बच्चे पैरंट्स से कहेंगे इस बार मनाएं ग्रीन पटाखों की दीवाली- प्रकाश जावडे़कर

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को रोकने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में जो एयर क्वालिटी इंडेक्स सिस्टम लागू किया था अब उसका परिणाम दिखने लगा है। दिल्ली एनसीआर में सबसे अधिक प्रदूषण वाहनों, पॉवर प्लांट और हैवी वीइकल के चलने से निकलने वाले जहरीले धुएं से हो रहा था। अब इन सभी पर प्रतिबंध लग गया है। दिल्ली और एनसीआर की एयर क्वालिटी में भी दिनोंदिन सुधार हो रहा है। ये जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को पर्यावरण से संबंधित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीं। इसके अलावा उन्होंने मोदी सरकार की ओर से इस दिशा में किए गए तमाम कामों के बारे में विस्तार से बताया। 

दीवाली पर जलाएं ग्रीन पटाखें 

उन्होंने कहा कि दीवाली आ रही है इस मौके पर बच्चे पटाखें न बजाएं। अब ऐसा होना चाहिए कि बच्चे ही अपने अभिभावकों से कहें कि पटाखे जलाकर पलूशन न फैलाएं। पटाखों से होने वाले पलूशन को रोकने के लिए ग्रीन पटाखे लेकर आया गया है। पटाखे बनाने वाले ऐसे 200 उद्योगों के साथ मीटिंग की गई है। वो भी ग्रीन पटाखों का ही निर्माण करें। ऐसे 145 नियम बनाए गए हैं। अवेयरनेस किया जा रहा है।

सीपीसीबी की टीमें करेंगी निगरानी 

उन्होंने बताया कि इस बार सीपीसीबी की टीम के 46 विशेष दल बनाए गए हैं। ये निगरानी करेंगे कि दीवाली के दौरान किसी तरह से पलूशन न होने पाएं। यदि किसी राज्य में पलूशन होता पाया गया तो ये टीम एक्शन लेगी।

कंस्ट्रक्शन और वेस्ट मैटेरियल 

पहली बार कंस्ट्रक्शन और वेस्ट मैटेरियल के लिए भी काम किया गया। ऐसी तीन यूनिट चल रही हैं। कुछ सालों में ऐसे 4 नए प्लांट और आ रहे हैं। जिन मैटेरियलों को यहां वहां फेंक दिया जाता था, अब उनका इस्तेमाल हो रहा है। इनसे चीजें बनाई जा रही है। सड़कों पर जमा होने वाली धूल को रोकने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे धूल नहीं उड़ रही है और पलूशन कम हो रहा है।

पराली की समस्या

हरियाणा पंजाब में पराली जलाई जा रही थी। अब इसके लिए भी व्यवस्था की गई। केंद्र 1150 करोड़ रुपये अनुदान दिए। पराली जलानी नहीं पड़ेगी, टुकड़े टुकड़े होकर खाद बनेगी। बीते 20 सालों से पराली जलाई जा रही थी, इससे नंवबर माह में सबसे अधिक समस्या होती थी। इसके अलावा हर राज्य को हर निगम को कहा गया है कि वो आप खुद भी कुछ प्लान बनाएं और उस पर काम करें।

बीएस-4 और बीएस-6

उन्होंने बताया कि अब बीएस-4 और बीएस-6 टाइप के के तेलों की सप्लाई मिलने लगी है। इससे भी पार्टिकूलेट मैटर में गिरावट आई है। आने वाले कुछ सालों में दिल्ली में बीएस-6 ऑयल मिलने लगेगा। तेल की क्वालिटी बेहतर होने से पार्टिकुलेट मैटर में 80 फीसदी का सुधार हो गया है। इसका असर देशभर में देखने को मिल रहा है।

चूंकि दिल्ली देश की राजधानी है इस वजह से यहां पर प्रदूषण को लेकर खास ध्यान दिया जा रहा है। दिल्ली मे अप्रैल 2020 में बीएस 6 ऑयल मिलने लगेगा। जब वाहनों को इस क्वालिटी के ऑयल मिलेंगे तो उसका परिणाम ये होगा कि पलूशन में और भी कमी होगी। अभी तक यातायात से प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही थी, अब अच्छा क्वालिटी का तेल इस्तेमाल किए जाने से इसमें कमी होना तय है।

