मोदी-जिनपिंग के बीच 3 साल में 6 मुलाकात, हर बार एक जैसी बात

बीजिंग/नई दिल्ली. डोकलाम में 73 दिन तक खिंचे टकराव के बाद नरेंद्र मोदी मंगलवार को पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले। यह मुलाकात BRICS समिट से अलग हुई। डोकलाम और लद्दाख की घटनाओं के बैकग्राउंड में हुई यह मुलाकात अहम मानी जा रही है। दोनों के बीच बॉर्डर पर शांति के लिए सेनाओं के बीच संपर्क और विश्वास बढ़ाने पर सहमति बनी, ताकि डोकलाम जैसे हालात दोबारा न पैदा हों। करीब एक घंटे चली मुलाकात को नरेंद्र मोदी ने ‘फलदायक’ (fruitful) बताया। बता दें कि पीएम बनने के बाद मोदी की जिनपिंग से छह बार बातचीत हो चुकी है और हर बार एक जैसी हुई है।
कब-कब और क्या हुई बातचीत…
1) 15 जुलाई 2014: पहली मुलाकात ब्राजील में। सीमा विवाद हर करने का वादा। मोदी ने कहा कि सौहार्द्रपूर्ण हल दुनिया के सामने नजीर बनेगा। चीन ने संबंधों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
2) 18 सितंबर 2014: गुजरात में। 12 समझौते हुए। भारत ने चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में घुसपैठ का मामला उठाया, रोकने की मांग की। जिनपिंग ने दोस्ती और व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया।
3) 15 मई 2015: चीन में। सीमा विवाद जल्द सुलझाने और व्यापारिक हित मजबूर करने पर जोर।
4) 4 सितंबर 2016: हांगझाऊ में। भारत ने पीओके से संचालित आतंकवाद का मुद्दा उठाया। सामरिक हितों के लिए संवेदनशील होने की जरूरत बताई। जिनपिंग ने विवादित मुद्देरचनात्मक बातचीत से हल करने पर जोर दिया।
5) 9 जून 2017: अष्टाना में। द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की उम्मीद जताई। तनाव कम करने के लिए लगातार उच्च स्तरीय बातचीत पर जोर।
6) 5 सितंबर 2017:को ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में फिर जिनपिंग और मोदी के बीच बातचीत हुई।
बातचीत फ्यूचर के लिए थी, पीछे लौटने के लिए नहीं: फॉरेन सेक्रेटरी
– डोकलाम से जुड़े सवाल पर इंडियन फॉरेन सेक्रेटरी एस. जयशंकर ने सीधे-सीधे यह नहीं बताया कि कोई बात हुई है या नहीं। उन्होंने कहा, “दोनों देश जानते हैं कि वहां क्या हुआ था। यह बातचीत भविष्य के लिए थे, पीछे की ओर लौटने वाली नहीं। बैठक का अहम बिंदु यही था कि सीमावर्ती क्षेत्र में शांति ही द्विपक्षीय संबंधों के आगे और विकास की शर्त है।’ उन्होंने कहा- यह स्वाभाविक है कि बड़ी शक्तियों के बीच मतभेद की कई वजह होंगी।
भारत के साथ संबंधों को सही ट्रैक पर देखना चाहते हैं: जिनपिंग
– चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन के मुताबिक, चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने कहा कि वह भारत के साथ रिश्तों को सही ट्रैक पर देखना चाहते हैं। इसके लिए पंचशील के सिद्धांत, पारस्परिक राजनीतिक भरोसा जरूरी है। भारत और चीन एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि मौका हैं।
बढ़ता व्यापार घाटा भारत के लिए चिंता की बात
– भारत इस बात से चिंतित है कि चीन से उसका व्यापार घाटा करीब 50 अरब डॉलर (करीब 3 लाख 19 हजार करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है।
– चीन का भारत में इम्पोर्ट पिछले साल 58.33 बिलियन डॉलर (करीब 3 लाख 72 हजार करोड़ रुपए) था। 2015 के मुकाबले इसमें 0.2% की बढ़ोत्तरी थी। दूसरी तरफ भारत से चीन को होने वाला एक्सपोर्ट 12% कम होकर 11.76 बिलियन डॉलर (करीब 75 हजार करोड़ रुपए) तक जा पहुंचा। दो देशों के बीच इम्पोर्ट ओर एक्सपोर्ट का अंतर ही व्यापार घाटा होता है।
– इधर, भारत में चीन और चीनी सामान का विरोध होता रहा है, लेकिन इससे चीन को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उसके इम्पोर्ट में भारत की कुल हिस्सेदारी सिर्फ 2% है।
चीनी इन्वेस्टमेंट 38% बढ़ा
– भारत में चीनी निवेश जरूर बढ़ा। 2014 में चीन ने 116 बिलियन डॉलर (करीब 7 लाख 44 हजार करोड़ रुपए) का निवेश किया जो अगस्त 2017 तक 160 बिलियन डॉलर (करीब 10 लाख 26 हजार करोड़ रुपए) हो गया यानी 38% की बढ़ोतरी हुई।
5 विकासशील देशों का ग्रुप है BRICS
– BRICS पांच विकासशील देशों (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका) का ग्रुप है।
– यह ग्रुप 2009 से लगातार ब्रिक्स समिट करता आ रहा है।
– 26% दुनिया का एरिया ब्रिक्स देश कवर करते हैं।
– 42% दुनिया की आबादी इस ग्रुप के देश कवर करते हैं।
– 23% हिस्सा दुनिया की जीडीपी में इन देशों का है।