पेट्रोल पर हल्ला करने वाली कांग्रेस-CPM अपने राज्यों में टैक्स क्यों नहीं घटातीं

नई दिल्ली.पेट्रोल के बढ़ते रेट विपक्ष की आलोचनाओं का अरुण जेटली ने जवाब दिया है। उन्होंने बुधवार को कैबिनेट की मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- जो लोग हल्ला कर रहे हैं, जब वे सरकार में थे तो 11% इन्फ्लैशन था। दो साल पहले तक जब पेट्रोल के रेट कम होते थे तो दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल की सरकारें उतना ही VAT बढ़ा देती थीं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि कांग्रेस और सीपीएम की अब जहां राज्य सरकारें हैं, वो कह दें कि उन्हें पेट्रोल से टैक्स नहीं चाहिए, चाहे वो उनके राज्य का हो या केंद्र को मिलने वाले टैक्स में उनका शेयर हो। उनकी सरकारें अपना हिस्सा क्यों नहीं छोड़ देतीं?
और क्या बोले जेटली…
– अरुण जेटली ने कहा, ”मैं सबसे पहले स्पष्ट कर दूं कि जो लोग हल्ला कर रहे हैं, जिन राजनीतिक दलों का जिक्र कर रहे हैं, जब वो सरकार में थे तो 11% इन्फ्लैशन था। आज 3.26% इन्फ्लैशन पर वो हल्ला कर रहे हैं। मानसून के महीनों में तो अक्सर सब्जियों के दाम बढ़ता है। इसके बाद भी इन्फ्लैशन कंट्रोल में है।”
– ”मीडिया में बार-बार पेट्रोल का जिक्र आ रहा है। कुछ राजनीतिक दल भी विशेष रूप से कह रहे हैं। जहां उन राजनीतिक दलों की सरकारें हैं, वो खुद कितना टैक्स ले रही हैं पेट्रोल-डीजल पर?”
– वित्त मंत्री ने कहा, ”दो साल पहले तक हर पखवाड़े में ऑयल कंपनियां रिव्यू करती थीं। रेट कम होते थे। जितने रेट हम कम करते थे, उसी दिन शाम को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल की सरकारें उतना ही VAT बढ़ा लिया जाता था। और जो केंद्र को पेट्रोल से टैक्स आता है, उसका 42% भी राज्यों को जाता है। तो कांग्रेस और सीपीएम की जहां राज्य सरकारें हैं, वो कह दें कि उन्हें पेट्रोल से टैक्स नहीं चाहिए, चाहे वो उनके राज्य का हो या केंद्र को मिलने वाले टैक्स में उनका शेयर हो।”
आज के हालात अलग है- फाइनेंस मिनिस्टर
– पेट्रोल-डीजल के बढ़ते रेट के चलते उन्हें जीएसटी के दायरे में लाने के सवालों पर जेटली ने कहा- ”मौजूदा हालात अलग हैं। यूएस में साइक्लोन आने से रिफाइनरी कैपेसिटी कम हुई है। डिमांड-सप्लाई में बैलेंस बिगड़ा। यह टेम्पररी स्पाइक है। वो जल्द ही सीमित हो जाएगा।”
– पेट्रोल पर टैक्स के बारे में उन्होंने कहा, ”किसी भी देश को चलाने के लिए हाईवेज कैसे बनेंगे, इन्फ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्टमेंट हो रहा है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट इन्हीं रिसोर्सेस से आ रहा है। सोशल सेक्टर्स या इन्फ्रास्ट्रक्चर स्कीम्स चलाने के लिए पैसा चाहिए होता है।
इकोनॉमी के लिए जल्द हो सकते हैं कुछ एलान
– जेटली से पूछा गया कि इकोनॉमी को और मजबूत करने के लिए क्या सरकार कुछ कदम उठा रही है। इस पर जेटली ने कहा- हमने सभी इकोनॉमिक इंडिकेटर्स पर गौर किया है। हमारी सरकार प्रोएक्टिव रही है। हम लगातार रिफॉर्म के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। हमने बीते दो दिन में मंत्रालय के अंदर इसकी चर्चा की है। मैं प्रधानमंत्रीजी से बात करूंगा और इसके बाद इकोनॉमी को और मजबूत बनाने के कदमों का एलान करूंगा।
जीएसटी के दायरे में लाए जाएं पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स- प्रधान
– देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती कीमतों पर पिछले दिनों धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि इनको भी जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए।
– उन्होंने कहा था, “इससे टैक्स कितना लगेगा यह तय हो जाएगा। जीएसटी काउंसिल इस बारे में तमाम राज्यों से अपील करेगी।”
– इससे पहले प्रधान ने कहा था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों की डेली रिवीजन पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
क्या है डायनमिक फ्यूल प्राइस फॉर्मूला?
– 16 जून से सरकार ने डायनमिक फ्यूल प्राइस का फॉर्मूला अपनाया था, जिसमें डेली बेसिस पर पेट्रोल और डीजल की कीमते रिव्यू हो रही हैं। यह फैसला लागू होने के बाद से 1 जुलाई के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 7.29 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर 70.38 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं। इससे पहले अगस्त 2014 में दिल्ली में पेट्रोल महंगा होकर 70.33 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया था। इसी तरह से डीजल की कीमतों में 1 जुलाई के बाद से 5.36 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोत्तरी हुई है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की 3 वजह
– सरकार के मुताबिक, अमेरिका में हार्वे-इरमा तूफान से क्रूड प्रोडक्शन पर असर पड़ा है। इसलिए क्रूड के दाम 15% तक बढ़ गए।
– हाल के दिनों में इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल 18% और डीजल 20% महंगा हुआ है।
– सितंबर में भारतीय बास्केट क्रूड के दाम 171 रुपए प्रति बैरल यानी 5% बढ़ गए हैं।
और सच ये है… 4 महीने में सरकार ने 1.15 लाख करोड़ रुपए वसूले
1. क्रूड ऑयल:
तीन साल में 46% तक सस्ता हो चुका है क्रूड ऑयल
– पेट्रोल-डीजल की कीमतें तीन साल में सबसे ज्यादा हो चुकी हैं। पर इस दौरान क्रूड ऑयल का भारतीय बास्केट 46% से ज्यादा सस्ता हो चुका है। अगस्त 2014 में क्रूड 6291.91 रु. बैरल था, जो अब घटकर 3392.90 रु. हो चुका है। एक बैरल 159 लीटर के बराबर होता है।
2. लेकिन सरकार… पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 126% और डीजल पर 387% तक बढ़ा चुकी है
@पेट्रोल:
अगस्त 2014 में एक्साइज ड्यूटी 9.48 रुपए थी। अब 21.48 रुपए प्रति लीटर है। यानी 126% की बढ़त हुई है।
@डीजल:अगस्त 2014 में 3.56 रुपए थी। अब 17.33 रुपए प्रति लीटर है। यानी इसमें 387% का इजाफा हो चुका है।
– 73 हजार करोड़ रुपए चार महीने में केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी से वसूले।
– 42 हजार करोड़ रुपए राज्यों ने वैट से वसूले। दोनों मिलाकर 1.15 लाख करोड़।

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