भारतीय रेलवे के इतिहास में MP गजब है, सबसे अजब है, देखिए कैसे

भोपाल। भारतीय रेलवे को तकनीकी और सुविधाओं से लैस करने की तमाम कोशिशों में देश के ह्दय प्रदेश मप्र का एक बड़ा योगदान रहा है। बात चाहे, सबसे तेज ट्रेन की हो, या आईएसओ सर्टिफाइड ट्रेन या स्टेशन की, उपलब्धियां हमेशा मप्र के खाते में रहीं।
20 नवंबर का दिन रेल के कोच में बदलाव के लिए हमेशा याद किया जाएगा। ट्रेनों में लगे मौजूदा कोच अब जल्द ही बीते जमाने की बात हो जाएगी। इनकी जगह लेंगे मॉडल रैक। यह पहला मौका नहीं है जब देश-दुनिया के समक्ष मप्र ने बड़ी कामयाबी हासिल की हो, इससे पहले भी मप्र ने कई उपलब्धियां अपने नाम की है।
बात चाहे देश के पहले आईएसओ सर्टिफिकेट प्राप्त स्टेशन की हो या फिर ग्रीन टॉयलेट ट्रेन के कान्सेप्ट की। देश में चलने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनें मप्र की राजधानी से होकर गुजरती है, जो कि किसी उपलब्धी से कम नहीं हैं। हालांकि इन उपलब्धियों में डबल डेकर ट्रेन की असफलता ने प्रदेश को एक बड़ा झटका भी दिया है। कमियों के बावजूद इस ट्रेन का संचालन आज भी किया जा रही है।