नई दिल्ली. पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों गुनहगारों का डेथ वारंट जारी कर दिया। जज ने कहा कि 22 जनवरी को सुबह 7 बजे सभी दोषियों को फांसी दी जाएगी। दोषी अक्षय, पवन, मुकेश और विनय के पास डेथ वारंट के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 14 दिन का वक्त है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें फांसी दे दी जाएगी। दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करेंगे। अदालत के फैसले पर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि बेटी को इंसाफ मिल गया है। उन्होंने कहा कि दोषियों की फांसी देश की महिलाओं को ताकत देगी। फैसले से लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा मजबूत हुआ।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के सुनवाई के दौरान जज ने दोषियों से पूछा कि क्या जेल प्रशासन ने आपको नोटिस दिया था? इस पर सबने कहा कि हमें नोटिस दिया गया। दोषी अक्षय ने जज से बोलने की इजाजत मांगी और मीडिया पर खबरें लीक करने का आरोप लगाया। इसके बाद मीडिया को कोर्ट रूम से बाहर कर दिया गया। अक्षय ने कहा कि हम सभी क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करेंगे। दोषियों के वकील ने भी अदालत से क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए वक्त मांगा था। लेकिन, सरकारी वकील ने दलील दी कि यह केवल मामले को लंबा खींचने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि ये याचिका 2018 से लंबित है और बचाव पक्ष यह नहीं कह सकता कि उन्हें मौका नहीं मिला।

डेथ वारंट में फांसी का समय, जगह और तारीख का जिक्र होता है
डेथ वारंट को ब्लैक वारंट भी कहते हैं। इसमें फॉर्म नंबर-42 होता है, जिसमें फांसी का समय, जगह और तारीख का जिक्र होता है। इसमें फांसी पाने वाले सभी अपराधियों के नाम भी लिखे जाते हैं। इसमें ये भी लिखा होता है कि अपराधियों को फांसी पर तब तक लटकाया जाएगा, जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती। डेथ वारंट जारी होने पर दोषियों को इसके खिलाफ अपील करने के लिए 14 दिन का वक्त मिलता है। अपील हाईकोर्ट में करनी होगी। अगर अपील नहीं की तो 14 दिन बाद दोषियों को फांसी दे दी जाएगी।

कोर्ट रूम में किसने, क्या कहा

दोषियों के वकील: एपी सिंह और एमएल शर्मा ने कहा कि हमें क्यूरेटिव याचिका दायर करने के लिए समय दिया जाए।

सरकारी वकील: राजीव मोहन ने कहा कि जेल प्रशासन के दिए नोटिस पीरियड में कोई याचिका दायर नहीं हुई और कोई याचिका कोर्ट में लंबित नहीं है। ये याचिका 2018 से लंबित है। ऐसे में बचाव पक्ष ये नहीं कह सकता कि उन्हें बचाव का मौका नहीं मिला। अब ये अचानक से जागते हैं और कहते हैं कि उन्हें क्यूरेटिव याचिका दायर करनी है। ये मामले को लंबा खींचना चाहते हैं। अगर पुनर्विचार याचिका खारिज की जाती है तो क्यूरेटिव पिटीशन निश्चित समय में ही दायर की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ओपन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज की थी। दोषियों को कानूनी विकल्प अपनाने का भरपूर मौका दिया जा चुका है। अगर बचाव पक्ष को समय चाहिए तो कोर्ट डेथ वॉरंट जारी कर 14 दिन का टाइम दे दे। कोर्ट को डेथ वारंट जरूर जारी करना चाहिए।

एमिकस क्यूरी: वृंदा ग्रोवर ने कहा कि हमें कुछ दस्तावेज नहीं मिले हैं इसलिए क्यूरेटिव पिटीशन दायर नहीं की जा सकी। हमें कुछ वक्त चाहिए। मैं जेल में मुकेश और विनय से मिली थी। मुझे कोर्ट ने दोषियों के वकील नियुक्त किया है। मुझे दोषियों के बचाव का पूरा मौका मिलना चाहिए। अगर कोर्ट ऐसा नहीं करती है तो मुझे केस से डिस्चार्ज कर दिया जाए।

दोषी अक्षय: दोषी अक्षय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जज से बोलने की इजाजत मांगी। अक्षय ने मीडिया पर खबरें लीक करने का आरोप लगाया। इसके बाद मीडिया को कोर्ट रूम से बाहर कर दिया गया। जब जज ने पूछा कि क्या जेल प्रशासन ने नोटिस दिया था तो सभी दोषियों ने कहा कि हमें नोटिस दिया गया था। इसके बाद अक्षय ने कहा कि हम सभी अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहते हैं। 

कोर्ट ने कहा था- कैदियों को फिर नोटिस दिया जाए

पिछले महीने कोर्ट ने तिहाड़ प्रशासन को निर्देश दिया था कि कैदियों को एक बार फिर नोटिस दिया जाए। इसके बाद जेल प्रशासन ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने के लिए इन्हें दाेबारा से 7 दिन का नोटिस दिया था। इसमें से तीन दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन भी दायर करने की बात कही थी।

तिहाड़ ने फांसी की सभी तैयारियां पूरी कीं

तिहाड़-प्रशासन ने फांसी की सभी तैयारी पूरी कर ली हैं। चारों दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाने के लिए तिहाड़ जेल में करीब 25 लाख रुपए की लागत से एक नया फांसी घर तैयार किया गया है। 

निर्भया के साथ 6 लोगों ने बस में दरिंदगी की थी
16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई गई । ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है।

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