नहीं सुलझा झगड़ा! सर्विसेज विभाग का फैसला मानने से इंकार

कोर्ट का फैसला आने के बाद दिल्ली सरकार ने फैसले का हवाला देते हुए अब अधिकारियों व कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार अपने हाथों में लेने का आदेश जारी किया। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा जारी आदेश विभाग के पास पहुंचा तो सर्विसेज विभाग ने सरकार के इस आदेश को मानने से इंकार कर दिया।

सर्विसेज विभाग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं इस बात का जिक्र नहीं है कि सर्विसेज से संबंधित मामला दिल्ली सरकार के अधीन आ गया है। मई 2016 में सर्विसेज से जुड़े मामले केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर उपराज्यपाल के अधीन किया था वह अब भी लागू है। इसलिए उपमुख्यमंत्री द्वारा बुधवार को जारी आदेश वह नहीं मान सकते हैं। सर्विसेज विभाग के इस रवैये पर बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली सरकार की ओर से टिप्पणी आई कि कोर्ट के फैसले को नहीं मानना अवमानना है। इस पर आप सरकार कोर्ट में अपनी बात रखेगी।

बुधवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दो साल पहले हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सरकार से ट्रांसफर-पोस्टिंग की ताकत छीनकर उपराज्यपाल और मुख्य सचिव को दे दी गई थी। बतौर सर्विसेज विभाग मंत्री अब वे आदेश जारी करते हैं कि इस व्यवस्था को बदलकर आईएएस और दानिक्स समेत तमाम अधिकारियों की ट्रांसफर या पोस्टिंग के लिए अब मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी होगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की पूरी व्यवस्था बदल दी है।

दिल्ली सरकार और LG के बीच चल रही अधिकारों की लड़ाई के मुख्य मुद्दे

भ्रष्टाचार रोधी शाखा – सत्ता में आने के तीन महीने बाद आप सरकार ने मई 2015 में कहा कि एसीबी का नियंत्रण तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग को दे दिए जाने के चलते वह भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रही है। आप सरकार ने आरोप लगाया कि ऐसा पूर्ववर्ती शीला दीक्षित सरकार के दौरान नहीं था। इसने कहा कि केंद्र ने 2014 में दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगे रहने के दौरान एक अधिसूचना जारी कर एसीबी का नियंत्रण उपराज्यपाल के हाथों में दे दिया।
अधिकारियों का तबादला और उनकी तैनाती- मई 2015 में तत्कालीन एलजी ने वरिष्ठ नौकरशाह शकुंतला गैमलिन को दिल्ली का मुख्य सचिव नियुक्त किया, जबकि केजरीवाल ने इसे लेकर सख्त आपत्ति जताई थी। एलजी के कदम से नाराज आप सरकार ने तत्कालीन प्रधान सचिव (सेवा) अनिंदो मजूमदार के दफ्तर में ताला जड़ दिया था। दरअसल, मजूमदार ने एलजी के निर्देश के बाद गैमलिन की नियुक्ति का आदेश दिया था। इस मुद्दे पर यह आप सरकार और एलजी दफ्तर के बीच पहली बड़ी तकरार थी। तब से केजरीवाल ने अक्सर ही शिकायत की है कि वह एक चपरासी तक नियुक्त नहीं कर पा रहे हैं, न ही अपनी सरकार के किसी अधिकारी का तबादला कर सकते हैं। उन्होंने इसकी वजह यह बताई कि केंद्र ने दिल्ली सरकार की शक्तियां छीन ली हैं और उसे एलजी को सौंप दिया है। दिसम्बर 2015 में, दिल्ली के नौकरशाह एक दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए। दो विशेष गृह सचिवों को निलंबित करने के आप सरकार के फैसले के विरोध में अधिकारियों ने यह कदम उठाया।

सीसीटीवी कैमरों का मुद्दा- इस वर्ष मई में केजरीवाल, उनके मंत्री और आप विधायकों ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय के पास तीन घंटे से अधिक समय तक धरना दिया। उन्होंने एलजी पर आरोप लगाया कि वह समूचे शहर में डेढ़ लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने की सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना को भाजपा के इशारे पर अटका रहे हैं।

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