निजी शाला एवं पालक

 

 

 

 

 

 

 

प्रवीण मैशेरी, रायपुर। अभी लगातार समाचारों में आता है पलकों ने निजी शाला के लूट के खिलाफ आंदोलन किया निजी शाला प्रबंधन का उग्र विरोध किया आंदोलन किया आदि आदि
मेरा मत बहुत भिन्न है पहले पालक अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहतें हैं तब बच्चों को तो ज्ञान नहीं होता पर पालक समाज में खुद की प्रतिष्ठा कायम करनें एवं परिवार के बीच यह दर्शाने की देखों हम अपने बच्चों को कितनी बड़ी शाला में पढ़ा रहें हैं खुद की इमेज के लिये महंगे निजी स्कूलों को चुनतें हैं बच्चे को उसमें एडमिशन मिल जाये इसके लिये हर तरह की एप्रोच डोनेशन का भी सहारा लेतें हैं जब आप ऐसे किसी महंगे स्कूलों में जातें हैं तो आपको पूर्ण ज्ञान उनके बेहिसाब खर्चो के बारे में रहता ही है पर तब आपके ऊपर एक ही जुनून सवार होता है किसी भी तरह बच्चे को ब्रांडेड स्कूल में ही पढ़ाना है तब आप अपना दिमाग बंद कर खर्च की परवाह नहीं करतें जेब की ताकत नहीं तोलते पर जैसे ही आगे शाला से उचित या अनुचित जो भी कह लें डिमांड आना प्रारंभ होती है तब फिर आप शाला प्रबंधन के खिलाफ लूट डकैती का इल्जाम लगानें लगते हो जो आपको पहले ही सोच लेना चाहिए था एक तरफ आप चाहतें हैं बच्चों के शिक्षक ऊंच गुणवत्ता(जो ऊंच पगार लेते हैं) के हों बच्चे को पढ़ाई पेन लेस हो उसकी क्लास डिजिटल हो स्पोर्ट्स के साथ दुनियाभर की एक्टिविटी हो (फिर भले आपके बच्चे में ही वह सब योग्यता न हो पर आप के लिए आपका बच्चा दुनिया का सबसे बुद्धिमान बच्चा है यह बात ठीक भी है ) तो स्वभाविक है शाला प्रबंधन का खर्च तो बढ़ेगा ही जो पालक के कंधों पर ही आना निश्चित है क्योंकि निजी शाला जिसनें भी करोड़ो लगाकर खोली है स्वभाविक है उसने यह कार्य समाज उद्धार को नहीं बिजनेस परपस से ही किया है तब आपको इतना तो सहन करना ही होगा वर्ना आपको अच्छे सरकारी या समाज संस्थाओं द्वारा संचालित निजी शाला की शरण में जाना चाहिए जो आप जाना नहीं चाहतें चॉइस तो आपकी थी कोई निजी ब्रांडेड शाला जबरजस्ती तो किडनैप करके आपके बच्चे को उठाकर अपनी शाला में एडमिशन नहीं करवाता, बाकी मेरा स्पष्ट मानना है कि अगर आप के बच्चों में टैलेंट हैं तो वह सरकारी स्कूल में पढ़कर भी मैरिट में आसकता है IS IPS इंजीनियर डॉक्टर साइंटिस्ट बन सकता हैं यह बात अभी जो मैट्रिक की मैरिट लिस्ट घोषित हुई उससे साफ है मैरिट लिस्ट के अधिकांश बच्चे छोटे गांव के साधारण सरकारी शालाओं से हैं अगर आपके बच्चे में वह योग्यता ही नहीं है तो उसे अच्छे से अच्छी महंगी स्कूल भी कुछ नहीं बना सकती योग्य बच्चा जिंदगी में पत्थर से पानी निकाल लेगा वर्ना लाख महंगे स्कूल हो मंहगी ट्यूशन कोंचिंग हो वह सफल नहीं हो सकता यह कड़वा सच सबको स्वीकार करना ही होगा तो बेहतर है पहले बच्चे की योग्यता परखें फिर अपनी जेब टटोलें फिर उस योग्य शाला चूने एक बात ओर याद रखें जब बच्चा 12वी पास करके आगे पढ़कर ऊंच शिक्षा प्राप्त कर किसी जॉब के लिए या प्रोफेशन में जाएगा तब वह किस स्कूल में पढ़ा है नर्सरी या फिफ्थ क्लास में उसके कितने परसेंटेज थे कोई नहीं पूछता ना ही आगे उसका कोई महत्व रह जाता है तो ब्रांडेड शाला में जो आप खर्च कर रहें हैं उसकी बचत करें जो बच्चे को ऊंचा शिक्षा में उपयोगी होगा,मैं ऐसे भी लोग को जानता हूं जो थ्रू आऊट फस्ट आतें रहें हैं पर जब वे प्रेक्टिकल लाइफ में आये तब पूरी तरह से फेल हो गए और जो बच्चा शाला में बमुश्किल पास होता रहा है वह जिंदगी की दौड़ में अव्वल रहें हैं अतः वास्विकता को खुले मन से स्वीकार करें यही सहीं रहेगा आपके विरोध करनें से आप अपने बच्चे को उस शाला में सबकी नजरों में गिरा देतें हैं वह शाला में उपेक्षा का सामना करनें लगता है जिससे उसमें आपके प्रति हीनता का भाव भरनें लगता है कि क्या मेरे पालक मेरी पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है इसीलिए वह मैनेजमेंट से लड़ रहें हैं यह भावना उसके नाज़ुक मन पर गहरा दाग छोड़ देता है वह कुंठाग्रस्त हो सकता है।

मेरे यह निजी विचार है इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं है मेरे मत से आपका सहमत होना जरूरी नहीं हैं।