लखनऊ (आदित्य तिवारी). देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में तीन दशक से राजनीतिक संन्यास का वनवास झेल रही कांग्रेस वापसी के लिए बेताब है। यही वजह है कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद यहां राजनीति में खासी सक्रिय हैं। वह चुनाव बाद लखनऊ चार बार तो प्रदेश के अन्य जिलों को मिलाकर 12 बार आ चुकी हैं। प्रियंका ने अब तक 431 ट्वीट किए, जिनमें 360 ट्वीट के जरिए प्रदेश के मसले उठाए गए।  

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जमीन मजबूत करने के लिए प्रियंका तीन हजार सदस्यों की एक “स्पेशल चेन” तैयार कर रहीं हैं, जिसे 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस अजय कुमार लल्लू बताते हैं कि प्रियंका प्रत्येक दिन उत्तर प्रदेश के किसी न किसी जिले में कार्यकताओं से फोन पर बात करती हैं और पार्टी के मुद्दों पर चर्चा करती हैं। प्रियंका के पास करीब तीन हजार सदस्यों के फोन नम्बर हैं। 

प्रियंका 8 माह पहले ही सोशल मीडिया पर सक्रिय हुईं
प्रियंका मई 2019 से सोशल मीडिया के ट्वीटर प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हुईं। इसके बाद वह लगातार उत्तर प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर योगी सरकार को घेरती नजर आईं। उन्होंने युवाओं, महिला और सीएए के मुद्दों पर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए। यूपी के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रभाकर पांडेय का कहना है कि कांग्रेस जनता के मुद्दे पर सरकार को घरेगी और सरकार के पक्षपात रवैए को सबके सामने लाएगी। 

नए साल पर गांव-गांव, गली-गली पहुंचाया जा रहा प्रियंका का खत
प्रियंका ने नए साल के मौके पर लाखों चिट्ठियों के जरिए लोगों से सम्पर्क साधा है। प्रदेश के बुद्धजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों, पत्रकारों, लेखकों, महिला नेत्रियों, छात्र नेताओं, कर्मचारियों, कवि और पार्टी के पदाधिकारियों को खत के जरिए वे नए साल की शुभकामनाएं भेजी हैं। नए साल के इस ग्रीटिंग की खास बात ये है कि इसके एक तरफ भारतीय संविधान की प्रस्तावना को छापा गया है तो दूसरी तरफ नए साल का बधाई संदेश है। कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश के मीडिया इंचार्ज राजीव त्यागी का कहना है कि बधाई संदेशों को प्रदेश में हर वर्ग तक पहुंचाया जा रहा है। 

ब्राह्मणों को पाले में खींचने पर जोर
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सभी वर्ग के वोट को साधने के प्रयास में है। इसके अलावा, सरकार से नाराज चल रहे ब्राह्मणों को लेकर अलग रणनीति बनाई जा रही है। ब्राह्मण चेहरा के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद लगातार समाज के पीड़ित परिवारों से मिल रहे हैं। उन्होंने अपने इस अभियान का नाम भी ब्राह्मण चेतना यात्रा दिया है। वे झांसी, मैनपुरी, बस्ती समेत पूरे प्रदेश में ब्राह्मण परिवारों के घर जाकर मुलाकात कर रहे हैं। इसी क्रम में 4 जनवरी को प्रयागराज में ब्राह्मण परिवार के पांच सदस्यों की हत्या के बाद परिवार से मिलने कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी पहुंचे। प्रियंका ने भी मैनपुरी कांड में खासी सक्रियता दिखाई। प्रियंका के पत्र लिखने के बाद सरकार हरकत में आई और पुलिस अमले पर कार्रवाई हुई। 


कभी ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित थे कांग्रेस का बेस वोट बैंक
वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल बताते हैं कि साल 1989 तक कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में बेस वोट बैंक ब्राह्मण, दलित और मुसलमान थे। प्रदेश में 11% ब्राह्मण, 25% दलित और 18% मुस्लिम हैं। वहीं, जब एंटी कांग्रेस माहौल बना तो जनता दल फिर सपा-बसपा जैसे दल उभरे, जिन्होंने ओबीसी के लिए तो लड़ाई लड़ी ही, साथ ही कांग्रेस के बेस वोट बैंक में भी सेंध लगाई। राजीव गांधी के निधन के बाद कांग्रेसी नेता पहले यही सोचते थे कि पीएम तो उत्तर प्रदेश से होगा। लेकिन, 1991 में नरसिम्हा राव पीएम बने तो यूपी वालों का भ्रम टूट गया। कहा जाता है कि यहीं से यूपी कांग्रेस का पतन भी शुरू हुआ। प्रियंका ने अब अपने बेस वोट बैंक को दोबारा साधने की कोशिश शुरू की है।

कांग्रेस को नहीं मिल रहे कार्यकर्ता : भाजपा
उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के सक्रिय होने पर भाजपा ने तंज कसा है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का कहना है कि कांग्रेस को यहां खोजने से भी कार्यकर्ता नहीं मिल रहे हैं इसलिए प्रियंका हिंसा करने वालों के घर जा रही हैं। एक समय कांग्रेस का उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री बनता था, उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी अमेठी से चुनाव हार गए इसलिए प्रियंका यहां सक्रिय हैं।

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