फ्रांस में मैक्रों की जीत ने EU को बिखरने से बचाया, भारतीयों के लिए मौके बढ़ेंगे

पेरिस. फ्रांस में इमैनुएल मैक्रों ने राइट विंग की लीडर मरीन ली पेन को प्रेसिडेंट बनने से रोक दिया। इसी के साथ फ्रांस के यूरोपीय यूनियन (ईयू) से अलग होने की आशंका खत्म हो गई। गौरतलब है कि ली पेन जीतने पर ब्रेग्जिट की तर्ज पर फ्रेग्जिट चाहती थीं। 39 साल के मैक्रों 5 साल पहले राजनीति में आए। ओलांद सरकार में इकोनॉमिक अफेयर्स मिनिस्टर रहे। फिर करप्शन, अनइम्प्लाइमेंट और खराब इकोनॉमी का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। सालभर पहले ‘आं मार्शे’ यानी आगे बढ़ो मूवमेंट शुरू किया। अब प्रेसिडेंट का चुनाव जीत लिया। फ्रांस की राजनीति में ये अब तक की सबसे तेज छलांग है। 11 और 18 जून को संसदीय चुनाव होने हैं। ऐसे में, मैक्रों को अब ‘आं मार्शे’ आंदोलन को सियासी पार्टी में बदलना होगा। ज्यादा सीटें जीतनी होंगी, ताकि अपनी पसंद का पीएम अप्वाइंट कर सकें। अभी उनके पास एक भी सीट नहीं है। लिहाजा, कड़े फैसले लेने में उन्हें दिक्कतें आएंगी।
भारत को मिल सकता है फायदा…
– मैक्रों के प्रेसिडेंट बनने के बाद भारत-फ्रांस के रक्षा सौदों में तेजी आएगी। मैक्रों ईयू के समर्थक नेता हैं। यह बात भारत के पक्ष में होगी।
– अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में वीजा नियमों में बदलाव भारतीय कामगारों और छात्रों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके उलट फ्रांस भारत के स्किल्ड वर्करों और स्टूडेंट्स के लिए खुला है।
असर: ईयू में बना रहेगा फ्रांस, अलग होने वाले ब्रिटेन पर कड़ी शर्तें
फ्रांस: मंदी के शिकार इस देश में दिखेंगे आर्थिक सुधार
– फ्रांस में अनइम्प्लाइमेंट रेट 10% से ज्यादा है। मैक्रों ने टेक्नोलॉजी, एनर्जी, जॉब ट्रेनिंग जैसे अहम क्षेत्रों में 3.5 लाख करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट का वादा किया है।
– ऐसे में, संभव है कि मैक्रों आर्थिक सुधार के लिए कड़े फैसले लेंगे। साथ ही, वे बड़े सैन्य बजट के भी पक्षधर हैं।
ईयू: जर्मनी-फ्रांस मिलकर ब्रेग्जिट का असर दूर करेंगे
– ब्रिटेन के ईयू से अलग होने के बाद फ्रांस और जर्मनी ही इस संगठन के इंजन हैं।
– मैक्रों ईयू के हिमायती रहे हैं। जबकि ली पेन ईयू से अलग होने और फ्रांस की अपनी करंसी के पक्ष में थीं।
– फ्रांस के ईयू से बाहर होने पर इस ऑर्गनाइजेशन पर संकट था। लेकिन अब कोई मुश्किल नहीं है।
ब्रिजिट बनीं जीत की स्क्रिप्ट राइटर
– फ्रांस की फर्स्ट लेडी ब्रिजिट पति मैक्रों से करीब 25 साल बड़ी हैं। वे टीचर रही हैं। वो शिक्षा सुधार के लिए काम करेंगी।
– मैक्रों की जीत में उनकी बड़ी भूमिका है। वो उनकी डायरी मेंटेन करती थीं, स्पीच में सुधार करती थीं। मंच पर क्या बोलना है, ये तय करती थीं।
– 17 साल की उम्र में मैक्रों ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था। उन्होंने कहा था, “आप चाहे जो करें, मैं आपसे शादी करूंगा।”
वर्ल्ड मीडिया ने क्या कहा?
– फ्रांस के ला प्रोवेंस अखबार ने मैक्रों की जीत को सबसे बड़ा त्योहार बताया।
ले फिगारो
फ्रांस के वोटरों ने राइट विंग को पटखनी दे दी। इस तरह की वोटिंग को बढ़ते ग्लोबलाइजेशन के रिएक्शन के रूप में देखा जा सकता है।
टेलीग्राफ
मैक्रों के चुनाव में जीतने से थेरेसा मे को चुनाव में परेशानी का सामना कर पड़ सकता है। यूके के ईयू से अलग होने की बातचीत मैक्रों के सत्ता में आने के बाद बिल्कुल आसान नहीं।
डेली मेल
– 39 साल के मैंक्रों ने ब्रेग्जिट जैसे मुद्दों पर कड़ा रुख बरकरार रखने की बात कही है। नेपोलियन के बाद सबसे कम उम्र के लीडर मैक्रों ने ब्रेग्जिट को अपराध बताया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स
– फ्रांस ने एक ऐसे आदमी को देश की लीडरशिप सौंपी है, जिसने कभी चुनाव नहीं लड़ा। फ्रांस की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत ने मैक्रों को चुनाव जीतने में मदद की। अब इन युवा कंधों पर फ्रांस और यूरोप को बचाने की जिम्मेदारी आ गई है।

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