पठानकोट हमले के आरोपियों को पकड़ने में US करेगा मदद, NSG मेंबरशिप में भी सपोर्ट

वॉशिंगटन. मोदी ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में यूएस प्रेसिडेंट बराक ओबामा से मुलाकात की। दोनों लीडर्स के बीच टेरेरिज्म, क्लीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज, रीजनल सिक्युरिटी और साइबर सिक्युरिटी को लेकर बातचीत हुई। हालांकि, सबसे अहम MTCR और NSG का मुद्दा रहा, जिसके बाद इन दोनों मामलों में समर्थन के लिए मोदी ने ओबामा को शुक्रिया कहा। बता दें कि मोदी का यह 4th अमेरिकी दौरा और ओबामा से 7th मुलाकात है। फॉरेन सेक्रेटरी एस. जयशंकर ने बताया कि यूएस ने 26/11 मुंबई हमले की तरह पठानकोट हमले के आरोपियों पर भी शिकंजा कसने में मदद का वादा किया है। पढ़िए, मीटिंग के मेन डेवलपमेंट्स…
– बाइलेटरल मीटिंग के बाद ज्वाइंट मीडिया एड्रेसिंग में मोदी ने कहा, “मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में मेंबरशिप को लेकर मेरे दोस्त बराक ओबामा के सपोर्ट का मैं शुक्रिया अदा करता हूं।”
– ओबामा ने कहा, “मेन प्रायोरिटी है कि कैसे इकोनॉमिक डेवलपमेंट किया जाए और गरीबी को दूर किया जाए। इसके अलावा दोनों देशों के लिए बेहतर मौकों को बढ़ावा दिया जाए।”
– दोनों देश भारत में 6 न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने पर राजी हुए हैं। इसे करीब एक दशक से अटकी यूएस-भारत सिविल न्यूक्लियर डील के पूरे होने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
– ये बाइलेटरल मीटिंग व्हाइट हाउस में हुई, जहां बराक ओबामा ने गले लगाकर मोदी का वेलकम किया। यह दोनों लीडर्स के बीच सातवीं मुलाकात थी।
– इस दौरान 34 देशों वाले ‘मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम’ में भारत की एंट्री का रास्ता साफ हो गया है। इसे मोदी के दौरे की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
– ‘मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम’ का मेंबर बनने के बाद भारत दूसरे देशों से हाई-एंड मिसाइल टेक्नोलॉजी खरीद सकेगा। इसके अलावा भारत यूएस से प्रिडेटर ड्रोन भी खरीद सकेगा।
– पीएम मोदी 48 देशों वाले न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की मेंबरशिप के लिए स्विट्जरलैंड का सपोर्ट हासिल करने में कामयाब रहे हैं। इसके लिए यूएस के सपोर्ट से भारत की जियोपॉलिटिकल कंडीशन मजबूत होगी, जिससे न्यूक्लियर ट्रेडिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में मदद मिलेगी।
ज्वाइंट एड्रेसिंग में मोदी ने क्या कहा?
– न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में ओबामा के समर्थन का शुक्रिया अदा करता हूं।
– भारत और अमेरिका मिलकर काम करेंगे। नए क्षेत्रों में साथ मिलकर काम कर पाएंगे। दुनिया के कल्याण का सपने पूरा करेंगे।
– भारत एक युवा देश है। एक मिलियन पॉपुलेशन 35 से नीचे है। हमारा यूथ पावर अमेरिका के साथ मिलकर मानव कल्याण के लिए काम कर सकता है।
– संबंध और नई ऊंचाईयों पर जाना, साइबर सिक्युरिटी की चिंता की है।
– हमने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। मुझे इसका गर्व है।
– मैं ओबामा का बहुत आभारी हूं। मैं आभारी हूं कि मुझे कांग्रेस को संबोधित करने के लिए बुलाया गया। कई मुद्दों पर हमने बातचीत की है। डिप्लोमैटिक रिश्तों के अलावा दोस्ताना रिश्तों की भी अहमियत है।
ओबामा ने क्या कहा?
