भट्ठियों में झोंकी जाएगी देशभर से इकट्ठा की गई मैगी, ईंधन की तरह होगा इस्तेमाल

नई दिल्ली. देश के अलग-अलग राज्यों से जमा किए गए हजारों टन मैगी के पैकेट कर्नाटक पहुंचाए जा रहे हैं। इन मैगी के पैकेट्स को कुलबुर्गी जिले के वाडी शहर में स्थित सीमेंट कारखाने में नष्ट करने के लिए सैंकड़ों ट्रकों में भरकर लाया जा रहा है। प्रशासन की अनुमति मिलते ही इन पैकेटों को सीमेंट कारखाने की भट्ठियों में जलाकर नष्ट कर दिया जाएगा। खास बात है कि मैगी के मौजूदा स्टॉक को नष्ट करने का यह तरीका नेस्ले इंडिया ने ही चुना है।

भट्टी में झोंकी जाएगी 27 हजार टन मैगी

कुलबुर्गी से 40 किलोमीटर दूर बने इस सीमेंट कारखाने में लगभग 27 हजार 420 टन मैगी नूडल्स नष्ट किए जाने हैं। स्थानीय पुलिस के मुताबिक कई राज्य सरकारें अपने यहां से जब्त किए गए मैगी नूडल्स के पैकटों को अल्टरनेटिव फ्यूल एंड रॉ मैटेरियल प्लांट में नष्ट कराने के लिए सीमेंटी कंपनी को भेज रही हैं। पहले चरण में 30 करोड़ रुपए के मैगी नूडल्स के पैकेटों को नष्ट करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।

सीमेंट कारखाने में पहुंचे 150 ट्रक मैगी नूडल्स

कर्नाटक के वाडी में मंगलवार शाम से ही मैगी नूडल्स से लदे ट्रक एसीसी सीमेंट कंपनी में पहुंच रहे हैं। एसीसी के सूत्रों ने बताया कि मुम्बई और अहमदाबाद से 150 ट्रकों में भरे मैगी नूडल्स के पैकेट कारखाने में पहुंच चुके हैं। कारखाने के अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इन पैकेटों को नष्ट किया जाएगा।

ईंधन की तरह इस्तेमाल होगा जली हुई मैगी का चूरा

नेस्ले इंडिया ने 5 अन्य सीमेंट कंपनियों से भी बातचीत की है, जहां मैगी के पैकेट नष्ट किए जाएंगे। जली हुई मैगी के चूरे को इन कारखानों को ही दे दिया जाएगा। उसके बाद इसका इस्तेमाल ईंधन की तरह किया जाएगा। बाजार से जमा किए गए मैगी के लगभग 40 करोड़ पैकेटों को नष्ट करने के लिए इन पांच सीमेंट कारखानों को कम से कम 40 दिन का समय लगेगा। देश भर के लगभग 35 लाख आउटलेट से एकत्र करके 38 गोदामों में रखे गए मैगी के पैकटों को ढोने में कम से कम 10 हजार वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।