मोहम्मद गोरी ने 60 घंटे में बनवाई थी मस्जिद, डर था इसके पीछे का कारण

अजमेर. वर्ल्ड फेमस अजमेर दरगाह के पास बनी यह विरासत बेहद खास है। इसका इतिहास 800 साल पुराना है। इसके साथ कई मान्‍यताएं प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मस्जिद को बनने में ढ़ाई दिन का समय लगा था, इसलिए इसे अढ़ाई-दिन का झोपड़ा कहा गया। मान्यता यह भी है कि यहां हर साल लगने वाले ढाई दिन के मेले के कारण इसका नाम अढ़ाई-दिन का झोपड़ा पड़ा।

भयभीत होकर गोरी ने बनवाया मस्जिद
इस खंडहरनुमा इमारत में 7 मेहराब एवं हिंदू-मुस्लिम कारीगिरी के 70 खंबे बने हैं तथा छत पर भी शानदार कारीगिरी की गई है। यहां पहले बहुत बड़ा संस्कृत विद्यालय था। इसका नाम अढ़ाई दिन का झोपड़ा इसलिए रखा गया है, क्योंकि परिसर को ढाई दिन के भीतर मस्जिद के रूप में बदल दिया गया था।

दरअसल, तराई के दूसरे युद्ध (1192ई.) के बाद मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराकर उसका वध किया। इसके बाद वह विजेता के रूप में अजमेर से ही गया था। वह यहां बने मंदिर से इतना भयभीत हुआ कि उसने उसे तुरंत वहां मस्जिद बनाने की इच्छा प्रकट की। उसने अपने गुलाम सेनापति को सारा काम 60 घंटे में पूरा करने का आदेश दिया ताकि लौटते समय वह नई मस्जिद में नमाज अदा कर सके। इसके बाद क्या था, उसके गुलाम सेनापति ने ढाई दिन में ही यहां मस्जिद तैयार करवा दिया था।