नये जिलों ने साबित की अपनी उपयोगिता : डॉ. रमन सिंह

Tatpar 4 Sep 2013

सभी जिलों में युवाओं के लिए आजीविका कॉलेज की योजना
शक्कर कारखाना सूरजपुर जिले के किसानों की अनमोल धरोहर
भवन निर्माण मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश व्यापी विकास यात्रा के सातवें तथा छह दिवसीय अंतिम चरण के तीसरे दिन आज सवेरे सूरजपुर जिले के कोयला खदान बहुल नगर भटगांव में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने लगभग पौने दो साल पहले जनवरी 2012 में इस नये जिले का गठन किया था। इसे मिलाकर वर्ष 2012 में नौ नये जिले बनाए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन और प्रशासन को जनता के नजदीक ले जाकर सभी लोगों को ज्यादा से ज्यादा सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना और मैदानी स्तर पर प्रशासनिक कसावट लाना नये जिलों के गठन का मुख्य उद्देश्य था। इन सभी नये जिलों ने इस छोटी सी अवधि में विकास की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाकर अपने निर्माण की उपयोगिता साबित कर दी है। नये जिलों के लिए विभिन्न विभागों के बजट आवंटन में भी काफी वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नव गठित जिलों की जनता में विकास यात्रा को लेकर अपार उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि नये जिलों को मिलाकर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में युवाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण दिलाने के लिए आजीविका कॉलेज (लाइवलीहुड कॉलेज) खोलने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में ऐसे कॉलेज संचालित हो रहे हैं। हमने दंतेवाड़ा मॉडल के अनुरूप सभी जिलों में आजीविका कॉलेज खोलने की योजना बनाई है।
एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार की योजनाओं से छत्तीसगढ़ के मेहनतकश मजदूरों के जीवन में भी क्रांतिकारी बदलाव आने लगा है। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने भवन निर्माण गतिविधियों में रोजी-रोटी प्राप्त कर रहे लाखों असंगठित श्रमिकों के घर-परिवार की बेहतरी, उनके बच्चों की शिक्षा और बेटियों की शादी की भी चिन्ता करके कई योजनाओं की शुरूआत की है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सूरजपुर जिले के इस इलाके में केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम दक्षिण-पूर्वी कोयला प्रक्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा कोयला खदानों का परिचालन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने एसईसीएल के साथ मिलकर इस अंचल के कोयला श्रमिकों के व्यापक हित में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खदान क्षेत्रों में मानव जीवन की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन सहित एसईसीएल के अधिकारियों को भी औद्योगिक सुरक्षा नियमों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयला खदान क्षेत्रों के भू-विस्थापितों को छत्तीसगढ़ सरकार की आदर्श पुनर्वास नीति के अनुरूप एस.ई.सी.एल. द्वारा बेहतर मुआवजा दिया जाना चाहिए और प्रत्येक भू-विस्थापित परिवार के कम से कम एक सदस्य को कम्पनी में उसकी योग्यता के अनुसार नौकरी दी जानी चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन को निरंतर समीक्षा करने और प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने विकास की दिशा में सूरजपुर जिले की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद वर्ष 2003 से 2013 के बीच सूरजपुर ने कई शानदार उपलब्धियां हासिल की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता के क्षेत्र में इस जिले के प्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम केरता में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2007 में मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाने की बुनियाद रखी गयी थी। हालांकि उस समय सूरजपुर जिला नहीं बना था और इस कारखाने का निर्माण भी तत्कालीन अविभाजित सरगुजा जिले में शुरू हुआ था। निर्माण पूर्ण होने के बाद पहला गन्ना पेराई सीजन वर्ष 2009-10 में शुरू हुआ। अब यह