भगवान राम की शक्ति गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी में प्रवेश कर चुकी हैः अशोक सिंघल

Tatpar 24 Aug 2013

आम चुनावों से ठीक पहले विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा उछाल राजनीति को ध्रुवीकरण की दिशा में मोड़ दिया है. जिससे यूपी सरकार और विहिप के बीच टकराव की स्थिति बन रही है. इस बीच हमसे बातचीत में सिंघल ने नरेंद्र मोदी में भगवान राम की शक्ति और हिंदू समाज के लिए बहुत कुछ करने वाला नेता बताया. उनके मुताबिक रामलला कह गए थे कि बच्चा मंदिर का निर्माण कानून से ही होगा और सबलोग इसमें सहयोग करेंगे.

सवाल- विहिप की 84 कोस की इस यात्रा का क्या मकसद है?

जवाब- 84 कोस यात्रा का निर्णय फरवरी महीने में कुंभ के अवसर पर हो गया था. उसमें चर्चा हुई थी कि राम जन्म भूमि का निर्माण संसद से ही होगा, ये अब कोर्ट का विषय नहीं रहा. 60 वर्ष के पश्चात ये निर्णय आ गया जहां रामलला प्रतिष्ठित है वहीं राम मंदिर है. मुस्लिम वक्फ बोर्ड जो बात कह रहा था कि उसको मस्जिद घोषित किया जाए और मस्जिद एक प्लेग्राउंड पर बनाई गई है, वो बात सिद्ध नहीं हो सकी. रामलला के मुकदमा जीतने के बाद हमको बार-बार कहा जा रहा था कि आप प्रतीक्षा करिए और जैसे ही निर्णय होगा आपके हक में फैसला हो जाएगा. फैसला तो हक में हो गया. अब सरकार वचनबद्ध है. सरकार ने जो 70 एकड़ भूमि अधिग्रहित की है, रामजन्मभूमि मंदिर के लिए समर्पित करनी चाहिए. तीसरी बात कही गई थी कि अयोध्या की जो सांस्कृतिक सीमा है इसके दायरे में किसी प्रकार का इस्लामिक प्रतीक नहीं बनने दिया जाएगा. यही बात हमने 30 मई में राष्ट्रपति को भी कही. 480 वर्षों के बाद हमने मुक्ति पाई है, इस संकट से. इतने युद्धध, बलिदान हुए. हम आगे ऐसा नहीं चाहते. इसलिए यह यात्रा हमारे संतों ने तय किया. हमने यही बात मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री से भी कही. दो घंटे की वार्ता में हमें कहीं नहीं लगा कि वे यह नहीं चाहते हैं कि यात्रा नहीं होगी, ऐसी बात कहीं नहीं कही. बल्कि हमें ऐसा लगा कि अपने अधिकारियों से बात करके हमें वे इसका समर्थन करेंगे, सहयोग करेंगे.

सवाल- राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में इस बात को बढ़ाने की जरुरत क्यों?

जवाब- देखिए, संसद ही सबसे बड़ी संस्था है. संसद को ही अब निर्णय करना पड़ेगा. ये विषय संसद का है कोर्ट का नहीं. कोर्ट से निर्णय तो आ गया, जहां रामलाल बैठे हैं, वही राम जन्मभूमि है. हिंदू समाज को कब तक मूर्ख बनाएंगे. आप अपनी पार्टी के हिंदुओं को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन आप सारे भारत के हिंदुओं को हमेशा के लिए मूर्ख बनाएं ये अब संभव नहीं है. इसके लिए जो बात कही जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट तय करेगा, अब ये विषय पार्लियामेंट को तय करने का है. सरकार वचनबद्ध है.

सवाल- कहा जा रहा है कि 2014 के चुनाव और बीजेपी में मोदी को आगे बढ़ाने के लिए वीएचपी आक्रामक हो रहा है?

