पठानकोट हमले के लिए बना आतंकियों का कैंप PAK ने किया शिफ्ट, ऐसे हुआ खुलासा

नई दिल्ली.पठानकोट हमले को लेकर पाकिस्तान में बना आतंकियों का सीक्रेट कैम्प शिफ्ट हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने गुपचुप तरीके से जैश के उस कैम्प को शिफ्ट कर दिया है जिस पर आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमले के लिए ट्रेनिंग ली थी। आईएसआई ने इसके लिए ऑर्डर दिया था। बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद का ठिकाना बहावलपुर में है।
फोर्ट मौजागढ़ में दी गई थी टेररिस्ट को ट्रेनिंग…
– इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पठानकोट हमले को अंजाम देने वाली जैश की टीम को फोर्ट मौजागढ़ के पास ट्रेनिंग दी गई थी।
– फोर्ट मौजागढ़ के पास ट्रेनिंग कैंप बनाए गए थे।
– भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियों का मानना है कि जैश टेररिस्ट के स्पेशल मिशन को अंजाम देने के लिए यहीं कैंप बनाए गए थे।
– बता दें कि जैश का मेन ठिकाना बहावलपुर से 62 किमी दूर है।
– इंटेलिजेंस का ये भी मानना है कि ट्रेनिंग यूनिट्स जैश के मुख्य ठिकाने पर थी लेकिन उनके पास हथियार नहीं थे।
सैटेलाइट इमेज से क्या पता चला?
– सैटेलाइट इमेजेज से पता चला है कि फोर्ट मौजागढ़ के पीछे की टूटी हुई दीवार के पास दो बड़े कॉम्प्लेक्स बनाए गए थे।
– एक कॉम्प्लेक्से का एरिया करीब 750 स्क्वेयर मीटर में फैला था।
– एक कॉम्प्लेक्स ईस्ट की तरफ था तो दूसरा साउथ की तरफ।
– एक कॉम्प्लेक्स में बिल्डिंग्स की तरह बैरक बनाई गई थीं। इसमें एक तालाब भी था।
– सदर्न कॉम्प्लेक्स भी मेन बिल्डिंग का ही हिस्सा था। इसकी सिक्युरिटी के लिए ऊंची दीवार बनाई गई थी। घरों को पानी के रिजर्वायर के पास ही बनाया गया था।
ये भी कहना है इंटेलिजेंस का?
– इंटेलिजेंस का ये भी मानना है कि जैश अभी भी बहावलपुर के अपने ठिकाने से ही ऑपरेट कर रहा है।
– फोर्ट मौजागढ़ में सीमापार एक खास काम के लिए बेस बनाया गया था।
– इंटेलिजेंस अफसरों की मानें तो यहां के डेजर्ट से सटी जमीन को ‘चक 48’ के नाम से जाना जाता है।
– मौजागढ़ के वेस्ट से एक सड़क भारत-पाकिस्तान डेजर्ट के साथ सीमा तक आती है।
– इंटेलिजेंस एजेंसियों के मुताबिक, 2009 में जैश ने फोर्ट मौजागढ़ से 72 किमी दूर फोर्ट अब्बास में ट्रेनिंग कैम्प लगाया था।
– फोर्ट अब्बास, भारत-पाक सीमा पर फकीरवाली इलाके से काफी पास है।
किसने बनवाया था फोर्ट मौजागढ़?
– 18th सदी में मोहम्मद मारूफ खान केहरानी द्वारा बनवाए गए किले से कारवां पर नजर रखी जाती थी।
– ऊंटों का ये कारवां सिंधु नदी-कच्छ की खाड़ी से पंजाब के शहरों को जोड़ता था।
– इस इलाके में भाटी समुदाय के लोग रहते हैं। इन्हें बहावलपुर के शासकों ने इलाके में बसाया था।
– 2011 तक टूरिस्ट कभी-कभी फोर्ट मौजागढ़ घूमने आते थे। हाल ही में यहां टूरिस्ट्स की तादाद घटी है।
– लोकल्स ने बताया कि कुछ महीनों पहले सादे कपड़ों में कुछ शख्स खंडहरों को देखने आए थे।

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