मेरी जान को कोई ख़तरा नहीं: आमिर ख़ान

Tatpar 28 feb 2014

आमिर ख़ान ने अपनी जान को ख़तरा होने संबंधित ख़बरों को पूरी तरह से निराधार बताया है. मुंबई में अपने टीवी शो सत्यमेव जयते के दूसरे संस्करण के बारे में मीडिया से बात करते हुए आमिर ने ये बताया. दरअसल ऐसी ख़बरें थीं कि आमिर ने अपने इस शो में जिन मुद्दों को उठाया है उसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. वह शो के पहले संस्करण में कन्या भ्रूणहत्या, डॉक्टरी लापरवाही और ऑनर किलिंग जैसे गंभीर मुद्दे उठा चुके हैं. उसके बाद उन्हें कथित तौर पर अपने शो में ऐसे मुद्दे ना उठाने की धमकियां मिली थीं. कहा तो ये भी जा रहा है कि इसके बाद आमिर ने अपने लिए बुलेट प्रूफ़ कार मंगाने का फ़ैसला किया. आमिर ख़ान बोले, “मुझे कोई धमकी नहीं मिली. वैसे भी मैं अपने दिल की बात कहने और करने में डरता नहीं हूं. आप लोग कृपया अफ़वाहों पर यक़ीन ना करें. मेरी जान को ख़तरा नहीं है.”
‘सत्यमेव जयते’ का दूसरा संस्करण दो मार्च से शुरू हो रहा है. इस बार शो के सिर्फ़ पांच एपिसोड दिखाए जाएंगे. आमिर ने इस मौक़े पर कहा, “मैं अपने आपको समाज का संदेशवाहक मानता हूं. मेरी ज़िम्मेदारी है समाज में हो रही ग़लत बातों को उठाना और उन्हें सुलझाने की दिशा में अपना योगदान देना. मैं चाहता हूं कि समाज की बेहतरी की दिशा में उठाए गए हर कदम में लोग जुड़ें. निजी तौर पर मैं नारी सशक्तीकरण की दिशा में काम करना चाहता हूं.” इस मौक़े पर आमिर ने ये भी कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी को सपोर्ट नहीं करते और आगे भी वह किसी पार्टी से नहीं जुड़ेंगे. उन्होंने कहा, “मैं किसी पार्टी से नहीं बल्कि इश्यूज़ से जुड़ना चाहता हूं.”
आमिर ने ये भी माना कि शो के पहले संस्करण में वह काफ़ी रोए थे. उन्होंने कहा, “मैं शो में बहुत रोया क्यों कि मैं एक भावुक इंसान हूं. यक़ीन जानिए कई बार तो मैं इतना रोया कि शो की एडीटिंग के वक़्त मेरी रुलाई वाला हिस्सा काफ़ी हद तक काटना पड़ा क्योंकि शो में दूसरे भी अहम मुद्दों को जगह मिलनी ज़रूरी थी.” आमिर ने बिहार के गया में शो के दूसरे संस्करण के लॉन्च का ऐलान किया था. उन्होंने दिवंगत दशरथ मांझी को अपना प्रेरणा स्त्रोत बताया था. दशरथ मांझी वह शख़्स थे जिन्होंने अपने दम पर पहाड़ का 360 फ़ीट लंबा और 30 फ़ीट चौड़ा हिस्सा काट कर रास्ता बनाया था.
गांव में ख़राब चिकित्सा सेवाओं के चलते दशरथ मांझी की पत्नी की मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने गहलौर के पास पहाड़ी को काटकर पास के क़स्बों से गांव की दूरी कम करने का फ़ैसला किया था.

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