बुआ और बबुआ की बन गई जोड़ी, 38-38 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगी दोनों पार्टियां

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने होटल ताज में आज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। मायावती ने इस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही इसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नींद उड़ाने वाला बताया।  समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में माहौल बेहद भयावह है।

अखिलेश यादव और मायावती दोनों ने साथ आने के संकेत काफी पहले से देना शुरू कर दिया था। इस जोड़ी का फॉर्मूला उत्तर प्रदेश में लोकसभा के उप चुनाव में चल निकला। लोकसभा चुनाव में डंका बजाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने उप चुनाव में अपनी सभी सीट गंवा दी। सबसे बड़ा झटका को इनको गोरखपुर में लगा। सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ में भाजपा ने सीट गंवा दी। फूलपुर में आजादी के बाद से पहली बार भाजपा का खाता खुला था, लेकिन पार्टी इसको बरकरार नहीं रख सकी। कैराना लोकसभा के साथ बिजनौर में नूरपुर विधानसभा उप चुनाव भी भाजपा ने गंवा दिया।

मायावती ने कहा कि यह पीएम मोदी और अमित शाह दोनों गुरु चेले की नींद उड़ाने वाली अति महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस है। हमारी पार्टी ने अंबेडकर के देहांत के बाद उनके कारवां को गति प्रदान की है। उस कारवां को ऐतिहासिक सफलता भी दिलाई है। हम जातिवादी व्यवस्था के शिकार लोगों को सम्मान दिलाने का काम कर रहे हैं। हम पहले भी साथ आए थे और आज फिर चुनाव के लिए साथ आ रहे हैं। हमें उस दौरान भी चुनाव में सफलता मिली थी। इस बार भी हम सफल होंगे। हमारा तो अब एक ही मकसद भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टियों को सत्ता से बाहर रखने का है।

मायावती ने कहा भाजपा ने लोकसभा व विधानसभा में बेईमानी से सरकार बनाई थी। इसके बाद तो हमने उपचुनावों में भाजपा को हराकर इनको रोकने की शुरुआत कर दी थी। इस चुनाव में तो कांग्रेस के उम्मीदवार की तो जमानत जब्त हो गई थी। इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि सपा व बसपा साथ आ जाएं तो भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सकता है। दलितों, पिछड़ों, गरीबों, धार्मिक अल्पसंख्यक के हितों की उपेक्षा को देखते हुए गेस्ट हाउस कांड को किनारे करते हुए हमने गठबंधन का फैसला किया।जनहित में हमने गठबंधन को लखनऊ गेस्टहाउस कांड से ऊपर रखते हुए एक बार फिर दूषित राजनीति को जड़ से हटाने के लिए एक साथ आने का फैसला लिया है। आज उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के सवा सौ करोड़ आम जनता भाजपा के घोर चुनावी वादा खिलाफी के खिलाफ खड़े हैं। जनता भाजपा के तानाशाही रवैये से खासी नाराज हैं। हमारा गठबंधन नई राजनीतिक क्रांति की तरह है। बसपा-सपा के गठबंधन से आम जनता की उम्मीद जग गई है। यह गठबंधन सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ही नहीं है बल्कि यह गरीबों, महिनलाओं, किसानों, दलितों, शोषित और पिछड़ों को उनका हक दिलाने के लिए है। मायावती ने कहा कि देश की जनता भाजपा की गलत नीतियों और कार्य प्रणाली से खासी दुखी है। अब इस पार्टी को सत्ता में आने का अधिकार नहीं है। हम उसे दोबारा सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं।

मायावती ने कहा कि कांग्रेस के राज में घोषित इमरजेंसी थी और अब तो देश में अघोषित इमरजेंसी है। मोदी एंड कंपनी सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर प्रभावी विरोधियों के खिलाफ गड़े मुकदमे उखाड़ कर उनको परेशान कर रहे हैं। कांग्रेस के साथ सपा-बसपा गठबंधन का कोई खास फायदा नहीं होता। हमारा वोट तो ट्रासंफर हो जाता है लेकिन कांग्रेस का वोट ट्रांसफर नहीं होता या अंदरूनी रणनीति के तहत कहीं और करा दिया जाता है। इसमें हमारी जैसी ईमानदार पार्टी का वोट घट जाता है। 96 में हमारे लिए कड़वा अनुभव था। 1993 में सपा बसपा का वोट ईमानदारी से ट्रांसफर हुआ था इसलिये गठबंधन कोई हर्ज नहीं है।

