प्राइवेसी पर फैसला BJP को झटका: राहुल; पहले होमवर्क करें: कानून मंत्री

नई दिल्ली.कांग्रेस ने राइट टू प्राइवेसी को बुनियादी हक करार दिए जाने का स्वागत किया है। राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला फासीवादी ताकतों को रोकने में मदद करेगा। ये सर्विलांस के जरिए लोगों के दमन की बीजेपी की विचारधारा को खारिज करता है। निजता, आजादी और सम्मान लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। ये सभी भारतीयों की जीत है। इस पर बीजेपी ने कहा कि राहुल गांधी को रिएक्शन देने से पहले होमवर्क करना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट की कॉन्स्टीट्यूशनल बेंच के 9 जजों ने राइट टू प्राइवेसी पर फैसला दिया है।
राहुल बोलने से पहले होमवर्क करें: रविशंकर
– कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ”मोदी सरकार राइट टू प्राइवेसी के फैसले का स्वागत करती है। गरीब तो बहुत खुश है इससे, उसके बैंक अकाउंट में सीधा पैसा जा रहा है। राजीव गांधी ने कहा था कि सरकारी फंड के 1 रुपए का 15 पैसे ही जरूरतमंदों तक पहुंचता है। लेकिन हमारी सरकार में 100% रकम पहुंचती है। बाकी मौलिक अधिकारों की तरह इस पर भी कुछ नियंत्रण है। जेटलीजी ने सदन में जो बात रखी थी, ये फैसला उसी के मुताबिक है।”
– ”सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल ने दलील दी कि राइट टू प्राइवेसी कुछ सही प्रतिबंधों के साथ फंडामेंटल राइट्स का हिस्सा है। सरकार किसी को आधार डाटा सार्वजनिक करने की इजाजत नहीं देती।”
– ”आज सुबह से ही कांग्रेस और लेफ्ट वाले हम पर हमला बोल रहे हैं। सिविल लिबर्टी की दुहाई दी जा रही है, वो भी बिना जजमेंट पढ़े। कांग्रेस ने आज तक प्राइवेसी के लिए क्या किया।”
– रविशंकर ने राहुल के बयान पर कहा, ”उन्होंने जो ट्वीट किया। उसे देखकर लगता है कि राहुल को ठीक से होमवर्क करना चाहिए था। एक बार फैसले पढ़ तो लेते, कांग्रेस के सीनियर नेताओं को भी उनकी आदत लग गई। राहुल बिना होमवर्क किए आरोप लगाते हैं।”
फैसले पर क्या बोलीं सोनिया?
– कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी ने कहा, ”राइट टू प्राइवेसी को बुनियादी हक मानने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला नागरिकों के अधिकारों, आजादी और सम्मान के लिए नए युग की शुरुआत है। ये राज्यों और उनकी एजेंसियों के द्वारा कराई जा रही निगरानी को रोकेगा।”
– ”कांग्रेस और विपक्षी दलों ने निजता के अधिकार को खत्म करने के बीजेपी सरकार के ‘अहंकारी’ प्रयासों के खिलाफ मिलकर आवाज उठाई है।”
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राइट टू प्राइवेसी बुनियादी हक है। यह फैसला सुनाने वाली 9 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस जेएस खेहर कर रहे थे। बेंच में जस्टिस जे चेलेमेश्वर, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आरके आग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस अभय मनोहर सप्रे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय कृष्ण कौल और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे।
– इनमें चीफ जस्टिस, जस्टिस नरीमन और जस्टिस नजीर हाल ही में तीन तलाक पर फैसला सुनाने वाली बेंच में भी शामिल थे।
प्राइवेसी का मुद्दा क्यों उठा?
– राइट टू प्राइवेसी का मुद्दा तब उठा, जब सोशल वेलफेयर स्कीम्स का फायदा उठाने के लिए आधार को केंद्र ने जरूरी कर दिया और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशंस दायर की गईं। इन पिटीशंस में आधार स्कीम की कॉन्स्टिट्यूशनल वैलिडिटी को यह कहकर चैलेंज किया गया कि ये प्राइवेसी के बुनियादी हक के खिलाफ है।
– इसके बाद 3 जजों की बेंच ने 7 जुलाई को कहा कि आधार से जुड़े सभी मुद्दों का फैसला बड़ी बेंच करेगी और चीफ जस्टिस कॉन्स्टिट्यूशन बेंच के गठन का फैसला लेंगे। तब चीफ जस्टिस जेएस खेहर के पास मामला पहुंचा। उन्होंने 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच का गठन किया। इस बेंच ने 18 जुलाई को 9 जजों की बेंच के गठन का फैसला लिया।

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