पेट्रोल बम फेंके, ट्रक और पांच स्कूल बसों में आग लगाई, पुलिस ने घरों में घुस-घुसकर पीटा

भोपाल. मंदसौर, नीमच और शाजापुर के बाद किसान आंदोलन की आग अब राजधानी में भी सुलग गई है। सीहोर और भोपाल से सटे इलाकों में सुबह से किसानों ने वॉट्सएप ग्रुप पर मैसेज फैलाया- ‘सब एकत्रित हो जाएं, किसान भाइयों को पुलिस ने पकड़ा है। मारपीट की जा रही है’। देखते ही देखते भोपाल-इंदौर रोड पर फंदा गांव और टोल नाके पर लोग इकट्‌ठा होना शुरू हो गए। कुछ देर बाद उत्पात शुरू हो गया।
भीड़ ने सड़क से गुजर रहे हर वाहन पर पथराव किया। पेट्रोल बम फेंककर एक ट्रक और पांच स्कूल बसों में आग लगा दी। सुबह वहां पुलिस के 50 जवान तैनात थे। दोपहर तक यह संख्या 500 से ज्यादा हो गई। उपद्रवियों पर 100 से ज्यादा आंसूगैस के गोले दागे गए, लाठीचार्ज भी किया। हालात उस वक्त बिगड़ गए जब पुलिस की टीमें गांवों में घुस गईं और घरों से निकालकर लोगों को पीटना शुरू कर दिया। महिलाओं और बुजुर्गों को भी नहीं छोड़ा। पुलिस ने 53 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। उधर, धार में भी पुलिस पर पथराव किया गया।
10 साल में मप्र के 11500 किसानों ने आत्महत्या की
2006 से लेकर 2015 के बीच मप्र में 11500 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की। यानी हर साल एक हजार से अधिक किसानों ने जान दी। यह रिपोर्ट पीएचक्यू के अपराध अनुसंधान विभाग के एडीजी कैलाश मकवाणा ने कृषि विभाग को भेजी। शासन ने इसे केंद्र को भेजी है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें राज्यों से आत्महत्या के साथ तमाम जानकारी मांगी गई है। इसी के बाद राज्य सरकार ने किसानों की आत्महत्या के मामले से केंद्र सरकार को अवगत कराया है। इसके साथ किसानों की उन्नति के लिए भविष्य की कार्ययोजना भी भेजी है। मकवाणा ने बताया कि रिपोर्ट कृषि उत्पादन आयुक्त कार्यालय में भेजी गई। पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट में किसानों की आत्महत्या की वजह का उल्लेख नहीं है। सिर्फ इतना है कि वह किसान है। यह बात जरूर है कि साल-दर-साल आत्महत्या करने वालों की संख्या घटी है।
17 लाख के कर्ज में डूबे किसान ने की आत्महत्या
बेटी ने कहा- खाना खा लो पापा, पिता बोले- अब जरूरत नहीं… मैंने सल्फास खा लिया
रायसेन में सगौनी गांव के किसान किशनसिंह मीणा (45) ने सल्फास खाकर जान दे दी। उस पर बैंक का 10 लाख, साहूकारों का 5 लाख और बिजली का बिल तकरीबन 2 लाख रुपए बकाया था। गुरुवार शाम घर पहुंचने पर बेटी ने पिता से खाना खाने को कहा- तो किशन बोला- मुझे अब खाने की जरूरत नहीं, मैंने सल्फास खा लिया है।
थाना जलाने के लिए उकसा रही थीं कांग्रेस विधायक
शिवपुरी में करैरा से कांग्रेस विधायक शकुंतला खटीक का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह कथित तौर पर थाना जलाने के लिए भीड़ को उकसाती दिख रही हैं। यह वीडियो गुरुवार का बताया गया है।
आज से उपवास पर बैठेंगे सीएम
भोपाल में हिंसक हो रहे किसान आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदर्शनकारी किसानों से कहा कि वे भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आएं और मुझसे बात करें। वहांं शनिवार सुबह 11 बजे से मैं उपवास पर बैठूंगा और उनकी पूरी बात सुनूंगा। यह उपवास भी अनिश्चितकाल तक करूंगा, जब तक कि किसान अपनी बात नहीं कह देते। उन्होंने कैबिनेट को भी दशहरा मैदान में ही बुला लिया है। सीएम रात में भी यहीं रुक सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम शांति बहाली के लिए उठाया है, क्योंकि मप्र में आंदोलन अराजक स्थिति में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सीएम हाउस में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि वल्लभभवन से नहीं, अब सरकार दशहरा मैदान से ही चलेगी। निर्णय, निर्देश और बैठकें भी वहीं होंगी। आंदोलन के बीच में आए मुख्यमंत्री के इस फैसले को सियासी जगत ‘मास्टर स्ट्रोक’ मान रहा है। सारे किसानों का रुख भोपाल की तरफ होगा और वे सीधे मुख्यमंत्री से बात करने के लिए यहां आ जाएंगे। किसान नोटबंदी से भी परेशान रहे, इसलिए यह बात वे प्रमुखता से मुख्यमंत्री के समक्ष रख पाएंगे। बहरहाल, मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से बात रखें। क्योंकि आंदोलन करने वालों ने 18, 20 व 22 साल के युवकों के हाथों में पत्थर थमा दिए हैं। जनता को सुरक्षा देना राजधर्म है, जिसे निभाऊंगा। अब अराजकता फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। मप्र की भाजपा सरकार ही है, जिसने देश में जो भी किसानों को लाभ मिला है, प्रदेश में उसे पहले दिया है। उनके लिए नई योजनाएं व राहत देने के लिए अभूतपूर्व कदम भी उठाए हैं। किसानों की कर्ज माफी के सवाल पर शिवराज सिंह ने साफ कर दिया है, 75 फीसदी किसान कर्ज चुका रहे हैं। जो बचे हुए डिफाल्टर हैं, उनके लिए समाधान स्कीम लाई जा रही है। इसलिए कर्ज माफी की बात नहीं है।
पहले भी उपवास पर बैठ चुके हैं शिवराज
जून 2012 – खाद की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर किसान बचाओ अनुष्ठान किया और 24 घंटे के लिए उपवास पर बैठे। तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी।
मार्च 2014 – अतिवर्षा के किसानों को हुए नुकसान को देखते हुए 5000 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की मांग को लेकर धरने पर बैठे।
(2011 में एक बार मुख्यमंत्री ने फिर उपवास पर बैठने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री से बात होने के बाद वे नहीं बैठे।)
संवैधानिक दिक्कत नहीं : पूर्व मुख्य सचिव
पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच ने कहा कि यह उपवास किसी सरकारी व्यवस्था के विरुद्ध नहीं है। न ही आंदोलन की कोई बात उन्होंने की है। हालांकि यह अव्यवहारिक सा लगता है। किसानों को तकलीफ है तो वे मुख्यमंत्री हैं, दूर करें। उपवास पर बैठेंगे तो पुलिस वाले ही मिलने नहीं देंगे। पूर्व मुख्य सचिव केएस शर्मा का भी कहना है कि कोई संवैधानिक दिक्कत नहीं है। यह उपवास समस्या को सुलझाने के लिए है।
उपवास करना है तो इस्तीफा दें : नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री के उपवास को चुनौतियों का सामना करने के बजाए उनसे भागने का प्रयास बताया है। सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक है। यदि शिवराज सिंह को उपवास ही करना है और मंत्रालय से बाहर बैठना है तो पद से इस्तीफा दें।

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