मॉरिशस में शुरू हुआ 11वां विश्व हिंदी सम्मलेन

इस बार 11वां विश्व हिंदी सम्मलेन 18 से 20 अगस्त, 2018 को मॉरिशस में आयोजित किया जा रहा है। मॉरिशस में विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर मॉरिशस के पीएम प्रविन्द कुमार और भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद रहीं।

विश्व हिंदी सम्मेलन की मुख्य विषय वस्तु ‘वैश्विक हिंदी और भारतीय संस्कृति’ है। मुख्य विषय के अतिरिक्त 12 अन्य उपविषयों पर आधारित समानांतर सत्र होंगे। इस अवसर पर पुस्तक प्रदर्शनियां और साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण किया जाएगा। इस बार देश विदेश के विभिन्न भागों से, जहां हिंदी पढाई जाती है, लगभग 1500 पंजीकृत प्रतिभागियों और हिंदी सेवियों के सम्मलेन में भाग लेने की संभावना जताई गई है।

इस कार्यक्रम को लेकर मॉरीशस की शिक्षा मंत्री ने विश्व हिंदी सम्मेलन के 11वें संस्करण का लोगो और वेबसाइट लॉन्च किया था।  इस मौके पर मॉरीशस की शिक्षा मंत्री  लीला देवी दोखुन ने कहा था कि आज हिंदी की हालत पानी में जूझते जहाज की तरह हो गई है। मुझे ‘लोगो’ के लिए प्रतिभागियों द्वारा भेजी इंट्री देखने का मौका मिला। मैंने महसूस किया कि सभी डिजाइन एक-दूसरे से मिलते-जुलते ही थे। वेबसाइट पर जानकारियों को अपडेट करने के लिए एक सब-कमेटी का भी गठन किया गया है।

सम्मेलन के विषय में जानकारी देने के लिए मॉरीशस से एक प्रतिनिधि दल भारत आया था। उनसे मुलाकात के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि भाषा और संस्कृति साथ-साथ चलते हैं। एक के खत्म होने पर दूसरा अपने आप ही विलीन हो जाता है। ऐसे में भारत के बाहर भी हिंदी को जीवित रखने में इस सम्मेलन की बड़ी भूमिका है।

10 अप्रैल, 2018 को जवाहर लाल नेहरू भवन, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली में माननीय श्रीमती सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री, भारत सरकार और माननीय श्रीमती लीला देवी दुखन लछुमन, शिक्षा एवं मानव संसाधन, तृतीयक शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री, मॉरिशस सरकार द्वारा संयुक्त रूप से विश्व हिंदी सम्मलेन -2018 वेबसाइट का लोकार्पण किया था |

मॉरिशस में शनिवार को 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन की शुरूआत हुई। इस सम्मेलन की शुरूआत विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से विश्व के हिन्दी प्रेमियों को अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का मौका मिलेगा।

इस दौरान विदेश मंत्री ने संस्कृति और भाषा को बचाने पर जोर देते हुए कहा कि अलग-अलग देशों में हिन्दी को बचाने की जिम्मेदारी भारत ने ली है। 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के दौरान अपने उद्घाटन संबोधन में सुषमा स्वराज ने कहा कि भाषा और संस्कृति एक दूसरे से जुड़ी हैं। ऐसे में जब भाषा लुप्त होने लगती है तब संस्कृति के लोप का बीज उसी समय रख दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि भाषा को बचाया जाए, उसे आगे बढ़ाया जाए, साथ ही भाषा की शुद्धता को बचाए रखा जाए।

देशों में लुप्त हो रही हिन्दी भाषा को बचाने की जिम्मेदारी भारत की हैसुषमा

विदेश मंत्री ने कहा कि हिन्दी भाषा को बचाने, बढ़ाने और उसके संवर्द्धन के बारे में कई देशों में चिंताएं सामने आई। ‘ऐसे में इन देशों में लुप्त हो रही इस भाषा को बचाने की जिम्मेदारी भारत की है।’ उन्होंने कहा कि इस बार विश्व हिन्दी सम्मेलन का प्रतीक चिन्ह ‘मोर के साथ डोडो’ है। पिछली बार मोर था, इस बार इसमें डोडो को भी जोड़ दिया गया है। डोडो लुप्त होती हिन्दी का प्रतीक है और भारत का मोर आएगा और उसे बचाएगा।