अगर भाजपा ने पूर्व की तरह ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की और राम मंदिर जैसे मुद्दों से धार्मिक भावनाओं को नहीं भड़काया तो भाजपा एंड कंपनी को हम जरूर सत्ता में आने से रोकेंगे। उन्होंने कहा कि हम दोनों 38-38 सीट पर लड़ेंगे। दो सीट अमेठी और रायबरेली कांग्रेस के लिये छोड़ी हैं। 2 सीट और कुछ अन्य पार्टी के लिये छोड़ी है। उन्होंने कहा कि हाल में भाजपा की अखिलेश यादव के खिलाफ सीबीआई जांच की साजिश से हमारा गठबंधन और मजबूत हुआ है। भाजपा का शिवपाल एंड कंपनी पर पैसा बहाना भी काम नहीं आएगा। सभी वर्ग के लोग हमारे साथ आकर भाजपा को हराएंगे।

अखिलेश ने कहा- भाजपा के अहंकार को समाप्त करने को बसपा व सपा का मिलना जरूरी था

अखिलेश यादव ने कहा कि सबसे पहले मायावती जी को धन्यवाद। उन्होंने कहा कि हमारा गठबंधन का मन तो उसी दिन बन गया था जिस दिन भाजपा के नेताओं ने मायावतीजी पर अशोभनीय टिप्पणी की थी। इस अभद्र काम करने वालों पर भाजपा ने कोई भी कार्रवाई करने की जगह पर उनको मंत्री बनाकर ईमान दे दिया है। इसके बाद गठबंधन का मन उसी दिन पक्का हो गया था जब राज्यसभा में भीमराव अंबेडकर को छल से हराया गया था। मायावती जी का धन्यवाद कि उन्होंने बराबरी का मान दिया। आज से मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा। गठबंधन लम्बा चलेगा, स्थाई रहेगा और अगले विधानसभा चुनाव तक रहेगा।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने यूपी में ऐसा माहौल बना दिया है कि अस्पतालों में इलाज, थानों में रिपोर्ट लिखने से पहले जाति पूछी जा रही है। भाजपा के अहंकार को समाप्त करने को बसपा व सपा का मिलना जरुरी था। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में माहौल बेहद भयावह है। भाजपा ने यूपी में ऐसा माहौल बना दिया है कि अस्पतालों में इलाज, थानों में रिपोर्ट लिखने से पहले जाति पूछी जा रही है। भाजपा के अहंकार को समाप्त करने को बसपा व सपा का मिलना जरूरी था। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के हर कार्यकर्ता से कहा कि वह लोग बसपा अध्यक्ष मायावती का सम्मान करें। इतना ही नहीं अगर कोई भी इनके सम्मान में कुछ कहता है तो खुलकर विरोध करें। आप लोग यह समझें कि यह बहन मायावती का नहीं मेरा अपमान है। बसपा अध्यक्ष मायावती का पीएम पद पर नाम समर्थन के सवाल पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं। अगर फिर से उत्तर प्रदेश, देश को प्रधानमंत्री देता है तो हम इसका स्वागत करेंगे।यूपी ने हमेशा पीएम दिया है। हमे खुशी होगा कि यूपी से पीएम बने। आपको पता है कि  हमे किसे सपोर्ट करेंगे।

अखिलेश यादव ने कहा कि सपा का कार्यकर्ता आज से यह गांठ बांध ले कि मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा। हम तो समाजवादी हैं और समाजवादियों की विशेषता होती है कि हम दुख और सुख के साथी होते हैं। मैं पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा कि वह जिस तरह से आप मुझे सम्मान देते हैं उसी तरह से आप मायावती जी को भी सम्मान दें। अगर आप मायावती जी का अपमान करते हैं तो समझिएगा कि आप मेरा अपमान कर रहे हैं।  अखिलेश ने कहा कि भाजपा के अहंकार का विनाश करने के लिए सपा-बसपा का मिलना जरूरी था। उन्होंने कहा कि मैंने कहा था कि इस गठबंधन के लिए अगर दो कदम पीछे भी हटना पड़ा तो हम करेंगे। भाजपा हमारे बीच गलतफहमी पैदा कर सकती है। भाजपा अब तो दंगा-फसाद भी करा सकती है, लेकिन हमें संयम और धैर्य से काम लेना है। मैं मायावती जी के इस निर्णय का स्वागत करता हूं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि अब भाजपा का अन्त निश्चिचत है।

