भगत सिंह की फांसी से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और गांधी में बढ़ा था विवाद

जयपुर. देश में भ्रष्टाचार की नींव भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने रखी थी। आज वह विकराल रूप ले चुका है। उनके कारण ही नेताजी सुभाष चंद्र बॉस की सच्चाई और इतिहास आजतक सामने नहीं आया है, लेकिन अब उनकी सभी फाइलें सामने आएंगी। ये कहना है नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री राज्यश्री चौधरी का, जो सोमवार को जयपुर में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के सिलसिले में आई थीं।
इस मौके पर उन्होंने मीडिया और आमजन को बोस की सच्चाई सामने लाने के लिए चल रहे कैंपेन में साथ देन के लिए जागरुक किया। राज्यश्री ने कहा, गांधी-नेहरु परिवार अपनी गलती छुपाने और असली हीरो के इतिहास को सामने आ जाने के डर से इन मुद्दों पर बात तक नहीं होने देते हैं। उन्होंने नेहरु-गांधी फैमिली अ‌विश्वसनीय बताते हुए कहा, नेताजी की 64 फाइलें पश्चिम बंगाल सरकार और पीएमओ में हैं।
फाइलों को सामने लाना है, जिससे नया इतिहास लिखा जा सकेगा। उन्होंने नेताजी को देश पहला राष्ट्रपति बताते हुए कहा, इसका जिक्र इतिहास में भी किया गया है लेकिन सरकारों ने सच्चाई सामने नहीं आने दिया। 1943 को जापान, जर्मनी जैसे 10 देशों के प्रमुखों ने नेताजी को राष्ट्रपति पद दिया था।
विमान दुर्घटना थी झूठी
उन्होंने ताईवान विमान दुर्घटना पर कहा, जस्टिस मुखर्जी कमिशन ने साबित कर दिया है कि ताइवान विमान दुर्घटना झूठी थी। इससे साफ होता है, कि नेताजी की मृत्यु की यह कहानी झूठी है। हमे डेड बॉडी दे दी जाए और सर्टिफिकेट दिखाएं तो हम मान लेंगे, कि उनकी मौत उस समय हुई थी। सरकार की ओर से वे 16 बार मर चुके हैं, लेकिन सच्चाई तो रहस्य है।
इतिहासकार भी कांग्रेस सरकार के पेड लोग थे, जिन्होंने गलत इतिहास लिखा है। नेताजी सभी क्रांतिवीरों के साथ थे। यही कारण था कि शहीद भगत सिंह की फांसी के बाद महात्मा गांधी से उनका विवाद हो गया था। नेताजी का मानना था, कि बापू फांसी रोक लेंगे। भगत सिंह के शहीद होने से नेताजी को धक्का लगा और उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। चौधरी ने कहा, बोस होते हो भारत-पाकिस्तान का बंटवारा नहीं होता। नेहरू ने सत्ता के लिए देश के विकास को नजरअंदाज कर दिया।