महाराष्ट्र BJP-शिवसेना दोस्ती क्यों हुई खंडित

प्रवीण मैशेरी, रायपुर। शिवसेना-BJP की दोस्ती सबसे पुरानी थी जब तक हिंदूहृदय सम्राट बाला साहेब जीवित थे कोंग्रेस विरोधी रही शिवसेना जैसे ही अपरिपक्व उध्दव ठाकरे के हाथों चली गई संजय राऊत जैसे दूसरी पंक्ति के नेता के हाथों की कठपुतली बन गए मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं को हँसिये पर डाल दिया गया संजय राऊत उध्दव के कंधों पर बंदूक रखकर सत्ता का आनंद ले रहें हैं सारा पावर केंद्र राऊत के इर्दगिर्द घूमने लग गया शिवसेना के मुखपत्र सामना का उपयोग संजय निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु करने लगें संजय भांप चुके थे छोटे ठाकुर आदित्य  महत्वाकांक्षी कुछ अधिक ही हैं बस हो गया काम घर फूटे घर जाएं संजय ने आदित्य को मोहरा बनाकर चाल चली कम सीटे जितने के बाद भी BJP के सामने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा कर दिया इसमें उन्हें साथ मिला शतरंज के महान खिलाड़ी शरद पवार का जो लंबे समय से महाराष्ट्र की सत्ता से दूर चले गए थे चालक लोमड़ी की तरह उन्हों ने शिवसेना की कमजोरी भांप ली बस फिर क्या था शिवसेना-BJP की ताकत तोड़ने पर्दे के पीछे का खेल प्रारंभ हुआ डोर शरद पवार के हाथों थी संजय राऊत शिवसेना के मुख्यमंत्री की मांग पर अड़े रहें जबकि शरद पवार यह अच्छी तरह जानते थे BJP इस प्रस्ताव को किसी कीमत पर नहीं मानेगी क्योंकि अब वह महाराष्ट्र की सबसे ताकतवर पार्टी बन चुकी थी वह तो टिकटों के बटवारे में BJP के दो गुट आपस में नहीं टकराते तो टिकट का बंटवारा ठीक हुआ होता NCP कोंग्रेस से आये अवसरवादियों पर विश्वास नहीं करतें तो निश्चित तौर पर BJP पुनः महाराष्ट्र की सत्ता में लौटती ।
शरद पवार की चाल काम कर गई कच्चे कान के उध्दव संजय राऊत- पवार के जाल में फंसते चले गए । सोनिया की इस सारे घटनाक्रम पर बारीक नजर थी ही वैसे भी वह अपनी पहली चाल चुनावों के पहले ही चल चुकी थी प्रियंका चतुर्वेदी जैसी आकर्षक सुंदर तेज तरार नेत्री को उसने हथियार बनाकर शिवसेना BJP की दोस्ती  में दरार डालने कोंग्रेस से विद्रोह का नाटक करवाकर शिवसेना जॉइंट करवा चुकी थी जिसके माध्यम से उसे BJP शिवसेना की हर चाल की जानकारी होने लगी थी प्रियंका चतुर्वेदी के मार्फ़त ही उसे पता चल चुका था कि BJP के अंदर भी गटकरी फडणवीस के बीच कुछ अच्छा नहीं चल  रहा सो उसने अपने कुछ कमजोर विधायक जो निश्चित हारने वाले थे मोहरा बनाकर BJP में प्रवेश करवा दिया सोनिया का गणित ठीक बैठा BJP ने अपने पुराने विश्वासपात्र की टिकट काटकर इन पिटे हुए कोंग्रेसीयों पर दांव खेला जो सब के सब हार गए क्योंकि उन पर BJP के पुराने कार्यकर्ताओं ने अविश्वास जता कर चुनाव के समय या तो घर में बैठ गए या दिखावटी खानापूर्ति की बस BJP की जोली में कुछ विधायकों की कमी ने एवं शिवसेना की महत्वाकांक्षा ने उसे महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्य की सत्ता से बाहर कर दिया । वैसे भी महाराष्ट्र में  BJP के पास जब तक दमदार  मराठा नेता नहीं होगा शिवसेना शरद पवार के गठबंधन को फिलहाल तो कोई खतरा नहीं,BJP यह भी मानने की भूल कदापि न करें कि पालघर कांड,रिया चक्रवर्ती कांड,या कंगना की सहानुभूति उसे चुनावों में विजय दिलवा पायेगी कंगना जब तक सुशांत के लिये न्याय की लड़ाई लड़ रही थी तब तक सब ठीक था पर उसकी जबान लड़खड़ाई मुंबई की तुलना POK से करके उसने शिवसेना को एक नया मुद्दा दे डाला जिससे शिवसेना को अपने पुराने आक्रमक रूप में आने मदद हुई एवं फ़िल्म इंडस्ट्रीज को BJP ने खुद के खिलाफ कर लिया हिंदुत्व के नाम पर जो शिवसैनिक पालघर मामले एवं सोनिया से गठबंधन को लेकर उध्दव से नाराज चल रहें थे उन्हें भी एक होने का मौका मिल गया । बाकी संजय की चाल तो सफल हो ही गई अभी भी देर नहीं हुई है BJP आठवले को माध्यम बनाकर कंगना ने जो खेल बिगड़ा है उसे ठीक किया जासकता है कंगना को समझाने की जवाबदारी आठवले को दी जानी चाहिए।

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