मुझे लगता है अफजल गुरू केस में फैसला सही ढंग से नहीं लिया गया: चिदंबरम

नई दिल्ली। अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के करीब तीन साल बाद यूपीए सरकार में होम और फाइनेंस मिनिस्ट्री संभाल चुके पी.चिदंबरम ने कहा है कि उन्हें लगता है कि इस मामले में ठीक फैसला नहीं लिया गया।
क्या कहा पूर्व गृह मंत्री ने?
-अंग्रेजी अखबार इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक पी.चिदंबरम ने कहा, मुझे लगता है कि यह ईमानदार राय रखना मुमकिन है कि अफजल गुरू केस में शायद सही ढंग से फैसला नहीं लिया गया।
-उन्होंने कहा कि इस बात पर गहरे संदेह है कि अफजल 2001 में हुए पार्लियामेंट अटैक में किस हद तक शामिल था।
-चिदंबरम के मुताबिक अफजल को विद आउट पैरोल के उम्रकैद की सजा दी जा सकती थी।
‘नहीं कह सकता तब क्या करता’
-चिदंबरम ने कहा कि सरकार में रहते हुए आप यह नहीं कह सकते कि कोर्ट ने केस में गलत फैसला लिया क्योंकि सरकार ने ही अफजल पर केस चलाया था। लेकिन एक इंडिपेंडेंट पर्सन यह राय रख सकता है कि इस केस में सही ढंग से फैसला नहीं लिया गया।
-चिदंबरम से जब पूछा गया कि आप भी उसी सरकार का हिस्सा थे जिसने गुरू को फांसी दी थी तो उन्होंने कहा, यह सच है लेकिन मैं उस वक्त होम मिनिस्टर नहीं था, मैं नहीं कह सकता कि मैं क्या करता।
-गौरतलब है कि चिदंबरम यूपीए सरकार में 2008 से 2012 तक होम मिनिस्टर रहे। अफजल गुरू को 2013 में फांसी दी गई तब सुशील कुमार शिंदे होम मिनिस्टर थे।
जेएनयू पर क्या कहा चिदंबरम ने?
-जेएनयू स्टूडेंट्स पर लगाए जा रहे देशद्रोह के आरोपों को चिदंबरम ने बतुका करार दिया।
-उन्होंने कहा कि कोर्ट पहली ही सुनवाई में इन आरोपों को खारिज कर देगी।
-पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि फ्री स्पीच देशद्रोह नहीं है। अगर आपका भाषण बारूद की नली में चिंगारी की तरह हो (हिंसा के लिए उकसाना) तभी आपकी बात को देशद्रोह कहा सकता है।
-उन्होंने कहा कि यही उम्र होती है जब स्टूडेंट्स को गलती करने का भी अधिकार होता है और यूनीवर्सिटी एक ऐसी जगह नहीं होती जहां आपको हर बार सीरियस होने की जरूरत नहीं होती आप बेतुके भी हो सकते हो।

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