बसपा की मदद से जेडीएस का वोट शेयर 2% तक बढ़ा तो वह भाजपा-कांग्रेस को रोक सकती है

नई दिल्ली.कर्नाटक विधानसभा चुनाव के ज्यादातर प्री-पोल सर्वे में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया गया। अगर ये सर्वे सही साबित होते हैं तो जनता दल सेक्युलर निर्णायक भूमिका में होगी। दो स्थितियों में भाजपा और कांग्रेस को जेडीएस से चुनौती मिल सकती है। पहली- पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीएस 16 ऐसी सीटों पर हारी थी, जहां मार्जिन 5000 से कम था। इस बार बसपा, एनसीपी, टीआरएस और ओवैसी की एआईएमआईएम की मदद से अगर वह इन सीटों को जीत में तब्दील कर लेती है तो उसकी सीटों का आंकड़ा बढ़ जाएगा। दूसरी- पिछले तीन चुनावों का ट्रेंड देखें तो किसी भी पार्टी के वोट शेयर में सिर्फ 1 से 4 फीसदी के उछाल पर ही सीटों का बड़ा फायदा होता है। ऐसे में जेडीएस के मामले में यह उछाल आया तो किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा।

पिछले चुनाव में 16 ऐसी सीटें जहां जेडीएस सिर्फ 5 हजार वोट के अंतर से हारी

हार का मार्जिन (वोट) हारी सीटें
5000 तक 16
5001 से 10000 12
10001 से 20,000 10

इस चुनाव में अगर जेडीएस पिछली बार 5000 वोटों से हारी सीटों पर जीती तो उसे 16 सीटों का फायदा हो सकता है।

– इनमें से भी 5 सीटें ऐसी हैं जो जेडीएस अपने गढ़ दक्षिण कर्नाटक (ओल्ड मैसूर रीजन‌‌‌) में हारी थी। यहां उसके जीत की उम्मीद और भी ज्यादा है। इस इलाके की कुल 60 सीटों में से पिछली बार जेडीएस को 25 सीटें मिली थीं।

– राज्य में वोक्कालिगा की कुल आबादी करीब 11% है। दक्षिण कर्नाटक इनका गढ़ है। जेडीएस के मुखिया और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा भी इसी समुदाय से हैं। इस वजह से पार्टी यहां काफी मजबूत है।

4 पार्टियों से जेडीएस का गठबंधन

– इस बार जेडीएस को पहली बार एकसाथ चार दलों का समर्थन मिला है। उसने बसपा, एनसीपी, टीआरएस और ओवैसी की एआईएमआईएम से गठबंधन किया है। पिछले चार चुनावों में इन सभी का वोट शेयर 1 से 2% तक रहा। जेडीएस को इसका फायदा मिल सकता है।

– सबसे ज्यादा फायदा बसपा के साथ गठबंधन से होगा। क्योंकि पिछले चुनाव में मायावती की पार्टी ने 224 सीटों में से 175 पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। हर सीट पर इन्हें औसतन 1% वोट मिला था।

1 से 4% वोट शेयर बढ़ने से सीटों पर एेसे हुआ असर

1) जेडीएस

साल सीटें वोट शेयर फायदा/नुकसान
2013 40 20.2% + 12
2008 28 19% – 30
2004 58 20.8% + 48
1999 10 10.4% +10*

*1999 में देवगौड़ा ने नई पार्टी जेडीएस बनाई थी। वह जेडीयू से अलग हुई थी। इस चुनाव में जेडीयू को 18 सीट मिली थीं और वोट शेयर 13.5% था।

2) कांग्रेस का वोट शेयर 2% बढ़ा तो उसे 100 से ज्यादा सीटें मिलीं

– 2013 में कांग्रेस का वोट शेयर 36.6% था। तब 122 सीटें मिलीं। 2004 चुनाव में वोट शेयर 34.8% था। तब सीटें घटकर 80 हो गई थीं।

3) येदियुरप्पा की वापसी से भाजपा को वोट शेयर बढ़ने की उम्मीद

– 2013 में भाजपा का वोट शेयर 19.9% रहा और 40 सीटें मिलीं। भाजपा से अलग हुए येदियुरप्पा की पार्टी को 9.8% वोट के साथ 6 सीटें मिली थीं। एक बार पार्टी छोड़ने के बाद येदियुरप्पा भाजपा में वापसी कर चुके हैं। लिहाजा, दोनों का वोट शेयर मिला दिया जाए तो यह 29.7% होता है। इससे पहले 2004 में भाजपा को 33.9% वोट शेयर के साथ 110 सीटें मिली थीं।

दलित वोटों पर सभी की नजर

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों ने देशभर में आंदोलन किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए जेडीएस ने बसपा से गठबंधन किया है। बसपा ने 51 एससी-एसटी सीटों में से 8 पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसे में इन सीटों पर दलित वोट लामबंद हो सकते हैं।

दिसंबर में केंद्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े ने कहा था कि हम संविधान बदलने आए हैं। तब उनके इस बयान को कोटा सिस्टम के खिलाफ माना गया।
राज्य में एसटी वर्ग से आने वाले भाजपा के बड़े नेता और पार्टी सांसद बी सिरामुलु और येदियुरप्पा के बीच मनमुटाव की भी बात कही जा रही है।

कांग्रेस को नुकसान हुआ तो फायदा किसे मिलेगा?

कांग्रेस के खिलाफ अगर एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर काम करता है तो इस बात पर नजर रहेगी कि उसे होने वाले नुकसान का फायदा भाजपा को मिलता है या जेडीएस को। इससे पहले, कांग्रेस का वोटर जेडीएस के पक्ष में जाता रहा है।

लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की वजह से इस समुदाय का एक वर्ग कांग्रेस से खफा बताया जाता है।

कुमारस्वामी को किंगमेकर नहीं किंग बनने की उम्मीद

– जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी को भरोसा है कि वे किंगमेकर नहीं किंग बनेंगे। हाल ही में आए सर्वे पर उन्होंने कहा था, “हम ऐसे सर्वे पर विश्वास नहीं करते…2004 में हुए प्री-पोल सर्वे में जेडीएस को सिर्फ 2 सीटें दी गई थीं। लेकिन हमने चुनाव में 58 सीटों पर जीत हासिल की और दो पार्टियों (जेडीएस-कांग्रेस) के गठबंधन की सरकार बनी। इस बार कोई खंडित जनादेश नहीं होगा। कर्नाटक में हमारी सरकार बनेगी। मैं किंगमेकर नहीं, बल्कि किंग बनूंगा।”

2013: 6 रीजन में जेडीएस की स्थिति

रीजन सीटें
मुंबई कर्नाटक 2
हैदराबाद कर्नाटक 4
तटीय कर्नाटक 0
मध्य कर्नाटक 7
दक्षिण कर्नाटक 25
बेंगलुरु 3
कुल 40