बिश्केक: SCO के घोषणापत्र में भारत के मुद्दों की गूंज, सबने एक सुर में माना आतंकवाद है बड़ी चुनौती

बिश्केक: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी साझा घोषणापत्र में भारत के मुद्दों की गूंज नज़र आई है. एससीओ ने माना कि सीमा-पार से आतंकवाद बड़ी चुनौती है. घोषणापत्र में आतंकवाद के हर स्वरूप की गई निंदा की गई है और इससे मुकाबले के लिए साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया गया है. SCO ने अपने सभी सदस्य देशों को आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के रेसोल्यूशन लागू करने के लिए कहा गया.

बता दें कि पीएम मोदी ने आज आतंकवाद पर जोरदार प्रहार करते हुए पूरे विश्व को आंतक के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया था. पीएम मोदी ने पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया लेकिन इशारों-इशारों में उसे लताड़ लगाई. उन्होंने कहा कि आतंकवाद रोज मासूमों की जान लेता है. सभी को इसके खिलाफ कदम उठाना चाहिए. आतंकवाद का साथ देने वाले देशों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, ”आतंकवाद को प्रोत्साहन, समर्थन और वित्त प्रदान करने वाले राष्ट्रों को जिम्मेदार ठहराना जरूरी है. एससीओ सदस्यों को आतंकवाद का सफाया करने के लिए पूरी शक्ति का इस्तेमाल करना चाहिए. भारत आतंकवाद से निपटने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन का आह्वान करता है.” पीएम मोदी ने श्रीलंका में हुए आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए आंतक को जड़ से खत्म करने और आतंकवादियों को शह देने वाल पाक सरीखे देशों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील की.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मौजूदगी में पीएम मोदी ने कहा, ”पिछले रविवार को श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान मैं सेंट एंटनी के चर्च गया था वहां मुझे आतंकवाद के उस घिनौने चेहरे का स्मरण हुआ जो हर कहीं भी प्रकट होकर मासूमों की जान लेता है. इस खतरे से निपटने के लिए सभी मानवतावादी ताकतों को अपने संकीर्ण दायरे से निकलकर एकजुट हो जाना चाहिए.”

आपको बता दें कि पीएम मोदी अपने बिश्केक दौरे पर पाकिस्तान को कड़ा कूटनीतिक संदेश दे रहे हैं. कल और आज दोनों दिन पीएम मोदी और इमरान खान आमने-सामने आए लेकिन दोनों नेताओं के बीच दुआ-सलाम भी नहीं हुआ. दोनों अलग-अलग दिखाई दिए.

यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान भी आतंकवाद के मुद्दे उठाए और कहा कि पाकिस्तान से तब तक बातचीत संभव नहीं है जबतक कि वह आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता है. इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सूरोनबे जीनबेकोव समेत कई नेता शामिल हुए.

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