फुटबॉल विश्व कप के लिए भारत की पहली किक

tatpar 14 june 13

नई दिल्ली। भारत में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार फीफा अंडर-17 विश्व कप-2017 की मेजबानी के दावे को समर्थन देने के लिए तैयार हो गई है। इस आयोजन के लिए जरूरी सभी गारंटियां देने के अलावा जरूरी ढांचागत सुविधाएं तैयार करने में भी सरकार मदद करेगी। इस टूर्नामेंट की मेजबानी हासिल करने के लिए भारत को आयरलैंड, उज्बेकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका से टक्कर मिलेगी। भारत इसके लिए सितंबर में दावेदारी पेश करेगा और फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा दिसंबर तक इसके आयोजन स्थल की घोषणा करेगी।

केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को तय किया कि सरकार ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की ओर से इस आयोजन के लिए की जा रही दावेदारी को अपना समर्थन देगी। फीफा की शर्तो के मुताबिक सुरक्षा, वीजा और विदेशी मुद्रा आदि के संबंध में सभी जरूरी गारंटी सरकार देने को तैयार हो गई है। फेडरेशन की दावेदारी को फीफा ने मंजूर कर लिया तो भारत में फुटबॉल के इतने बडे़ आयोजन का यह पहला मौका होगा। योजना के मुताबिक दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में इसके अधिकांश मुकाबले आयोजित करने की योजना है। इनके अलावा असम, गोवा और केरल में से किसी एक राज्य में भी कुछ मुकाबले हो सकते हैं। ‘दैनिक जागरण’ ने गुरुवार को छपी खबर में पहले ही बता दिया था कि कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है।

वर्ष 2017 के इस आयोजन पर होने वाला सारा खर्च फीफा और फेडरेशन उठाएंगे। इसके लिए वे टिकटों की बिक्री, स्पांसरशिप और विभिन्न व्यावसायिक समझौतों से रकम जुटाएंगे जबकि फुटबॉल स्टेडियम को दुरुस्त करने के लिए केंद्र सरकार 95 करोड़ रुपए की मदद देगी। साथ ही सरकार ने 25 करोड़ रुपये आयोजन के आपातकालीन कोष में भी जमा करने का फैसला किया है। ऐसे आयोजन से फुटबॉल में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी।

‘यह भारतीय फुटबॉल के लिए बेहद सकारात्मक कदम है। मुझे विश्वास है कि हम मजबूत दावेदारी पेश करने में कामयाब रहेंगे। भारत सरकार के समर्थन के बाद हम मेजबानी पाने के तगड़े दावेदार होंगे।’ -प्रफुल्ल पटेल, एआइएफएफ अध्यक्ष

‘ईमानदारी से कहूं तो आने वाले कुछ साल भारतीय टीम असली विश्व कप में नहीं खेल सकती। अगर हमारे युवाओं को जूनियर फुटबॉल का स्तर देखने को मिलता है तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता।’ -सुभाष भौमिक, अंतरराष्ट्रीय भारतीय फुटबॉलर

‘अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी से भारत में फुटबॉल के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा। इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता सरकार की सहायता से ही संभव हो सकती है।’ – सुब्रत दत्ता, उपाध्यक्ष, एआइएफएफ

‘मैं यह खबर सुन कर बहुत खुश हूं। अब हमें इसे वास्तविक रूप देना है। खिलाड़ियों को इसे एक चुनौती की तरह लेना होगा और आने वाले चार सालों में इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।’ -पीके बनर्जी, फुटबॉलर व ओलंपियन

‘इस कदम से युवा फुटबॉलरों पर खासा प्रभाव पड़ेगा और कोई शक नहीं कि अगर भारत को मेजबानी मिलती है तो इससे भारतीय फुटबॉल में क्रांति आएगी।’ – चुन्नी गोस्वामी, पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान