मध्‍यप्रदेश में बीजेपी को मिलेगा बहुमत, कांग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्‍ड में छपा सर्वे

कांग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्‍ड में मध्‍यप्रदेश के आगामी चुनावों को लेकर एक सर्वे छापा गया है. इस सर्वेक्षण में राज्‍य में आगामी चुनावों में बीजेपी को बहुमत मिलने की बात कही गई है. साथ ही यह भी कहा गया है कि मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस और बीएसपी के बीच गठबंधन होना बेहद जरूरी है, क्‍योंकि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो प्रदेश की सत्‍ता से बीजेपी को हटाना बहुत मुश्किल होगा. इसके साथ ही गठबंधन के बाद भी बीजेपी को मध्‍यप्रदेश में बहुमत मिलने की बात कही गई है. तमिलनाडु के स्‍पीक मीडिया नेटवर्क द्वारा 27 जुलाई को यह सर्वे जारी किया गया.

नेशनल हेराल्‍ड की वेबसाइट पर प्रकाशित चुनाव पूर्व हुए इस सर्वे में कहा गया है कि राज्‍य में बीजेपी के सामने अगर कांग्रेस और बीएसपी बिना गठबंधन के चुनाव लड़ती हैं तो बीजेपी को 147, कांग्रेस को 73, जबकि बीएसपी को 9 और अन्‍य को 1 सीट मिलने का अनुमान है. वहीं, अगर मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस और बीएसपी का गठबंधन हुआ तो बीजेपी को 126, कांग्रेस और बीएसपी गठबंधन को 103, जबकि अन्‍य को एक सीट मिलने का अनुमान है.

तमिलनाडु के स्‍पीक मीडिया नेटवर्क द्वारा 27 जुलाई को जारी इस सर्वे में अनुमान जताया गया है कि अगर कांग्रेस-बीसपी का गठबंधन नहीं हुआ तो राज्‍य में सरकार में कोई बदलाव नहीं होगा, यानि बीजेपी को हरा पाना मुश्किल होगा. वहीं, कांग्रेस नेता अभय दुबे ने कहा, नेशनल हेराल्‍ड में प्रकाशित सर्वे हमारा नहीं है. मध्‍यप्रदेश में इस बार कांग्रेस की बारी है.

उल्‍लेखनीय है कि कांग्रेस का मुखपत्र कहे जाने वाले नेशनल हेराल्ड अखबार में 29 जुलाई को एक लेख प्रकाशित हुआ है. इस लेख में राफेल डील का उल्लेख किया गया है. लेख का शीर्षक है ‘राफेड डील मोदीस् बोफोर्स’. यानी ‘राफेल- मोदी का बोफोर्स’ (घोटाला). इस लेख के प्रकाशित होते ही बीजेपी ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है. बीजेपी का कहना है कि राफेल के बहाने ही सही कांग्रेस ने यह तो माना कि बोफोर्स सौदे में घोटाला हुआ है.

सोशल मीडिया पर इस लेख को लेकर कांग्रेस पर कटाक्ष किए गए. हालांकि बोफोर्स का जिक्र केवल लेख के शीर्षक में ही दिया गया है. कांग्रेस राफेल वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की कीमत को लेकर मोदी सरकार को घेर रही है. कांग्रेस का कहना है कि राफेल डील में बीजेपी ने बड़ा घोटाला किया है और इसमें कुछ बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाने के लिए कांग्रेस सरकार में हुई डील में तय कीमतों से ज्यादा कीमत पर राफेल सौदा किया गया है.

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