भागवत-श्री श्री की कल होगी मुलाकात, आ सकता है नया फॉर्मूला

नागपुर. श्री श्री रविशंकर राम मंदिर विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने की पहल कर रहे हैं। इस सिलसिले में वे उत्तरप्रदेश के अयोध्या में हैं। शुक्रवार शाम को वे नागपुर पहुंचेंगे। शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मुलाकात करेंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि दोनों के बीच राम मंदिर विवाद पर चर्चा होगी। वे अयोध्या में अगल-अलग पक्षकारों से हुई बातचीत का ब्योरा भागवत को देंगे। इस दौरान इस विवाद पर नया फॉर्मूला सामने आ सकता है।

श्री श्री क्यों पहुंच रहे नागपुर?

श्री श्री रविशंकर तीन दिवसीय प्रोग्राम ‘अंतरंग वार्ता’ के सिलसिले में शुक्रवार को यहां पहुंच रहे हैं। इसमें मोहन भागवत भी शामिल होंगे।

भागवत को देंगे पक्षकारों से बातचीत का ब्योरा

– सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच बातचीत बंद कमरे में होगी। इस दौरान रविशंकर अयोध्या में विभिन्न पक्षकारों से हुई बातचीत का ब्योरा डॉ. भागवत को देंगे। इस दौरान नया फार्मूला भी सामने आ सकता है।

– निर्मोही अखाड़ा परिषद और विश्व हिंदू परिषद रविशंकर की मध्यस्थता का विरोध कर रहा है। ऐसे में इन्हें कैसे मनाया जाए, इस पर भी बातचीत हो सकती है।

– इसके अलावा गोरक्षा कानून का असर, घास पर जीएसटी के कारण गोवंश पालन में परेशानी समेत कई मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

श्री श्री ने कहा- आमतौर पर मुस्लिम राम मंदिर के विरोधी नहीं
– श्री श्री रविशंकर गुरुवार को लखनऊ से अयोध्या पहुंचे। यहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा- मैं जानता हूं कि आमतौर पर मुसलमान राम मंदिर के विरोध में नहीं हैं। हो सकता है कि कुछ लोग इससे सहमत ना हों।
– “कई बार समाधान असंभव नजर आता है, लेकिन हमारे लोग, युवा और दोनों समुदायों के नेता इसे संभव बना सकते हैं।
– श्री श्री ने पहले लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस मीटिंग के बाद योगी ने कहा कि उनसे मेरी शिष्टाचार मुलाकात हुई है। राम मंदिर विवाद पर कोई चर्चा नहीं है। चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है इसलिए अब इस पर चर्चा करने में बहुत देरी हो गई है।
– अयोध्या में श्री श्री ने सबसे पहले नृत्य गोपाल दास से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने रामलला के दर्शन किए। बाद में वे मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी और हाजी महबूब से मिलने गए।

अयोध्या विवाद में कौन-कौन से पक्ष हैं ?
– निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड।

तीनों पक्षों का दावा क्या है ?
– निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में विराजमान रामलला की पूजा और व्यवस्था शुरू से निर्मोही अखाड़ा करता रहा है। लिहाजा, वह स्थान उसे सौंप दिया जाए।
– रामलला विराजमान: रामलला विराजमान का दावा है कि वे रामलला के करीबी मित्र हैं। चूंकि भगवान राम अभी बाल रूप में हैं, इसलिए उनकी सेवा करने के लिए वह स्थान रामलला विराजमान पक्ष को दिया जाए, जहां रामलला विराजमान हैं।

– सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड: सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का दावा है कि वहां बाबरी मस्जिद थी। मुस्लिम वहां नमाज पढ़ते रहे हैं। इसलिए वह स्थान मस्जिद होने के नाते उनको सौंप दिया जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
– 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।
– बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।

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