राजधानी के बाहर से वाहनों को निकालना  

दिल्ली में हैवी वाहनों को रोकने के लिए ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे का निर्माण किया गया। अब हैवी वीइकल इन्हीं दोनों एक्सप्रेस वे से होते हुए शहर के बाहर से निकल जाते हैं। एक्सप्रेस वे न होने से अभी तक रोजाना यहां पर 40 हजार से अधिक ट्रक जाते थे अब ये सभी बाहर से जा रहे हैं। इस वजह से पलूशन में कमी हुई है।

RFID कार्ड 

इसके अलावा शहर के तमाम हिस्सों में रोजाना आने वाले हैवी वीइकल के लिए आरएफआइडी कार्ड भी जारी किए गए हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने 120 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। अब इससे वाहन चालकों को सुविधा हुई है और बिना मतलब दिल्ली से होकर गुजरने वाले वाहनों ने दूसरा रास्ता पकड़ लिया है। अब नया मोटर वीइकल एक्ट आया है। इस एक्ट के आने के बाद अब पलूशन का सटिर्फिकेट लेने वालों की संख्या में भी इजाफा हो गया है।

अभी तक रोजाना लगभग 10 हजार वाहन चालक पलूशन का सर्टिफिकेट लेते थे, अब 40 से 50 हजार वाहन चालक इसे ले रहे हैं। नया एक्ट लगने के बाद अब तक 10 लाख से अधिक सर्टिफिकेट निकल चुके हैं। इससे वाहनों की मेंटीनेस में भी सुधार आया है। अभी तक सीएनजी के स्टेशन भी कम थे, सीएनजी लेने के लिए लंबी लाइन लगती थी। इसमें भी बढ़ोतरी की गई है। बीते 5 साल में 500 सीएनजी के नए स्टेशन बनाए गए है।

मेट्रो का नेटवर्क

दिल्ली और एनसीआर के इलाके में मेट्रो के नेटवर्क में सुधार हुआ है। इसे लगातार बढ़ाया भी जा रही है। अब तक दिल्ली, हरियाणा और यूपी में 377 किलोमीटर का नेटवर्क बन चुका है। इससे लगभग 4 लाख वाहन सड़क पर आना बंद हो गए है, इन्होंने भी पलूशन में कमी की है।

ई वीइकल 

सरकार ने पलूशन कम करने की दिशा में एक और काम किया है, अब ई वीइकल को बढ़ावा दिया जा रहा है। अभी तक जो बसें सीएनजी से चल रही थी अब उनको भी ई वीइकल में बदला जाना है, इससे सीएनजी से हो रहे पलूशन में भी कमी होगी।

पॉवर प्लांट बंद किए गए 

दिल्ली के बवाना में पॉवर प्लांट लगा हुआ था, इसके चलने से भी बड़े पैमाने पर पलूशन होता था, अब इसे भी बंद कर दिया गया है। इस प्लांट के चलने से 44 टन सल्फर निकलता था, वो बंद हो गया। इसके अलावा इस तरह की बड़ी इंडस्ट्री से निकलने वाले पलूशन को रोकने के लिए मानक तय कर दिए गए हैं वहां मशीनें लगा दी गई है। पल पल नजर रखी जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर के 200 किलोमीटर तक के एरिया में मानीटरिंग की जा रही है। जो इंडस्ट्री कोयले का इस्तेमाल कर रही थी, अब उनको सीएनजी में शिफ्ट कर दिया गया है। कोयले से चलने वाली 2372 इंडस्ट्री सीएनजी में शिफ्ट हो चुकी है। 438 पलूशन करने वाले उद्योगों पर मशीन लगा दी गई है।

ईंट भट्ठे

दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले 3000 ईंट भट्टे को नई तकनीक पर काम कराया जा रहा है। इनसे भी पलूशन में कमी हुई है।

कचरे से बनाई जा रही बिजली

अभी तक कचरे के पुख्ता निस्तारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। अब इनको निस्तारित करके बिजली पैदा की जा रही है। इसके लिए 2016 में नियम बनाए गए थे, अब इन पर काम किया जा रहा है। प्लांट से 12 मेगावट बिजली पैदा हो रही है। 3 प्लांट लगे हैं। गाजीपुर, ओखला और बवाना में। वहां पर कचरा से बिजली बनाई जा रही है।

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