कारखाना नये सूरजपुर जिले के किसानों की अनमोल धरोहर बन गया है। शक्कर कारखाने की स्थापना से इस नये जिले में गन्ने की खेती का रकबा 4409.84 हेक्टेयर तक पहंुच गया है और गन्ना उत्पादक किसानों की संख्या 6500 से बढकर 7800 हो गयी है। पड़ोसी सरगुजा जिले के किसानों को भी इसका लाभ मिल रहा है। यह शक्कर कारखाना न केवल सूरजपुर और सरगुजा जिलों में बल्कि सम्पूर्ण सरगुजा राजस्व संभाग के किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साक्षरता और शिक्षा के क्षेत्र में भी सूरजपुर जिला अग्रणी है। इस जिले के विकासखण्ड सूरजपुर को आठ सितम्बर 2011 को साक्षरता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कार्यो के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल के हाथों नई दिल्ली में अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर भारत सरकार के प्रतिष्ठित सत्येन मैत्रा साक्षरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह इस जिले में शिक्षा के प्रति जनता की जागरूकता का परिचायक है। वर्ष 2011 में सूरजपुर विकासखण्ड को विकास के मामले में राज्य के सर्वश्रेष्ठ विकासखण्ड के रूप में राज्यपाल के हाथों पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। सूरजपुर में 4.75 करोड़ रूपए की लागत से जिला स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। इसी तरह नये जिले के मुख्यालय सूरजपुर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 1.34 करोड़ रूपए की लागत से ट्रान्जिट हॉस्टल का भी निर्माण किया जा रहा है।
डॉ. रमन सिंह ने बताया कि सूरजपुर में रिंग रोड निर्माण के लिए लगभग 44 करोड़ रूपये स्वीकृत, बायपास रोड़ का निर्माण प्रगति पर है। इसके अलावा जिला मुख्यालय में 5 करोड़ रूपए की लागत से शासकीय जिला अस्पताल भवन का निर्माण भी कराया जा रहा है। डॉ. सिंह ने कहा कि अधिकारियों को सूरजपुर में 12 करोड़ रूपए की लागत से संयुक्त कार्यालय भवन का निर्माण भी जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी आम जनता से जुड़े सभी प्रमुख विभागों के जिला स्तरीय कार्यालय एक ही भवन में संचालित हों। इससे आम नागरिकों को अलग-अलग दफ्तरों के कार्याे के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि सूरजपुर में 19.66 करोड़ रूपए की लागत से आई टी आई भवन, आई टी आई छात्रावास भवन, शासकीय महाविद्यालय भवन और कन्या छात्रावास भवन सहित 13 निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है। जिले में 5.33 करोड़ रूपये की लागत से 5 कन्या छात्रावासो का निर्माण भी कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सूरजपुर जिले में 13 हजार 552 परिवारों को वन अधिकार मान्यता पत्रों का वितरण किया गया है। उन्हें खेती के लिए खाद, बीज और पात्रता के अनुसार इंदिरा आवास की भी सुविधा दी जा रही है। जिले के तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 5 करोड़ 88 लाख रूपए का बोनस दिया गया है। इसके अलावा 56 हजार 615 तेन्दूपता श्रमिकों को चरणपादुकाएं दी गयी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सहकारी समितियों में जिले के 16 हजार 782 किसानों से एक लाख 16 हजार 299 मीटरिक टन धान खरीदा गया है। इस जिले के किसानों को वर्ष 2012 की धान खरीदी पर 31.38 करोड रूपए का बोनस भी दिया गया है। डॉ. रमन सिंह ने बताया कि सूरजपुर जिले में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 22 सड़कों के निर्माण के लिए 34.93 करोड़ रूपये मंजूर किए गए है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना के तहत 31 कार्यो के लिए 7.46 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गयी है। सूरजपुर में सामुदायिक भवनों के निर्माण, नगर पालिका कार्यालय भवन, सी.सी रोड एवं नाली निर्माण के लिए 68 लाख स्वीकृत किए गए हैं। सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए 25.41 करोड रूपये की सात नई परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गयी है। जिले में 3 करोड़ 19 लाख रूपये की लागत से रकसगण्डा में सिंचाई एनीकट का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है।