मिस्त्री का टाटा बोर्ड को ईमेल-चेयरमैन की पोस्ट से इस तरह से हटाए जाने से शॉक्ड हूं

मुंबई. टाटा ग्रुप के चेयरमैन पोस्ट से हटाए जाने के बाद पहली बार साइरस मिस्त्री ने इस मामले पर बयान दिया है। उन्होंने टाटा बोर्ड को एक ई-मेल लिखा है। कहा- “इस तरह से पद से हटाए जाने से शॉक्ड हूं।” मिस्त्री ने ईमेल में क्या लिखा…
– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिस्त्री ने लिखा है, ”इस फैसले से वे शॉक्ड हैं। उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।”
– ”बोर्ड ने अपनी साख के मुताबिक काम नहीं किया।”
– जानकारी के मुताबिक, बोर्ड मीटिंग के दौरान भी खुद को हटाए जाने को लेकर मिस्त्री ने कहा था कि यह गैरकानूनी तरीका है।
क्या है मामला?
– इसके पीछे कोई कारण नहीं बताया गया था। लेकिन माना गया कि सिर्फ मुनाफे वाली कंपनियों पर ही फोकस करने और टाटा की कंपनियों के कई कानूनी मामलों में फंसने के चलते बोर्ड मिस्त्री से नाखुश है।
– बोर्ड ने मिस्त्री की जगह 78 साल के रतन टाटा को चार महीने के लिए इंटरिम चेयरमैन बनाया है।
– टाटा ग्रुप के 148 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी चेयरमैन को बर्खास्त किया गया।
शुरू हो चुकी है कानूनी लड़ाई
– मंगलवार को दोनों की तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ कैविएट दायर होने की खबरें आईं।
– टाटा ग्रुप ने साफ किया कि वह मिस्त्री की बर्खास्तगी के मामले में कोर्ट से कोई एकतरफा ऑर्डर नहीं चाहता। लिहाजा उसने सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में कैविएट दायर की है।
– मिस्त्री की तरफ से भी ट्रिब्यूनल में चार कैविएट दायर करने की खबरें आईं। लेकिन बाद में मिस्त्री के ऑफिस ने इससे इनकार कर दिया।
कानूनी लड़ाई की चर्चा कहां से शुरू हुई?
– शापूरजी एंड पालोनजी ग्रुप ने एक स्टेटमेंट में कहा कि मिस्त्री को हटाने का फैसला सभी की रजामंदी से नहीं लिया गया।
– ग्रुप के मुताबिक, 8 बोर्ड मेंबर्स मीटिंग में थे। 6 ने मिस्त्री हटाने के फेवर में वोट किया, जबकि दो इससे दूर रहे।
– मिस्त्री को हटाने से पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाना था, जो नहीं दिया गया। इसी के बाद से माना जा रहा था कि कानूनी लड़ाई शुरू होगी।

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