“बुर्का” कटाक्ष पर कांग्रेस हुई लाल, सिन्हा ने भी कहा, कम बोलें मोदी

tatpar 15 july 2013

नई दिल्ली। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की बुर्का संबंधी टिप्पणी पर कांग्रेस ने उन पर जुबानी हमलों की झडी लगा दी है। दिग्विजय सिंह, मनीष तिवारी जैसे नेताओं के बाद अब पूर्व खेल मंत्री और कांग्रेस नेता अजय माकन ने भी मोदी को निशाने पर लिया है। माकन बकायदा आंकडों के साथ सामने आए और मेदी पर सवालों की झडी लगा दी। माकन ने मोदी के दावों को खोखला बताते हुए पूछा कि मोदी बताएं कि खेल में गुजरात कितना आगे है। मोदी ने खेल को बढ़ावा देने के लिए क्या किया है। मेडल जीतने वालों में कितने गुजराती हैं और गुजरात के कितने खिलाडी ओलंपिक में गए हैं। माकन ने कहा कि हमने शिक्षा पर एऩडीए के मुकाबले ज्यादा खर्च किया। शिक्षा पर खर्च के मामले में गुजरात 14वें नंबर पर है। गुजरात के कॉलेजों में शिक्षकों की कमी क्यों है। माकन ने कहा कि यूपीए सरकार में आईआईटी, आईआईएम की संख्या बढी।
कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने कहा है, “”धर्मनिरपेक्षता का बुर्का उनकी (भाजपा की) सांप्रदायिकता से अच्छा है। सांप्रदायिकता देश को बांटती है।”” इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी को सार्वजनिक तौर पर सलाह दी है कि वह कांग्रेस पर तीखे हमलों से बचें। गैौरतलब है कि मोदी ने रविवार को पुणे की बीजे मेडिकल कॉलेज में भाषण के दौरान कांग्रेस पर जमकर हमला बोला था और कहा था कि सत्तारूढ पार्टी के समक्ष जब भी संकट आता है तो वह “धर्मनिरपेक्षता का बुर्का” ओढकर बंककर में छुप जाती है। भाजपा नेता ने आरोप लगाए कि कांग्रेस से जब मूल्य वृद्धि, भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियों के बारे में पूछा जाता है तो वह धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे का प्रयोग करती है। सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने टि्वटर के जरिए इसका जवाब देते हुए कहा कि सेकुलरिज्म का बुर्का बसको साथ लेकर चलता है, लेकिन सांप्रदायिकता का पहिया कुत्ते के बच्चो को भी कुचल देता है। अगर कोई पप्पी आपकी कार के नीचे आ जाता है, तो आपके पास दो विकल्प हैं।

पहला यह कि उसे दुलार करें और दूसरा उसे दोबारा कुचल दें। जो आदमी दूसरा काम करता हो, उसे आप क्या कहेंगे। कांग्रेस महासचिव ने भी मोदी से सेकुलरिज्म पर सवाल दागते हुए कहा, सेकुलरिज्म की भाषा मोदीजी की क्या है, वह हम सुनना चाहेंगे, जो अब तक आडवाणी जी और पार्टी की तो है एक धर्म, एक देश और एक कल्चर। कांग्रेस पार्टी मानती है, सर्वधर्म समभाव। उन्होंने आगे कहा, मोदी जी के बारे में ज्यादा ना पूछा करें, क्योंकि मैं उन्हें तरजीह नहीं देना चाहता। केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता राजीव शुक्ल ने भी कहा कि अगर मोदी संविधान में दिए गए शब्दों का मजाक बनाते हैं, तो इससे साफ होता है कि उनकी संविधान में कोई आस्था नहीं है। जिस पार्टी ने देश के लिए इतने सालों से कुर्बानी दी, वह क्या पैसा कमाने के लिए था। भारत की जनता को देखना चाहिए कि इस तरह का व्यक्ति भारत के सर्वोच्चा पद पर जाने के लायक है कि नहीं। कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल ने कहा कि मोदी को जरूरत से ज्यादा पब्लिलिटी देने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के भाषण पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता हूं। वह महज एक पार्टी के प्रचारक हैं। उनके झूठ पर कोई रिएक्शन नहीं देना चाहता हूं। हम रिएक्शन नहीं बल्कि एक्शन वाली पार्टी हैं।

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष माणिकराव ठाकरे में भी मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि बाहर से महाराष्ट्र में आनेवाले लोग हमें शिक्षा का पाठ ना पढाएं। मोदी सबसे पहले गुजरात की साक्षरता दर महाराष्ट्र् के साक्षरता दर जितना बनाने की कोशिश करें। मोदी के आने के नामभर से ही उनके सहयोगी दल भाग जाते हैं। भाजपा से जुडे रह चुके सुधींद्र कुलकर्णी ने भी मोदी को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि बुर्का शब्द का इस्तेमाल किसी भी तरह से उचित नहीं है। इसी तरह भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने भी मोदी को सार्वजनिक तौर पर सलाह दी है। इकोनॉमिक टाइम्स में लिखे अपने लेख में कहा है कि मोदी कम बोलें, नहीं तो लोगों का ध्यान 11 साल पहले गुजरात में जो कुछ हुआ उसकी तरफ चला जाएगा। अपने लेख में यशवंत सिन्हा ने लिखा है, मोदी विरोधियों की रणनीति साफ है। वह जितना बोलेंगे उतना ही विवाद खडा करेंगे, तो चुनाव से पहले ही राजनीति बहस में बदल जाएगी और सबका ध्यान सरकार के भ्रष्टाचार और कुशासन से हटकर 11 साल पहले गुजरात में जो कुछ हुआ, उस पर चला जाएगा।

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