जवाब- ये संतों का पूरा कार्यक्रम है. इस आंदोलन से बहुत बड़ी जनशक्ति रामभक्तों के रुप में तैयार कर रहे हैं. ये रामभक्त ऐसी सरकार भी चाहते हैं जो राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण भी कर सके. संत राजनैतिक नहीं हैं और न कभी होंगे. लेकिन रामभक्त चाहेंगे कि देश में ऐसी सरकार बने जो संसद में इस कानून को बनाए. क्योंकि मुझ्े बड़ा विश्वास है कि रामलला भी कह गए थे कि बच्चा इसका कानून बनेगा. उन्होंने कहा था इसका कानून बनेगा और सब लोग इसका समर्थन करेंगे. मेरा विश्वास है कि राम जन्मभूमि का विषय ये कोर्ट से निर्णय नहीं होने वाला, संसद से होगा और सब मिलकर सहयोग करेंगे. लगभग 450 सांसदों से विहिप कार्यकर्ताओं का मिलना हुआ है. किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया.

सवाल- समय पर सवाल उठा रहा है और कहा जा रहा है कि बीजेपी को फायदा दिलाने के लिए विहिप अभी मुद्दा उठा रही है?

जवाब- अगर रामभक्त मानेंगे कि बीजेपी हमें फायदा दिलाएगा तो कौन रोक सकता है रामभक्तों को. क्या आप समझ्ते हैं कि रामभक्त समाजवादी लोगों को या कांग्रेस को जिसने देश को कंगाल कर दिया, डुबो दिया, आर्थिक संकट पैदा कर दिया देश में. ऐसे लुटेरों के हाथ में देखेंगे क्या. आज ऐसी परिस्थितियां है कि लोगों के सामने दूसरा चारा नहीं है तो क्या करेंगे रामभक्त. रामभक्त चाहेंगे कि देश में गौ की रक्षा करने वाले आने चाहिए, गंगा की रक्षा करने वाले, देश में समान आचार संहिता लागू करने वाले आने चाहिए. इस देश को बर्बादी पर ले जाने वाले सरकार से छुटकारा चाहता है समाज.

सवाल- वीएचपी पहले वाजपेयी सरकार के खिलाफ मुखर रही है, क्या मोदी से उम्मीद है बेहतर की?

जवाब- रामभक्त जो चाहेंगे, वही होगा. ऐसा मेरा मानना है. वो दिन चले गए और बदल गए.

सवाल- कहा जा रहा है कि जनवरी के आखिर में बीजेपी-वीएचपी-संघ की बैठक में यह खाका बना था कि विकास-हिंदुत्व को मिलाकर चुनावी रणनीति बनेगी?

जवाब- भाजपा के लोगों को विचार करने का विषय है. उनका मेनीफेस्टो आया नहीं है. मेरा मानना है कि मेनीफेस्टो में वो तमाम बाते आने वाली हैं. ये सारे विषय उस घोषणापत्र में होंगे.

सवाल- यात्रा को अनुमित नहीं मिली तो आप क्या करेंगे?

जवाब- यात्रा को अनुमति देने को तैयार नहीं है ये बात तो सामने आ गई. मगर जब यात्राएं निकलनी है जिन दिन और जिस पड़ाव से निकलनी है वहां पर जनता इकट्ठी होगी और पदयात्रा करेगी. वहां पर संत पहुंच जाएंगे और यात्रा चलेगी. उस यात्रा को रोकने का वो कैसा प्रयास करते हैं वही हमें देखना है क्योंकि हजारों की संख्या में जनता यात्रा में भाग लेगी तो उसे कैसे रोक सकेंगे ये लोग. अयोध्या में रोकने की बात थी, अयोध्या तो सीमित है, लेकिन यात्रा तो पांच जिलों में क्षेत्र समाया हुआ है, कहां-कहां रोकेंगे ये हमें. हर दिन 200 संत आएंगे, संतों को रोकने से ये पद यात्रा समाप्त नहीं होने वाली.

सवाल- तीन हजार से ज्यादा मंदिर 80 प्रतिशत जर्जर, वीएचपी क्यों नहीं?

जवाब- मंदिर रजवाड़े चलाया करते थे. 1947 में रजवाड़े खत्म. उसके बाद केंद्र सरकार की जिम्मेवारी थी. लेकिन हिंदू समाज की अवहेलना की है, मंदिरों की उपेक्षा की है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है.

