फिल्म समीक्षा: कैसी है ‘भाग मिल्खा भाग’?

tatpar 12 july 2013

नई दिल्ली। आज बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई है फरहान अख्तर की भाग मिल्खा भाग। ये फिल्म बनने के समय से ही चर्चा में रही है। अपने किरदार के लिए फरहान ने कड़ी मेहनत की, खाने-पीने की चीजों से तौबा की, घंटों जिम में पसीना बहाया और फिर मिल्खा सिंह जैसा शरीर बनाया। इसके अलावा सोनम ने महज एक रुपया लेकर फिल्म में काम किया। यही वजह है कि फिल्म चर्चा में रही। कलाकारों की ये मेहनत फिल्म में बखूबी नजर भी आती है।

मिल्खा को पर्दे पर हूबहू उतारा

फिल्म का आखिरी सीन है। मिल्खा सिंह पाकिस्तान में ही पाकिस्तानी एथलीट अब्दुल खालिक को हराते हैं तो पाकिस्तान के उस वक्त के प्रेजिडेंट फील्ड मार्शल अयूब खान उन्हें मेडल देते हुए कहते हैं, आप आज दौडे नहीं हैं, बल्कि आज आपने उड़ान भरी है। आज से दुनिया आपको फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह के नाम से जानेगी। ये बात मैं इसलिए बता रहा हूं क्योंकि जिस कहानी के बारे में दर्शकों को एक एक बात पता होती है, उसपर फिल्म बनाना एक चैलेंज होता है। राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने फरहान अख्तर को लेकर मिल्खा की जिंदगी को हूबहू या शायद उससे भी बेहतर पर्दे पर उतार दिया है। फिल्म कई जगह इतनी इमोशनल है कि अगर मिल्खा सिंह खुद अपनी कहानी देखें तो कई बार उनकी आंखों से आंसू आ जाएंगे।

कहानी क्या है

‘भाग मिल्खा भाग’ में सिर्फ मिल्खा का एथलीट करियर ही नहीं है, उसमें उनकी वो जिंदगी भी है जिसमें बंटवारे का दर्द है, पाकिस्तान में अपने मां-बाप के मारे जाने का दुख है। ओलंपिक पदक न जीत पाने की टीस है तो अनगिनत पदक जीतने की खुशी भी है। फिल्म शुरू होती है पाकिस्तान में मिल्खा सिंह के बचपन से। सबकुछ ठीकठाक चल रहा है कि अचानक बंटवारे की खबर आती है मिल्खा सिंह को भागकर इंडिया आना पड़ता है। उसके बाद उसका बचपन अभाव, और चोरी चकारी करते हुए बीतता है। लेकिन अपनी मोहब्बत सोनम से किया गया वादा कि अब वो सारे गलत काम छोड़ देगा, उसे पहुंचा देता है आर्मी में। आर्मी में सही मायनों में मिल्खा की तरक्की की शुरुआत होती है और लगातार मिलती सफलता उसे बना देती है फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह। मिल्खा सिंह की जिंदगी पर बनी इस स्टोरी में हर वो चीज मौजूद है जो कभी आपको हंसाएगी, कभी गर्व का एहसास कराएगी तो कभी आपकी आखों से खुद ब खुद आंसू निकल आएंगे।

क्यों देखें ?

‘भाग मिल्खा भाग’ को देखने की एक नहीं कई वजह हैं। स्टोरी का प्रजेंटेशन, लोकेशन, कैमरा, म्यूजिक और सबसे बढ़कर फरहान अख्तर की एक्टिंग। इस फिल्म से फरहान ने दिखाया है कि वो अपने अकेले दम पर फिल्म को सुपरहिट करवा सकते हैं। ये एक ऐसी फिल्म है जिसे पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकता है। हालांकि फिल्म में जो इंटीमेसी के सीन डाले गए हैं , उनसे बचा जा सकता था।

डायरेक्टर – राकेश ओमप्रकाश मेहरा

कलाकार- फरहान अख्तर, सोनम, प्रकाश राज