इससे पहले अखिलेश यादव ने बीते शुक्रवार को नई दिल्ली में मायावती के आवास पर आकर मुलाकात की थी। सपा और बसपा 38-38 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेंगे। इसके साथ दो सीट पर राष्ट्रीय लोकदल का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। गठबंधन के तहत राहुल गांधी के लिए अमेठी और सोनिया गांधी के लिए रायबरेली सीट छोड़ी जाएगी। अपना दल (एस) की सीट पर भी गठबंधन प्रत्याशी नहीं उतारेगा। ओमप्रकाश राजभर के सुहेलदेव पार्टी के लिए भी एक सीट छोड़ी जाएगी।

‘न काम बोल पाया और न साथ पसंद आया’, इसलिए यूपी में बदल गया चुनावी समीकरण

आगामी लोकसभा चुनावों के लिए यूपी में सियासी बिसात बिछ चुकी है। इस बिसात पर इस बार साइकिल, हाथी की सवारी करती दिखेगी। इससे पहले यूपी विधानसभा चुनाव में यूपी में साइकिल को हाथ का साथ मिला था, लेकिन लोगों को ये साथ पसंद नहीं आया। ऐसे में गणबंधन के बदले समीकरण में यूपी की सियासत दिलचस्प होने वाली है। साथ ही दिलचस्प होने वाले हैं इस बार के चुनावी नारे भी। हो सकता है सपा-बसपा गठबंधन में अपनी भूमिका तलाश रहे अखिलेश के विधानसभा चुनाव के साथी राहुल ये कहते नजर आएं कि ‘क्या हुआ तेरा वादा’।

मालूम हो कि 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनावों में सपा और कांग्रेस साथ-साथ थे। गठबंधन को मजबूत करने और दोनों पार्टियों को एकजुट दिखाने के लिए राहुल और अखिलेश की गलबहियां करते हुए फोटो और वीडियो आम हो गए थे। दोनों एक-दूसरे की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। इस गठबंधन से पहले विधानसभा चुनाव के लिए सपा का नारा था ‘काम बोलता है’, इस नारे के सहारे सपा अपनी सरकार में किए गए कामों की बदौलत दोबारा सत्ता पर काबिज होना चाहती थी।

सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद सपा का ‘काम बोलता है’ नारा पीछे छूट गया। नए समीकरण में नया नारा सामने आया ‘यूपी को ये साथ पसंद है’, ‘अखिलेश नहीं ये आंधी है, साथ में राहुल गांधी है’ और ‘अपने लड़के (यूपी के लड़के), बाहरी मोदी’। वहीं इस गठबंधन से पहले कांग्रेस का नारा था ’27 साल यूपी बेहाल’। इस नारे के जरिए कांग्रेस, उत्तर प्रदेश में शासन करने चुकी सपा समेत बसपा और भाजपा तीनों पार्टियों पर निशाना साध रही थी। हालांकि, गठबंधन के बाद कांग्रेस का भी ये नारा पीछे छूट गया।

यूपी विधानसभा चुनाव-2017 में ही बसपा ने सपा-कांग्रेस गठबंधन समेत भाजपा पर भी जमकर हमला किया था। बसपा ने नारा दिया था ‘बहनजी को आने दो’। लोकसभा चुनाव 2019 में हो सकता है यूपी वालों को फिर से वही पुराना नारा सुनाई दे ‘यूपी को ये साथ पसंद है’, लेकिन इस बार ये साथ सपा-बसपा का होगा। इस चुनाव में भाजपा ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ नारा दिया था ‘न गुंडाराज, न भ्रष्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार’।

जय-वीरू की जोड़ी टूटी तो हो गए हमलावर
आगामी लोकसभा चुनाव में यूपी के लड़कों जय-वीरू (अखिलेश-राहुल) की जोड़ी क्या टूटी, दोनों एक-दूसरे पर हमलावर भी हो गए हैं। शुक्रवार को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और बसपा अध्यक्ष मायावती ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर न केवल गठबंधन पर, बल्कि सीटों के बंटवारे पर भी मुहर लगा दी। इसके साथ ही मायावती ने यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश के साथी रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत भाजपा पर भी जमकर निशाना साधा। मायावती ने कहा कि कांग्रेस राज में घोषित इमरजेंसी थी और अब देश में अघोषित इमरजेंसी है।

कांग्रेस पर लगाया धोखा देने का आरोप

मायावती ने कहा कि कांग्रेस के साथ सपा-बसपा गठबंधन का कोई खास फायदा नहीं होता। हमारा वोट तो ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन कांग्रेस का वोट ट्रांसफर नहीं होता है या अंदरूनी रणनीति के तहत कहीं और करा दिया जाता है। इसमें हमारी जैसी ईमानदार पार्टी का वोट घट जाता है। 96 में हमारे लिए कड़वा अनुभव था। 1993 में सपा बसपा का वोट ईमानदारी से ट्रांसफर हुआ था इसलिये हमारे गठबंधन में कोई हर्ज नहीं है।

