भूकंप पीडि़त नेपाल में अनेक देशों के राहत और बचाव कार्य जारी

नेपाल में भीषण भूकंप के लगभग 72 घंटे बाद भोजन, पानी, बिजली और दवाओं की कमी के कारण संकट गहरा गया है। नेपाल के कई हिस्सों में भूकंप के झटके फिर आने के बाद कल हजारों लोगों को खुले में ही रहना पड़ा। मृतकों की संख्या चार हजार के करीब पहुंच गई है, सात हजार लोग घायल हुए हैं और कई लापता हैं। राजधानी काठमांडू और भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित कुछ  पहाड़ी इलाकों में  मलबे के नीचे सैकड़ों लोग अब भी दबे हुए हैं।मृतकों की संख्या पांच हजार का आंकड़ा पार करने की आशंका है।

सात हजार से भी ज्यादा लोगों का इलाज पूरे देश के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। भूकंप के बाद के झटके अब भी महसूस किए जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य तीव्र गति से चल रहा है। इस कार्य में भारत सहित चीन, इजराइल, कतर, पाकिस्तान, बांगलादेश, श्रीलंका आदि सहयोग कर रहे हैं। राहत कार्यों में मौसम की खराबी कुछ स्थलों में अड़चन डाल रही है। भारतीय राहत दल और अन्य टीम द्वारा अब तक 200 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। दवा, पानी, खाद्यान्न व हरसंभव सहायता की व्यवस्था हेलीकॉप्टर की मदद से भारत द्वारा चलाई जा रही है। दूसरी ओर पशुपति के आर्य घाट में आठ सौ से ज्यादा लोगों का दाहसंस्कार किया जा चुका है। 

भारत ने राष्ट्रीय आपदा राहत बल के सात सौ से अधिक विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है। ऑपरेशन मैत्री के तहत बड़े पैमाने पर राहत कार्यों में शामिल भारत ने गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालय तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों का दल समन्वय के लिए नेपाल भेजा है। यह दल नेपाल में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के कार्य की भी निगरानी कर रहा है।  राष्ट्रीय आपदा राहत बल ने नेपाल में अपनी कार्रवाई में अब तक 11 लोगों को बचाया है और 62 शव निकाले हैं।

नेपाल से अब तक करीब पांच हजार चार सौ भारतीयों को वापस लाया गया है। नई दिल्ली में विदेश सचिव एस. जयशंकर ने आशा व्यक्त की कि अन्य सोलह सौ भारतीयों को जल्दी स्वदेश वापस लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा राहत बल के और दल नेपाल भेजे जाएंगे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। इसका नंबर है- 0 1 1 – 1 0 7 8.

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