भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो को वर्ष 2014 का गांधी शांति पुरस्कार दिया जाएगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो को वर्ष 2014 का गांधी शांति पुरस्कार दिया जाएगा। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक में यह फैसला किया गया। अंतरिक्ष अनुसंधान का उपयोग आम आदमी और राष्ट्र की सेवा के लिये करने को संकल्पित इसरो दुनिया की छह सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियों में शामिल है।

1962 में डॉक्टर विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में बनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति ने देश के विकास में अंतरिक्ष अनुसंधान की भूमिका का जो मंत्र दिया था, वही 1969 में इसरो की स्थापना का आधार बना। आज इसरो के पास दुनिया में संचार उपग्रहों और दूर संवेदी उपग्रहों का एक सबसे बड़ा जाल है। अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान के विकास को ध्रुवीय और भूस्थैतिक अवस्थाओं तक ले जाकर उपग्रह प्रक्षेपण की दुनिया में भारत की धाक जमाने में इसरो का योगदान सर्वोपरि है। इसरो ने न सिर्फ सबसे भारी रॉकेट का परीक्षण सफलता से किया है, बल्कि दुनिया को सबसे कम खर्च में उपग्रह छोड़ने का रास्ता भी दिखाया है। पहले चंद्रयान और फिर मंगलयान मिशन इसरो की उपलब्धियों में चार चांद लगाते हैं। 1995 में स्थापित गांधी शांति पुरस्कार के तहत एक करोड़ रुपये और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है।