फौज ने लिया 18 जवानों का बदला 38 उग्रवादियों को ढेर कर

नई दिल्ली. म्‍यांमार की सीमा में घुस कर उग्रवादियों को करारा जवाब देने के लिए ऑपरेशन ‘ऑलआउट’ को अंजाम देने का फैसला 4 जून को ही ले लिया गया था। सेना के ऑपरेशन में 38 उग्रवादी मारे गए और 7 घायल हुए। सूत्रों के मुताबिक भारतीय फौज की टुकड़ी पर हमले के कुछ घंटे बाद ही केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई बैठक में यह निर्णय ले लिया गया था कि अगले ही दिन यानी 5 जून को ही उग्रवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। लेकिन तब सेना ने तैयारी के लिए कम समय होने को वजह बताते हुए ऐसे किसी ऑपरेशन को अंजाम देने में असमर्थता जताई थी। 4 जून की सुबह ही मणिपुर के चंदेल जिले में घात लगाकर किए गए हमले में फौज के 18 जवान शहीद हुए थे।
पहले 8 जून को ही होना था ऑपरेशन
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक सेना के ऐसे ऑपरेशन (हॉट परस्यूट) घटना के 72 घंटों के भीतर ही किए जाते हैं। यही वजह थी कि केंद्र सरकार सेना के ऑपरेशन को जल्द से जल्द अंजाम देना चाहती थी। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 4 जून को हुई बैठक में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग मौजूदगी में तय हुआ कि 8 जून को इसे अंजाम दिया जाए। इस बारे में तैयारी के लिए जनरल सुहाग को निर्देश दिए गए थे।
पीएम के बाहर होने की वजह से एक दिन टला था ऑपरेशन
जब सेना के ऑपरेशन की योजना को अंतिम रूप दिया गया तब पीएम बांग्लादेश में थे। इसलिए ऑपरेशन एक दिन टल गया और आखिरकार मंगलवार तड़के उसे अंजाम दिया गया। बांग्लादेश से लौटते ही प्रधानमंत्री को रविवार रात पूरी योजना के बारे में बताया गया और उनकी मंजूरी ली गई। इसी बीच, सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग मणिपुर पहुंचे और तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
हेलिकॉप्ट से जमीन पर उतरे जांबाज
सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात में स्पेशल फोर्स के जवानों को म्यांमार सीमा के भीतर उग्रवादियों के कैंपों के नजदीक हेलिकॉप्टर की मदद से जमीन पर उतारा गया। तड़के तीन बजे ऑपरेशन शुरू हो गया था।
हवाई हमले की भी बनी थी योजना
मीटिंग में सुखोई और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर एयर स्ट्राइक और साथ ही जमीन पर सेना की स्पेशल फोर्स के जरिए हमले के विकल्पों पर भी विचार किया गया था। लेकिन हवाई हमले के विकल्प को नामंजूर कर दिया गया क्योंकि इसमें उग्रवादियों के अलावा अन्य लोगों को भी नुकसान पहुंच सकता था।
उग्रवादी संगठन ने कहा, छवि चमका रही है फौज
पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठन एनएससीएन-के ने भारतीय सेना के दावे को खारिज किया है। उग्रवादी संगठन ने एक बयान जारी कर कहा कि न तो उनके कैंप पर हमला हुआ है और न ही उनका कोई कैडर ही मारा गया है। उग्रवादी संगठन के मुताबिक भारतीय सेना अपनी छवि को चमकाने के लिए यह दावा कर रही है। भारतीय सेना ने कहा था कि एक ऑपरेशन के तहत म्यांमार की सीमा में घुसकर 4 जून के हमले को अंजाम देने वाले कई उग्रवादियों को मार गिराया गया।
तीन दिनों के लिए पूर्वोत्तर जाएंगे जितेंद्र सिंह
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत जाकर हालात का जायजा लेने का निर्देश दिया है। जितेंद्र सिंह तीन दिनों की यात्रा पर जाएंगे।