प्रदेश के ऊर्जा उत्पादन में नवकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 21 फीसदी होगा

प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों के दोहन के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम ने नई प्रोत्साहन नीति बनाई हैं। निर्माणाधीन योजनाओं से मार्च 2017 तक स्थापित क्षमता 5 हजार 247 मेगावाट हो जायेगी।

इसके बाद प्रदेश की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 4.09 से बढ़कर 21 प्रतिशत होगी। रीवा जिले की गुढ़ तहसील में दुनिया के सबसे बड़े 750 मेगावाट क्षमता के अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क की स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है। प्रदेश में नदी, नहर, बाँध एवं अन्य जल स्त्रोतों में उपलब्ध जल के उपयोग से विद्युत उत्पादन किये जाने के लिए जल-विद्युत आधारित परियोजनाओं की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए प्रोत्साहन नीति-2011 भी जारी की है।

प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एशिया की सबसे बड़ी 130 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा आधारित विद्युत परियोजना नीमच जिले में स्थापित की गयी है। वर्ष 2013-14 में 306 मेगावाट क्षमता स्थापित कर मध्यप्रदेश ने देश में सबसे ज्यादा सौर क्षमता स्थापित करने वाले प्रदेश का खिताब हासिल किया है।

प्रदेश में कृषि अवशिष्ट, अनुपयोगी लकड़ी के डन्ठलों और टुकड़ों का उपयोग कर बॉयोमास से विद्युत उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। अक्टूबर 2014 में इंदौर में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने अपारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों से निजी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन को बढ़ाने के लिए देशी एंव विदेशी निवेशकों से विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की थीं। निवेशकों से प्राप्त प्रस्तावों को कियान्वित करने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।