मध्यप्रदेश : सिंधिया खेमे के कटारे ही बने नेता प्रतिपक्ष

Tatpar 9 Jan 2014

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में अटेर से जीतकर आए विधायक सत्यदेव कटारे को नेता प्रतिपक्ष बना दिया है। सिंधिया खेमे के कटारे ने चार बार विधानसभा चुनाव जीते हैं।

कटारे का रास्ता तब खुला जब सिंधिया के करीबी समर्थक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा और अजय सिंह के बीच विवाद खुलकर मीडिया में आ गया।

महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने तो यहां तक कह दिया था कि अजय सिंह की नेता प्रतिपक्ष के रूप में नियुक्ति अनुकंपा नियुक्ति थी। बाद में कालूखेड़ा ने इस बयान को वापस ले लिया। आखिरकार यह पद सिंधिया खेमे को ही मिला।

चुरहट से जीतकर आए अजयसिंह पहले भी नेता प्रतिपक्ष थे। नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने शिवराज के खिलाफ चार्जशीट बनाई, मॉक विधानसभाएं लगाईं और शिवराज की पत्नी साधना सिंह पर निशाने साधे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत मानकर मुकदमा भी लगाया।

दिग्विजय समर्थक अजय सिंह के बारे में राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि वह खुद नेता प्रतिपक्ष बनने के इच्छुक नहीं थे, बल्कि उनकी नजर प्रदेशाध्यक्ष के पद पर है।

सिंधिया समर्थक कटारे को विधानसभा में उत्कृष्ट विधायक का पुरस्कार भी मिला है। पार्टी ने उन्हें पांच बार विधानसभा टिकट दिया, जिसमें से कटारे ने चार चुनाव जीते हैं।

इस बार जिस तरह की भाजपा लहर थी, उसमें भी कटारे ने 11,000 से ज्यादा मार्जिन से जीत दर्ज की है। वरिष्ठता के हिसाब से भी वह 1985 में विधायक बन गए थे।

पार्टी ने 1990 में टिकट नहीं दिया था। 1993 में टिकट दिया तो वह जीत गए। पार्टी ने 1998 में टिकट नहीं दिया, लेकिन 2013 में अच्छे मार्जिन से जीत दर्ज की।

केंद्रीय पर्यवेक्षक आस्कर फर्नांडिस की उपस्थिति में हुई रायशुमारी के दौरान यह साफ हो गया था कि नेता प्रतिपक्ष का पद दिग्विजय कैंप को मिलना संभव नहीं है।

सिंधिया को कमलनाथ, सुरेश पचौरी और अरुण यादव समर्थक विधायकों का समर्थन भी मिला हुआ था। सिंधिया और कमलनाथ के समर्थक विधायकों की संख्या ही करीब 28 थी। पचौरी और अरुण यादव के समर्थक 7 विधायक मिलाकर सिंधिया कैंप को 35 विधायकों का समर्थन मिल रहा था।

अब अजय सिंह के प्रदेशाध्यक्ष बनने की संभावनाएं भी घट गई हैं। फिलहाल इस्तीफा दे चुके कांतिलाल भूरिया को ही बनाए रखा जा सकता है।

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