ये गठबंधन कितना लंबे चलेगा
गठबंधन की संयुक्त प्रेसवार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने मायावती का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा मायावती जी का धन्यवाद कि उन्होंने बराबरी का मान दिया। यूपी विधानसभा चुनाव तक बसपा पर हमला करने वाले अखिलेश के सुर अब बदल चुके हैं। लिहाजा, उन्होंने कहा कि आज से मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा। उन्होंने दावा किया कि ये गठबंधन लंबा चलेगा, स्थाई रहेगा और अगले विधानसभा चुनाव तक बना रहेगा। अखिलेश ने ऐसा ही कुछ दावा कांग्रेस से गठबंधन के वक्त भी किया था, लेकिन दोनों का साथ दो वर्ष भी नहीं चला। अब देखते हैं बसपा संग गठबंधन को लेकर अखिलेश का दावा कितना सही साबित होता है।

भाजपा ने कसा तंज- कोई भी साथ आए, हम ही जीतेंगे

आखिरकार 23 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर लोकसभा चुनाव में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए बसपा-सपा अपनी पुरानी दुश्मनी भूल गए। बसपा सुप्रीमो मायावती गेस्ट हाउस कांड के जख्म को भूलाकर समाजवादी पार्टी से हाथ मिला लिया, इस गठबंधन पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आ रही है। जहां भाजपा ने सपा-बसपा गठबंधन को निशाने पर लिया, वहीं कई अन्य दल इसका स्वागत भी कर रहे हैं।

कौन-कितने पर पड़ेगा

लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने मायावती और अखिलेश ने ऐलान किया कि लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा 38-38 सीटों पर लड़ेंगी। दोनों दलों ने चार सीटें छोड़ दी हैं, जिसमें दो सीटें सहयोगियों के खाते में जाएगी। वहीं, दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई हैं, अमेठी और रायबरेली है।

मायावती-अखिलेश के साथ पर किसने क्या कहा?

सपा-बसपा गठबंधन पर आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, ‘ भाजपा की हार की शुरुआत उत्तर प्रदेश और बिहार से हो चुकी है।’

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘कांग्रेस का शहजादा हो, बंगाल की दीदी हों, आंध्र प्रदेश के बाबू हों, यूपी की बहनजी हों…सब दिल में इच्छा रखते हैं और सबकी तलवारें चुनाव के बाद निकलेंगी।’

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, ‘आज पूरे देश में गठबंधन की आवश्यकता है। 2014 में भाजपा को केवल 31% वोट मिले थे और दावा किया था कि यह लोगों का जनादेश है, यह वोटों में विभाजन के कारण हुआ।’

वहीं, इसपर भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘दोनों दल सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे भी, यह उनकी पसंद है। हम आश्वस्त हैं। अगर सभी पार्टियां एक साथ आती हैं, तब भी हम जीतेंगे।’

तृणमूल प्रमुख व प. बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया सपा-बसपा महागठबंधन का स्वागत

तृणमूल प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शनिवार को हुए सपा-बसपा महागठबंधन का स्वागत किया है। सुश्री बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘मैं आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन का स्वागत करती हूं’।

गौरतलब है कि भाजपा पर हमेशा मुखर रहने वाली तृणमूल प्रमुख ममता भाजपा विरोधी विपक्षी खेमे को लामबंद करने में जुटी हुई हैं। इसके लिए बीते एक सालों में उन्होंने देश भर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया है और अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रमुखों से मिली हैं। इससे पहले सुश्री बनर्जी ने यह सुझाव दिया था कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा साथ आए तो भाजपा को उत्तर भारत में कड़ी टक्कर मिलेगी।

उन्होंने कहा था कि यूपी संसद के निचले सदन को 80 सांसद देता है जो की राष्ट्रीय राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इससे पहले अखिलेश यादव जब कोलकाता आए थे तो उन्होंने ममता के कालीघाट स्थित आवास पर जाकर मुलाकात की थी। अखिलेश ने तब कहा था कि उनकी दीदी के साथ हुई मुलाकात में भाजपा विरोधी गठबंधन के बाबत बातचीत हुई है।

23 साल पहले हुआ था ‘गेस्ट हाउस कांड’, मायावती गठबंधन करते वक्त भी नहीं भूलीं उस अपमान को

