राष्ट्रीय स्तर के विद्वानों की संगोष्ठी की जाएगी तथा निष्कर्षों को सिंहस्थ घोषणा-पत्र के रूप में जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से हर-हर नर्मदे का नारा लगवाया और नदियों के संरक्षण का आव्हान किया। उन्होंने केरल की नील नदी के तट पर होने वाले महोत्सव के लोगो का विमोचन भी किया।