‘भाग मिल्खा भाग’ ने पूरे किए दो साल, फिल्म में हुई थीं ऐसी-ऐसी मिस्टेक्स

मुंबई. मिल्खा सिंह की लाइफ पर बनी राकेश ओमप्रकाश मेहरा की बॉयोपिक ‘भाग मिल्खा भाग’ ने रिलीज के दो साल पूरे कर लिए हैं। 11 जुलाई 2013 को इसे रिलीज किया गया था। रिलीज के बाद इस फिल्म ने डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और एक्टिंग की श्रेणी में दिए जाने वाले तकरीबन सभी बड़े अवॉर्ड जीते थे। हालांकि, कई ऐसी बातें इसके बारे में जाननी बाकी हैं, जो हिंदी फिल्मों की मेकिंग के दौरान बरती जाने वाली गंभीरता पर सवालिया निशान उठाती हैं। इस रिपोर्ट में हम ‘भाग मिल्खा भाग’ की ऐसी ही कुछ कमियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो फिल्म की बड़ी मिस्टेक थीं….

मिस्टेक:1

‘भाग मिल्खा भाग’ को बनाने में डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने काफी मेहनत की थी। हालांकि, वे सेट की बारीकियों को देखना भूल गए। फिल्म में कई जगह मोबाइल टावर नजर आ रहे हैं, जबकि 50 और 60 के दशक में मोबाइल ही नहीं था।

मिस्टेक: 2

फिल्म मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित थी और यह 1950-60 के वक्त को दिखलाती है। फिल्म के एक सीन में जब मिल्खा (फरहान अख्तर) पार्टिशन के कई सालों बाद पाकिस्तान में अपना गांव को देखने जाते हैं, तब वे रॉयल एनफील्ड क्लासिक चलाते नजर आते हैं। खास बात यह है कि यह मॉडल फिल्म की रिलीज के एक साल पहले यानी साल 2012 में आया था।

मिस्टेक: 3

फिल्म के एक सीन में फरहान अख्तर एक्ट्रेस सोनम कपूर को इम्प्रेस करते दिखाई देते हैं। यहां पर वह ‘नन्हा मुन्ना राही हूं’ गीत गाते हैं, जो कि 1962 में आई फिल्म ‘सन ऑफ इंडिया’ का है। फिल्म में फरहान को 50 के दशक में दिखाया है। इस लिहाज से देखें तो जिस दौर में फरहान इस गीत को गा रहे होते हैं, तब यह गाना वजूद में ही नहीं था।

मिस्टेक: 4

फिल्म के क्लाइमेक्स में एक ऐसी मिस्टेक देखने को मिलती है, जो तथ्यात्मक तौर पर गलत है। क्लाइमेक्स में जिस स्टेडियम में मिल्खा सिंह को रेस जीतते हुए दिखाया गया है, उसका नाम लाहौर स्टेडियम है, जबकि फिल्म में इसे बार-बार कद्दाफी स्टेडियम एनाउंस किया गया है। असल में इस स्टेडियम का नाम 1974 तक लाहौर स्टेडियम ही था और इसके बाद इसे कद्दाफी स्टेडियम नाम दिया गया।

मिस्टेक: 5

‘भाग मिल्खा भाग’ के एक सीन में रेलवे स्टेशन का जो सिग्नल दिखाया गया है वह इलेक्ट्रॉनिक है, लेकिन फिल्म के प्लॉट के हिसाब से देखें तो तब तक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल का आविष्कार ही नहीं हुआ था। गौरतलब है कि फिल्म टाइम पीरियड 50 और 60 का दशक बताया गया है।