यहां खुले में घूम रहे हैं 48 टाइगर्स, 9 साल में 4 से 48 पहुंच गई संख्या

भोपाल. राजधानी के पास बाघ टी-1 और बाघिन टी-2 की हलचल लगातार सुर्खियों में है। एक बाघ को पन्ना भेजा जा चुका है। मगर बाघों की कहानी यहीं तक सीमित नहीं है। भोपाल फॉरेस्ट सर्किल में छोटे-बड़े बाघों की तादाद 48 के आसपास हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा अहम हैं-चार बाघिनों के साथ मौजूद 12 शावक। इनकी उम्र 20 दिन से छह महीने के बीच है। वन विभाग में बाघों के इस बढ़ते कुनबे को लेकर जबर्दस्त हलचल है। एनजीटी में विभाग की लगातार खिंचाई हो रही है।
आमदोह के जंगलों में एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ सुरक्षित गुफा में ठिकाना बनाए हुए है। इसने पहली बार शावकों को जन्म दिया है। नन्हें शावकों ने चंद रोज पहले ही आंखें खोली हैं। इनकी उम्र 22 दिन के आसपास है। भोपाल फॉरेस्ट सर्किल में बाघों के कुनबे में ये सबसे नए मेहमान हैं। इनके जन्म के बाद से ही बाघिन गुफा से बाहर नहीं निकली है। शावकों की महीन आवाजें जरूर बाहर सुनाई दी हैं।सर्किल में ऐसी तीन और बाघिनें अपने शावकों के साथ लगातार निगरानी में हैं। खटपुरा के पास मौजूद बाघिन के तीन शावक चार महीने के हो चुके हैं। वे एक तय सुरक्षित इलाके में ही सीमित हैं। दाहोद वाली बाघिन के शावक पांच महीने के हैं। ये एक छोटे से तालाब के आसपास देखे जा रहे हैं। इस बाघिन ने दूसरी बार शावकों को जन्म दिया। समसगढ़ के पास सक्रिय बाघिन ने भी दूसरी बार तीन शावकों को जन्म दिया। ये सात महीने के हैं और पिछले दिनों मां के साथ पहली बार इन्हें शिकार पर देखा गया। चारों बाघिनें और उनके शावक विभाग के मैदानी अमले की निगरानी में हैं। ये बाघ भोपाल शहर से 30 किलोमीटर के दायरे में फैले जंगलों में है।
4 से 48 हो गए 9 साल में बाघ
2006 केवल चार बाघ थे।
2010: 16 बाघ दर्ज। पुष्टि तत्कालीन पीसीसीएफ एचएस पाबला ने की।
2014: तादाद बढ़कर 21 हो गई। पुष्टि 4 नवंबर को एनजीटी में एक सुनवाई में वाइल्ड लाइफ मुख्यालय के एपीसीसीएफ शहबाज अहमद ने की थी।
2015: पिछले साल 15 शावक भी थे, जो अब बड़े हो गए हैं। इस तरह कुल संख्या 36 है।
(बाघों की गणना के दौरान शावकों को संख्या को नहीं जोड़ा जाता )
दो बड़ी चुनौतियां
1. सबसे बड़ी मुश्किल इलाके की है। एक बाघ की होम रेंज 10 वर्ग किमी मानी जाती है। समरधा रेंज के 45 वर्ग किमी में 10 बाघ हैं। इसी प्रकार 917 वर्ग किमी में फैली रातापानी सेंक्चुरी में 35 के आसपास हैं।
2. भोजन की कमी। समरधा और कठोतिया में मूवमेंट बाघ वन्यजीवों की बजाए मवेशियों पर निर्भर हैं। समरधा रेंज में अब तक बाघ ने 176 मवेशियों का शिकार किया। इसमें ग्रामीणों द्वारा बूढ़ी होने पर जंगल में चरने के लिए छोड़ दी गाएं शामिल हैं। पानी के स्त्रोत सूख गए हैं।
सीधा असर-दोनों कारणों से बाघ नए इलाकों और कलियासोत जैसे जल संपन्न क्षेत्र का रुख करने पर मजबूर हैं।
ये सात महीने के हैं और पिछले दिनों मां के साथ पहली बार इन्हें शिकार पर देखा गया। चारों बाघिनें और उनके शावक विभाग के मैदानी अमले की निगरानी में हैं। ये बाघ भोपाल शहर से 30 किलोमीटर के दायरे में फैले जंगलों में है।फॉरेस्ट सर्किल के अफसरों का कहना है कि कई ऐसे क्षेत्र जो कभी बाघों के विचरण क्षेत्र नहीं थे, वहां भी लगातार बाघ देखे जा रहे हैं। जैसे-कोलार डेम, महुआखेड़ा, मुश्काबाद, दाहोटघाट स्थित पत्रा रोड, दीवानगंज और गैरतगंज। भोपाल से महज दस किमी दूर समरधा रेंज में ही 10 बाघ हैं। इनमें से कलियासोत, केरवा, समसपुरा, रीछनखोह, सरोतियापुरा, चिचली बीट में 6 बाघ और तीन शावक हैं। वहीं प्रेमपुरा सूखी सेवानियां में भी एक बाघ की हलचल है। भोपाल वन मंडल के डीएफओ एके सिंह का कहना है कि यह संख्या अधिक भी हो सकती है।
शहर के आसपास 9 बाघ
भोपाल देश का एक मात्र ऐसा शहर है, जिसके आसपास 9 से अधिक बाघों की हलचल है। साल भर पहले इसे एक उपलब्धि माना गया था। तब डब्ल्यूड्ब्ल्यूएफ ने तत्कालीन कंजरवेटर एल. कृष्णमूर्ति को ट्राफी और एक लाख रुपए का नगद पुरस्कार दिया था।
रातापानी सेंचुरी में किस रेंज में कितने?
बरखेड़ा रेंज 5
देलाबाड़ी रेंज 5
बिनेका रेंज 5
दाहोद रेंज 6
स्त्रोत-भोपाल फारेस्ट सर्किल के रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़े
ये सूचनाएं उत्साह से भरने वाली हैं
चार बाघिनें भी 12 शावकों के साथ देखी गई हैं। इस हिसाब से भोपाल सर्किल में तादाद 48 के अासपास है। ये सूचनाएं हमें उत्साह से भरने वाली हैं। अब हमारी चुनौती इनके बेहतर प्रबंधन की है।