मोदी के चलते कांग्रेस में कलह, सत्‍यव्रत ने मांगा जयराम का इस्‍तीफा

tatpar 14 june 13

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी पर दिए कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के बयान से नाराज कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा है कि अगर उन्होंने (जयराम रमेश ने) मोदी की तारीफ की है, तो उन्हें कांग्रेस से त्यागपत्र देकर मोदी की पार्टी ज्वाइन कर लेना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि जयराम रमेश ने नरेंद्र मोदी को कांग्रेस के लिए चुनौती माना। पहली बार कांग्रेस के किसी नेता ने नरेंद्र मोदी के प्रभाव को स्वीकार किया। रमेश ने कहा कि मोदी निश्चित तौर पर हमारे लिए चुनौती हैं, वह एक अच्छे प्रबंधक हैं।

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि भले ही मोदी गुजरात में तीन चुनाव जीत चुके हैं और एक बेहतरीन प्रचारक हैं, लेकिन इससे उनकी पार्टी डरती नहीं। इससे पहले, कांग्रेस मोदी के प्रभाव को सिर्फ गुजरात तक ही सीमित मानती रही है।

जयराम ने सिर्फ मोदी को अपनी पार्टी के लिए चुनौती ही नहीं बताया, बल्कि उन्होंने मोदी को भस्मासुर बताते हुए कहा कि मोदी ने खुद को बनाने वाले आडवाणी को ही भस्म कर दिया। जयराम रमेश यहीं नहीं रुके और उन्होंने नरेंदी मोदी को भारत का पहला ‘प्रमाणिक फासीवादी’ तक कह डाला।

रमेश बीजेपी में मोदी का कद बढ़ने के बाद आडवाणी के सभी पदों से इस्तीफे की पेशकश और उसके बाद उनके मान जाने के घटनाक्रम पर सवालों का जवाब दे रहे थे। राहुल और मोदी के बीच अंतर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बीच बुनियादी अंतर है। राहुल एक ढांचा और व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं हो। मोदी कह रहे हैं कि मैं व्यवस्था की परवाह नहीं करता, मैं खुद ढांचा हूं, मैं व्यवस्था हूं। मेरे आगे किसी का भी अस्तित्व नहीं है। राहुल ने ऐसा कभी नहीं कहा।

हालांकि रमेश ने इस बात से इत्तेफाक नहीं जताया कि 2014 के चुनाव राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी होंगे। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस और संघ (आरएसएस) की लड़ाई होगी।  संघ और सरसंघचालक मोहन भागवत पर हमला बोलते हुए रमेश ने कहा कि संघ को अब एक राजनीतिक दल के तौर पर पंजीकरण करा लेना चाहिए। उन्होंने कहा, उसे सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन होने का दिखावा बंद करना चाहिए। जिस चालाकी से उसने मोदी को अंदर लाकर आडवाणी को बाहर किया और जिस तरीके से मोहन भागवत पूरे देश में यात्रा कर रहे हैं, अनेक लोगों के साथ लामबंदी की कोशिश कर रहे हैं, इसे अब सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन नहीं कहा जा सकता।

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