साइबर टावर को अब अटल बिहारी वाजपेयी टावर नाम देने की हुई घोषणा

मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर दो डाक टिकट जारी किए। एक पर भारत एवं मॉरिशस के राष्ट्रीय ध्वज और दूसरे पर दोनों देशों के राष्ट्रीय पक्षी मोर और डोडो की तस्वीर है। मॉरिशस के प्रधानमंत्री ने भारत के सहयोग से बने साइबर टावर को अब अटल बिहारी वाजपेयी टावर नाम देने की घोषणा की।

इस बार भाषा के साथ साहित्य नहीं, संस्कृति को जोड़ा गया

सुषमा ने कहा कि पिछले विश्व हिन्दी सम्मेलनों में भाषा और साहित्य पर जोर होता था। इस बार भाषा के साथ संस्कृति को जोड़ा गया है। ऐसे में एक विषय ‘हिन्दी, विश्व और भारतीय संस्कृति’ रखा गया है। उन्होंने कहा कि गिरमिटिया देशों में उन्होंने भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता देखी है।

मॉरिशस के पीएम में साफ झलकती है संस्कृति को बचाने की बेचैनी: सुषमा

इस संदर्भ में विदेश मंत्री ने कहा कि मॉरिशस के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि उन्हें ज्यादा हिन्दी नहीं आती है लेकिन भाषा को न जानने की निराशा और संस्कृति को बचाने की बेचैनी उनमें साफ झलकती है। सुषमा ने कहा कि सम्मेलन के दौरान एक विषय ‘भाषा और संस्कृति के अंतर संबंध’ रखा गया है। इसके अलावा एक अन्य विषय ‘हिन्दी शिक्षण और भारतीय संस्कृति’ है।

उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दी सम्मेलन के दौरान पहले सत्र होता था, चर्चाएं होती थी, अनुशंसाएं होती थी लेकिन अनुवर्ती कार्य नहीं देखा गया। पिछले छह महीने के परिश्रम से पिछले सम्मेलन की अनुशंसाओं और अनुवर्ती कार्यो का संकलन करने का कार्य किया गया है। यह केवल मौखिक रूप में नहीं बल्कि लिखित रूप में पुस्तक के रूप में है जिसका शीर्षक ‘भोपाल से मॉरिशस’ है। इसमें एक एक अनुशंसा पर की गई कार्रवाई का वर्णन है।

वाजपेयी के सम्मान में रखा गया दो मिनट का मौन

11वां विश्व हिन्दी सम्मेलन शुरू होने से पहले सभागार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

ये थे सम्मेलन में शामिल होने वाले मुख्य शख्सियत

गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी विशिष्ठ अतिथि हैं। सम्मेलन में विदेश राज्य मंत्री वी.के सिंह, गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू, विदेश राज्य मंत्री एम.जे अकबर, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह आदि हिस्सा ले रहे हैं। मॉरिशस की शिक्षा मंत्री लीला देवी दुकन लक्षुमन ने सम्मेलन में आए अतिथियों का स्वागत किया।

जानिए विश्‍व हिंदी दिवस के बारे में
1- पहला विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था। इसलिए इस दिन को विश्‍व हिन्‍दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। 2006 के बाद से हर साल 10 जनवरी को विश्वभर में विश्व हिन्‍दी दिवस मनाया जाता है।
2- पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को हर साल विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाए जाने की घोषणा की थी।
3- विदेशों में भारतीय दूतावास विश्व हिंदी दिवस के मौके पर विशेष कार्यक्रमाें का आयोजन करते हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिंदी में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
4- नॉर्वे में पहला विश्व हिंदी दिवस भारतीय दूतावास ने मनाया था। इसके बाद दूसरा और तीसरा विश्व हिंदी दिवस भारतीय नॉर्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के तत्वाधान में लेखक सुरेशचन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में बहुत धूमधाम से मनाया गया था।
5- विश्व हिंदी दिवस के अलावा हर साल 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था तभी से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।
6- अभी विश्‍व के सैंकड़ों व‍िश्‍वविद्यालयों में हिंदी पाठ्यक्रम शामिल है। विश्‍व में करोड़ों लोग हिंदी बोलते हैं। यही नहीं हिंदी दुनिया भर में सबसे ज्‍यादा बोली जाने वाली पांच भाषाओं में से एक है।