बिहार: नीतीश-बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन का सीट शेयरिंग फॉर्मूला तैयार, आज शाम होगी ज्वाइंट पीसी

2019 चुनाव से पहले बिहार के गठबंधन राजनीति में जारी उथल पुथल के बीच अब खबर ये है कि सूबे में महागठबंधन का रास्ता साफ हो गया है. गठबंधन दलों के बीच सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर भी सहमति बन गई है.  इस महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी, सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (माले), जीतन राम मांझी की हम और  शरद यादव की लोजद जैसी पार्टियां शामिल हैं. लोकसभा चुनाव को लेकर आज शाम महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपेंद्र कुशवाहा भी शामिल हो सकते हैं. इस बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार आज शाम दिल्ली आ रहे हैं और वो इस दौरान बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर बात कर सकते हैं.

जानकारी के मुताबिक कांग्रेस कोषाध्यक्ष और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल भी उपेंद्र कुशवाहा से दो बार मिल चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की ओर से काराकाट, सीतामढ़ी, जहानाबाद, मोतिहारी, गोपालगंज, मुंगेर और चतरा की सीटों पर दावेदारी की गई है.

किसे कितनी सीटें?
इस बीच सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर है कि महागठबंधन के बीच सीटों का फॉर्मूला तय हो गया है. इस फॉर्मूले के मुताबिक आरजेडी को 18 से 20 सीटें, कांग्रेस को 8 से 12 सीटें, रालोसपा (उपेंद्र कुशवाहा) 4-5 सीटें, सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (माले)-1 सीट, हम (जीतन राम मांझी) को 1-2 सीटें, लोजद (शरद यादव) को भी 1-2 सीटें मिल सकती हैं.

आज शाम तक सारी चीजें साफ हो जाएंगी: तेजस्वी
महागठबंधन के बड़े सहयोगी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ”आज शाम तक सारी चीजें साफ हो जाएंगी, आपको भी पता चल जाएगा. हमने लोगों को पहले भी बुलाया था. अगर उपेंद्र कुशवाहा देश का हित चाहते हैं, हमने उन्हें भी न्योता दिया है. क्षेत्रीय पार्टियों को कुचलने की कोशिश हो रही है, यहां तक कि एलजेपी भी मोदी जी के गुट से खुश नहीं है और यह बात हमारे दावे को सही साबित करती है.”

कुशवाहा के बाद पासवान भी दिखा रहे बगावती तेवर!
कुशवाहा के जाने के बाद पासवान भी बगावती तेवर दिखा रहे हैं. मंगलवार को ट्विटर पर एनडीए के नाजुक दौर से गुजरने की बात कहने वाले चिराग पासवान एक कदम आगे बढ़ गए हैं. चिराग ने कहा है कि हमने बीजेपी के सामने कुछ मुद्दे रखे हैं जिनका जल्द समाधान होना चाहिए. 2014 की याद दिलाते हुए चिराग बोले कि ये कोई न समझे कि दबाव की राजनीति कर रहे हैं.

हालांकि जब चिराग से पूछा कि क्या इस बार भी मुद्दों नहीं सुलझे तो वो एनडीए से बाहर हो जाएंगे तो उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि मुद्दों का समाधान होगा. बीजेपी की विधानसभा चुनावों में हार पर चिराग ने कहा कि शिकायत या नाराज़गी नहीं, चिंता है. चिंता इस बात की है कि जिस तरह किसानों और युवाओं से वादे किए गए थे वो अगर ज़मीन पर नहीं उतरते हैं तो एक ज़िम्मेदार गठबंधन सहयोगी होने के नाते हमारा ये फ़र्ज़ है कि उन्हें बताएं क्योंकि विपक्ष हमेशा ये अफवाह उड़ाता है. लेकिन हम अगर इन असली मुद्दों को छोड़कर राम मन्दिर जैसे मुद्दों को उठाएंगे तो मामला भटक जाता है. ज़रूरी मुद्दों से ध्यान भटकता है.

चिराग ने ट्विटर पर क्या लिखा था?
चिराग पासवान ने ट्विटर पर लिखा, ”टीडीपी और आरएलएसपी के एनडीए से जाने के बाद गठबंधन नाज़ुक मोड़ से गुजर रहा है. ऐसे समय में बीजेपी गठबंधन में बचे हुए साथियों की चिंताओं को समय रहते सम्मान पूर्वक तरीके से दूर करे.”

चिराग ने एक दूसरा ट्वीट भी किया, इसमें लिखा, ”गठबंधन की सीटों को लेकर कई बार बीजेपी नेताओं से मुलाकात हुई लेकिन अभी तक ठोस बात आगे नहीं बढ़ पाई है. इस विषय पर समय रहते बात नहीं बनी तो इससे नुकसान भी हो सकता है.”

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