सवाल- आशंका जताई जा रही है कि इस यात्रा से सांप्रदायिक सौहाद्र्र बिगड़ सकता है.

जवाब- कोई सांप्रदायिक सौहाद्र्र नहीं बिगड़ेगा. बाहरी तत्व अपना उल्लू सीधा नहीं कर सकेंगे. इस देश के भीतर मुसलमान शांति से रहना चाहता है वो संघर्ष नहीं करना चाहता, बाहरी तत्व उसके बीच में बैठकर संघर्ष कराना चाहते हैं.

सवाल- कहा जा रहा बीजेपी-संघ की रणनीति पर ही विहिप मंदिर का मुद्दा उठा यात्रा कर रही है?

जवाब- ये विहिप और संतों के बीच की बात है. इस विषय पर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ. संघ के विषय में तो मैं एक बात कह सकता हूं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शुरु से ही आंदोलन के समर्थन में रहा है और रहेगा क्योंकि उसकी प्रतिबद्धता है इस बात के लिए. बीजेपी में बहुत बड़ी संख्या में संघ के लोग हैं. जो उनमें गए हैं और ऐसे करोड़ों लोग जो आज भी समर्थन करेंगे.

सवाल- बीजेपी से विहिप के रिश्ते बेहद खट्टे रहे हैं, आप खुद भी मुखर रहे थे.

वो बीजेपी 10 साल पहले लाचार थी. अटल जी ने कहा था कि हमको बहुमत दो, उनको बहुमत नहीं मिला इसलिए मंदिर नहीं बन सका. ऐसा उनका कहना था. लेकिन मेरा मानना है कि एक काम वो करते तो बहुत अच्छा होता कि इसको सदन में ले आते और अगर सरकार चली जाती तो देखते चली जाती. ये काम उन्होंने नहीं किया. फिर भी मेरा मानना है कि इस देश में फिर से रामभक्तों का बहुमत संसद में आए, इसके लिए हमारा प्रयास है.

सवाल- तो क्या आपको उम्मीद है कि मोदी के नेतृत्व में अगर सरकार बनती है तो वो संसद में प्रस्ताव लाएंगे?

जवाब- क्यों नहीं करेंगे. वो सिर्फ इतना ही नहीं करेंगे, बल्कि बहुत कुछ करेंगे. मेरा मानना है कि जब भगवान राम की शक्ति के रुप में जब भगवान ने उनमें प्रवेश की है तो क्या-क्या कराएंगे तो आप देखते चलिए. हमारे यहां पर आज जिस प्रकार का शासन चाहिए, दुनिया में हमारा मस्तक ऊंचा रहे, ऐसा शासन चाहिए. वो शासन हमारे देश में कभी नहीं बन सका. दुनिया की महाशक्तियों में हम खड़े हों. बने हम, ऐसा कभी सोचा ही नहीं गया. इस सोच के साथ ही खड़े हों, तभी परिवर्तन होगा.

सवाल- आपने कहा कि मुलायम-अखिलेश से बातचीत में आपको नहीं लगा कि अनुमति नहीं देंगे, तो अब आप किसको जिम्मेदार मानते हैं?

जवाब- देखिए इसके लिए मैं मानता हूं कि आजम खान का जो वक्तव्य आया है कि मुलायम सिंह को अशोक सिंघल, संतों से नहीं मिलना चाहिए था. मुझे लगता है कि ये बात उनको सार्वजनिक नहीं बोलनी चाहिए थी. वो उनसे अकेले में बोलते तो समझ् में आता. लेकिन इससे बात कहीं खुल गई है अब मुलायम पलट गए हैं तो उसके पीछे आजम खान हैं और आजम और इस्लामिक डिक्टेट से ही मुलायम सिंह चल रहे हैं, हिंदू समाज की भावना को कुचलना चाहते हैं, दमन करना चाहते हैं. ये उनकी आज की नीति आजम खान के कारण से बन रही है, ऐसा मेरा मानना है.