– मेरे दोस्त नरेंद्र मोदी का ओवल ऑफिस में स्वागत करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है।
– हम न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप का हिस्सा बनने के लिए भारत का सपोर्ट करते हैं।
– हमने न्यूक्लियर मैटेरियल और टेक्नोलॉजी के प्रसार को रोकने के मुद्दे पर भी बातचीत की।
– मोदी की लीडरशिप ने न केवल भारतीयों में, बल्कि अमेरिकन्स में भी नया एक्साइटमेंट पैदा किया है।
अमेरिका ने भारत को लौटाईं 660 करोड़ की मूर्तियां
– ब्लेयर हाउस में हुए एक प्रोग्राम में अमेरिका ने 200 ज्यादा मूर्तियां भारत को लौटाईं। ये मूर्तियां चोरी होकर विदेश में बेच दी गई थीं।
– अमेरिका द्वारा लौटाई गई मूर्तियों की कुल कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर (660 करोड़ रुपए) है।
– मोदी ने इस मौके पर कहा, ”कुछ लोगों के लिए ये केवल पैसों की बात हो सकती है। लेकिन यूएस के लिए ये उससे कहीं ज्यादा है। ये हमारे कल्चर और हैरिटेज का हिस्सा है।”
– इनमें देवी-देवताओं की कुछ मूर्तियां ब्रॉन्ज और टेरा-कोटा की हैं। कुछ ऐसे स्टैचू भी हैं जो 2 हजार साल से ज्यादा पुराने हैं।
– इन मूर्तियों को भारत के बेहद पुराने और फेमस रिलिजस प्लेसेज से चुराया गया था।
– इनमें चेन्नई के सिवन मंदिर से चुराई गई संत मानिकविच्वकर की मूर्ति भी है।
– जो चोल काल (850 ईसा पश्चात से 1250 ईसा पश्चात) के तमिल कवि थे। इसकी कीमत करीब 10 करोड़ है।
– अमेरिका के होम सिक्युरिटी मिनिस्टर जेह जॉनसन के मुताबिक मोदी को लौटाई गई अधिकतर मूर्तियां ‘ऑपरेशन हिडन आइडल’ के दौरान बरामद की गई थीं।
– यह जांच 2007 में शुरू हुई थी। इस मामले में आर्ट ऑफ द पास्ट गैलरी का मालिक सुभाष कपूर हिरासत में लिया गया था। उस पर भारत में मुकदमा चल रहा है।
डेविड कैमरन, फ्रांस्वा ओलांद और शी जिनपिंग की कैटेगिरी में मोदी
– नरेंद्र मोदी इस स्टेट विजिट के साथ डेविड कैमरन, फ्रांस्वा ओलांद और शी जिनपिंग जैसे उन नेताओं की कैटेगिरी में आ गए हैं जो ओबामा के मेहमान बने हैं।
– मोदी से पहले जिनपिंग सितंबर 2015 में यूएस स्टेट विजिट पर गए थे।
– फरवरी 2014 में फ्रांस के प्रेसिडेंट फ्रांस्वा ओलांद भी यूएस स्टेट विजिट पर आए थे।
– इनके अलावा डेविड कैमरन, शिंजो आबे, हू जिंताओ जैसे नेता स्टेट विजिट पर यूएस आ चुके हैं।
क्या है मोदी का यूएस में प्रोग्राम?
– व्हाइट हाउस में ओबामा से मुलाकात।
– पहले डेलिगेशन लेवल पर फिर वन-टू-वन होगी बात।
– इसके बाद दोनों नेता ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को ब्रीफ करेंगे।
– प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद लंच पर मोदी यूएस लीडर्स के गेस्ट होंगे।
– शाम को अमेरिका के टॉप कॉरपोरेट लीडर्स से मिलेंगे।
– इस डेलिगेशन में अमेजन सीईओ जेफ बेजोस भी हैं।
– यहां मोदी का फोकस अमेरिका से एफडीआई लाने पर होगा।
– मोदी 40th यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल को ऐड्रेस करेंगे।
– मोदी का एक कल्चरल इवेंट में भी जाने का प्रोग्राम है।
बुधवार को करेंगे यूएस कांग्रेस को ऐड्रेस
– यूएस कांग्रेस के ज्वाइंट सेशन को ऐड्रेस करेंगे
– 8 जून की दोपहर मोदी वॉशिंगटन से मेक्सिको सिटी के लिए निकलेंगे।

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