मानसून से मुश्किल: उत्‍तराखंड में रोकी गई चार धाम यात्रा, कश्मीर में भी बाढ़

नई दिल्ली. दक्षिणी राज्यों के बाद मध्य भारत होते हुए गुरुवार को मानसून उत्तर भारत के राज्यों में भी पहुंच चुका है। लेकिन, कई जगह यह जानलेवा साबित हो रहा है। गुजरात में हालत सबसे खराब है। यहां 51 लोगों की मौत हो गई है। उत्‍तराखंड में चार धाम यात्रा रोक दी गई है। कश्‍मीर में बाढ़ का खतरा बन गया है और लद्दाख क्षेत्र से राज्‍य का संपर्क टूट गया है।
कश्मीर में झेलम नदी खतरे के निशान से ऊपर
​जम्मू-कश्मीर में भी भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। राज्‍य के कई हिस्सों में झेलम नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अनंतनाग में झेलम खतरे के निशान (21 फीट) से 4.25 फीट ऊपर बह रही है। पुलवामा में भी बारिश के कारण बाढ़ की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, श्रीनगर और कश्मीर के कई हिस्सों में शनिवार तक भारी बारिश होगी। दो दिन से बारिश के कारण कारण घाटी के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
उत्‍तराखंड में अलर्ट
उत्‍तराखंड में मौसम विभाग ने 48 घंटों का अलर्ट जारी किया हुआ है। राज्‍य के
चमोली ,रुद्रप्रयाग, पौड़ी, जोशीमठ, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब में बुधवार देर रात से हो रही लगातार तेज बारिश के चलते लोगों में डर है। बारिश के कारण केदारनाथ यात्रा भी सोनप्रयाग में ही रोक दी गई है।
गुजरात में भारी बारिश, और बाढ़ की चपेट में आने से 51 लोगों की मौत हो चुकी है। गुजरात में मंगलवार-बुधवार को हुई तेज बारिश, तूफान और जल जमाव के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। अकेले अमरेली जिले में 36 लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि गुरुवार को गुजरात में चक्रवाती तूफान आ सकता है। राज्‍य में शेर तक जंगल से निकल कर सड़कों पर आ गए हैं (डीटेल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
उत्तर भारत में अच्छी बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण, पश्चिम और मध्य भारत होते हुए मानसून उत्तर भारत पहुंच चुका है। बुधवार की शाम उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में बारिश हुई है। अरब सागर के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के दीव तट को पार करने से उत्तर भारत में मानसून के आगे बढ़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तीन दिनों तक दिल्ली में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, अगले तीन दिनों तक दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, कम दबाव का क्षेत्र बनने से नमी की मात्रा बढ़ेगी और इससे उत्तर भारत में मानूसन को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
जून में अब तक सामान्य से 24% ज्यादा हुई बारिश
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के गुरुवार के आंकड़ों के मुताबिक जून में मानसून की बारिश सामान्य से 24% ज्यादा हो गई है। दो दिन पहले यह आंकड़ा 21% पर था।
जून की स्थिति यानी
मध्य, दक्षिण और पश्चिमी भारत के 78% इलाकों में अच्छी बारिश। उत्तर भारत में अच्छी बारिश के आसार।
25 जून तक देशभर में सामान्य से 24% ज्यादा बारिश। खरीफ की फसलों की बुवाई फायदेमंद रहेगी। दालों की अच्छी पैदावार हो सकती है। हालांकि सरकार दालें आयात करने का फैसला कर चुकी है।
अगले 2 दिन कहां रहेगा मानसून का असर?
तारीख मानसून का असर
26 जून
– उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के आसार।
– पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पूर्वी राजस्थान, दक्षिणी कर्नाटक, कोंकण, गोवा और केरल में तेज बारिश।
27 जून
– पश्चिम बंगाल, सिक्किम और केरल में भारी बारिश।
– ओडिशा, असम, मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल, तटीय कर्नाटक, कोंकण और गोवा में तेज बारिश।
*जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के 25 जून के अनुमान के मुताबिक
जुलाई में मानसून को लेकर अलग-अलग दावे
भारतीय मौसम विभाग स्कायमेट एक्यूवेदर
जुलाई में 92% बारिश। यानी सामान्य से 8% कम। जुलाई में 100% बारिश होगी। ओडिशा, तेलंगाना, छत्तरीगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को फायदा। जुलाई मध्य तक अल नीनो का असर दिख सकता है। मानसून कमजोर हो सकता है।
मानसून की अच्छी शुरुआत देश के लिए कितनी जरूरी?
– सालभर होने वाली बारिश में 70% हिस्सेदारी जून-सितंबर के मानसून की होती है। मानसून की शुरुआत अच्छी हो तो फसलों की बुवाई पर अच्छा असर पड़ेगा।
– अच्छी शुरुआत से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार और आरबीआई की कोशिशें कामयाब रहेंगी। क्योंकि मानसून की सीधा संबध खेती से है। देश की 130 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 15% है।
– पिछले साल भी कमजोर मानसून की वजह से महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के इलाकों में सूखा पड़ा था। वहीं, इस साल की बेमौसम बारिश से 50 लाख हेक्टयेयर क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो गईं। एग्रीकल्चर सेक्टर की ग्रोथ रेट एक साल में 3.7% से घटकर 1.1% पर आ गई। एेसे में मानसून की अच्छी शुरुआत से इस साल के शुरुआती महीनों में हुए नुकसान की भरपाई हो सकती है।
भारत में हर साल कितनी होती है बारिश?
पिछले 50 साल में मानसून के दौरान देशभर में औसतन 89 सेमी बारिश दर्ज की गई। 2013 में देशभर में औसतन 106 सेमी बारिश हुई। उसे अच्छा मानसून माना गया। लेकिन पिछले साल 88 सेमी बारिश हुई। जो सामान्य से 12% कम थी।

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