भागवत पर दारोमदार!

Tatpar 4 Sep 2013

संघ सुप्रीमो मोहन भागवत का नेतृत्व कसौटी पर है। नरेंद्र मोदी को आगे करने का फैसला उनकी कोर टीम का था। मोहन भागवत, भैय्याजी जोशी, सुरेश सोनी, दतात्रेय हांसबोले और  कृष्ण गोपाल की टीम ने जो तय किया था उसे भाजपा ने गोवा में अपनाया। गोवा बैठक से 8-9 सितंबर की संभावी दिल्ली बैठक तक नरेंद्र मोदी ने जो सफर तय किया है उसमें कमी ले दे कर अब यह है कि वे अभी भी पार्टी की तरफ से बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं। भाजपा के संसदीय बोर्ड में दो सदस्यों को छोड़कर सभी मोदी की घोषणा के पक्ष में हैं। मगर जो पक्ष में नहीं हैं उनकी अनदेखी भी नहीं हो सकती। तभी कुछ दिन पहले मोहन भागवत ने भाजपा के संगठन मंत्री रामलाल और नितिन गडकरी को नागपुर बुलाया। संघ पदाधिकारियों के साथ दोनों नेताओं की बात हुई। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सुरेश सोनी के जरिए कहा हुआ था कि वे गडकरी को आगे करके रास्ता निकलवाएं। तभी जानकारों के अनुसार मोहन भागवत ने नितिन गडकरी को आडवाणी और सुषमा स्वराज से बात करने के लिए अधिकृत किया।
बात कुछ आगे बढ़ी। पर गडकरी ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि सुषमा स्वराज को कैसे संतुष्ट किया जाए? उनसे वह क्या वायदा हो जिससे वे मानें?  तभी शायद मोहन भागवत ने रविवार को भैय्याजी जोशी को लालकृष्ण आडवाणी से मिलने के लिए कहा!
पर बात नहीं बनी। सो अब जिम्मेवारी सीधे मोहन भागवत पर आ गई लगती है। मोहन भागवत ही अब लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज से शायद बात करके कहें कि नरेंद्र मोदी की घोषणा में देरी से नुकसान होगा। भाजपा के कुछ नेताओं का मानना है कि यदि मोहन भागवत ने सुषमा स्वराज से सीधे बात कर उन्हें भरोसे में लिया या उन्हें भरोसा दिया तो वे मान जाएंगी। संघ सुप्रीमो सुषमा स्वराज को क्या भरोसा देंगे, इसके फार्मूले कई हो सकते हैं। मोटे तौर पर भाजपा और संघ में यह माना जा रहा है कि मोहन भागवत की खुद की प्रतिष्ठा क्योंकि दांव पर है इसलिए वे 8-9 सिंतबर से पहले ही आडवाणी और सुषमा स्वराज से बात करेंगे और सहमति बनवाएंगे।
सवाल है भैय्याजी जोशी भी तो मोहन भागवत के कहने पर आडवाणी और सुषमा से मिले थे जब उनकी बात नहीं मानी गई तो मोहन भागवत के कहने से क्या सुषमा स्वराज मान जाएंगी?
जानकारों के अनुसार न माने जाने के आसार कम हैं। मोटे तौर पर आरएसएस सुप्रीमो मोहन भागवत और नंबर दो भैय्याजी जोशी दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर है। कुछ जानकारों के अनुसार 8-9 सितंबर की बैठक में भाजपा के मुख्यमंत्री बुलाए जा रहे हैं और ये सब एक साथ नरेंद्र मोदी की तुरंत घोषणा की जरूरत बताएंगे। आरएसएस ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जिम्मा दिया है कि वे अब नरेंद्र मोदी के पक्ष में राय बनवाएं, फैसला कराएं।
पर असल में मोहन भागवत पर यह दारोमदार है कि वे अपने कराए फैसले को अंतिम परिणती पर पहुंचवाएं?  देखना है कि ऐसा 8 सितंबर से पहले होगा या बैठक के बाद?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *