भारत आए हिंदुओं ने सुनाई दास्तां

अम्बाला. वे पाकिस्तान के नागरिक हैं लेकिन बरसों से भारत में आबाद जिंदगी बसर कर रहे हैं। हिंदुस्तान इन्हें नागरिकता नहीं देता और पाक इन्हें स्वीकारने का तैयार नहीं। यहां रहने के लिए उन्हें हर साल वीजा की अवधि बढ़वाने के लिए पाकिस्तान एम्बेसी के चक्कर काटने पड़ते हैं। 17 साल से भारत और पाकिस्तान के कानून के बीच फंसे इन लोगों में अधिकतर बूढ़े हो चले हैं।

 

भारत में पैदा हुए और जवान हुए युवाओं का तो अपने नए पासपोर्ट बनवाने के लिए तो पाकिस्तान तक जाना पड़ता है। अम्बाला जिले के एक दर्जन गांवों में बसे इन हिंदू पाकिस्तानियों को भारत की नागरिकता नहीं मिली है। 17 साल से ये लोग हिंदुस्तान में रहने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

 

भारत की नागरिकता के लिए सात साल यहां रहने की शर्त को वे पूरा भी कर चुके हैं। 51 लोगों के इस जत्थे में 30 महिलाएं भी हैं। इनका कहना है कि उन्हें हिंदुस्तान में चाहे जिंदा दफन कर दिया जाए लेकिन वे लौटकर पाकिस्तान नहीं जाएंगी।  मंगलवार को डीसी ऑफिस में वीजा बढ़वाने के लिए आवेदन करने आए इन लोगों ने अपनी भावनाएं बताईं।

भारत सरकार नहीं कर रही विचार: शिव सेना अमृतसर के प्रमुख सुरेंद्र कुमार बिल्ला इन लोगों की पैरवी कर रहे हैं। वे कहते हैं कि 17 साल में इन लोगों के बच्चे जवान हो गए हैं। कुछ तो ऐसे हैं जो अपनी मां के वीजा के साथ भारत आए थे, अब जवान होने के बाद उन्हें अपना अलग वीजा बनवाने के लिए पाकिस्तान लौटना पड़ा। वीजा न होने के कारण इनका कोई भी बच्चा भारत के स्कूलों में पढ़ नहीं पाया।

सुरेंद्र ने बताया कि जिला प्रशासन को नागरिकता देने के लिए कार्रवाई पूरी कर फाइल दाखिल करा रखी है लेकिन छह महीने से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। भारतीय कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सात साल यहां रह लेता है तो उसे नागरिकता मिल जाती है। बिल्ला कहते हैं कि वीजा समाप्त होने के बाद शिनाख्ती कार्ड बनवाने के लिए इन लोगों को हर पांच साल बाद लौटकर पाकिस्तान जाना पड़ता है। भारत सरकार को चाहिए कि इन्हें नागरिकता देकर यहीं आबाद करे।

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