माना जाता है कि ऑल इन वेल इन लव एंड वॉर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में धुरविरोधी माने जाने वाले बहुजन समाज पार्टी (BSP) व समाजवादी पार्टी (SP) ने भी भाजपा (BJP) के खिलाफ लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections 2019) को एक जंग के रूप में लिया है। लखनऊ के विख्यात गेस्ट हाउस कांड (Guest House Kand) को भूलकर दोनों दल 23 वर्ष बाद एक बार फिर साथ हो गए हैं।

लखनऊ में गठबंधन का ऐलान करने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मायावती को वह गेस्ट हाउस कांड याद रहा। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रहित में हम उस कांड को भुलाकर साथ आए हैं।’

लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को मात देने के लिए धुरविरोधी पार्टियां एक साथ आ रही हैं। इसे साबित हो गया है कि अब राजनीति अवसरों का खेल है। यहां पर कोई स्थाई कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। कम से कम उत्तर प्रदेश में तो ऐसा ही होने जा रहा है। जो कल तक एक दूसरे की शक्ल देखना पसंद नहीं करते थे वो आज 23 साल की दुश्मनी भुलाकर एक मंच पर आने को तैयार हैं।

लखनऊ में एक ऐसी ऐतिहासिक तस्वीर आज देखने को मिली। इस तस्वीर में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस देखने को मिली। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए दोनों में गठबंधन करीब फाइनल हो चुका है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में आज सीट बंटवारे और गठबंधन को लेकर औपचारिक ऐलान हो सकता है। दोनों दलों में यह गठबंधन 23 वर्ष बाद हो रहा है। इससे पहले 1993 में भी दोनों दल भाजपा को शिकस्त देने की खातिर एक हो गए थे।

इससे पहले जब सपा-बसपा में 1993 में गठबंधन हुआ था तब प्रदेश में बाबरी विध्वंस के बाद राष्ट्रपति शासन चल रहा था। मंदिर-मस्जिद विवाद के कारण ध्रुवीकरण चरम पर था। यह सभी राजनीतिक दल समझ चुके थे। इसी के मद्देनजर प्रदेश की दो धुरविरोधी पार्टियां सपा और बसपा ने साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। गठबंधन ने चार दिसंबर 1993 को सत्ता की कमान संभाल ली। मायावती मुख्यमंत्री बनीं। दो जून, 1995 को बसपा ने सरकार से किनारा कर लिया और समर्थन वापसी की घोषणा कर दी। दोनों का गठबंधन टूट गया। बसपा के समर्थन वापसी से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई। तीन जून, 1995 को मायावती ने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता की कमान संभाली।

दो जून 1995 को प्रदेश की राजनीति में जो हुआ वह शायद ही कभी हुआ हो। उस दिन एक उन्मादी भीड़ सबक सिखाने के नाम पर बसपा सुप्रीमो की आबरू पर हमला करने पर आमादा थी। उस दिन को लेकर कई बातें होती रहती हैं। यह आज भी एक विषय है कि दो जून 1995 को लखनऊ के राज्य अतिथि गृह में हुआ क्या था।

मायावती कर चुकीं हैं अखिलेश का बचाव
अखिलेश और मायावती दोनों ने साथ आने के संकेत काफी पहले से देने शुरू कर दिए थे। इस जोडी का फॉर्मूला गोरखपुर व फूलपुर में हुए उपचुनाव में निकला। जहां लोकसभा चुनाव में परचम लहराने वाली भाजपा को अपने गढ़ में शिकस्त झेलनी पड़ी। अखिलेश यादव खुद मायावती को इसकी बधाई देने उनके घर गए थे। इसमें कोई दो राय नहीं मायावती के जेहन में आज भी गेस्टहाउस कांड जिंदा है, तभी तो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इस कांड को लेकर अखिलेश यादव का बचाव किया था और कहा था कि उस वक्त अखिलेश राजनीति में आए भी नहीं थे।

क्या हुआ था उस दिन
मायावती के समर्थन वापसी के बाद जब मुलायम सरकार पर संकट के बादल आए तो सरकार को बचाने के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गया। ऐसे में अंत में जब बात नहीं बनी तो सपा के नाराज कार्यकर्ता व विधायक लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्टहाउस पहुंच गए, जहां मायावती ठहरी हुईं थीं। उस दिन गेस्ट हाउस के कमरे में बंद बसपा सुप्रीमो के साथ कुछ गुंडों ने बदसलूकी की। बसपा के मुताबिक सपा के लोगों ने तब मायावती को धक्का दिया और मुकदमा ये लिखाया गया कि वो लोग उन्हें जान से मारना चाहते थे। इसी कांड को गेस्टहाउस कांड कहा जाता है।

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