योगी सरकार ने इन 6 मामलों में दिए थे जांच के आदेश, 2 महीने बाद भी नहीं कम्प्लीट हुई जांच

लखनऊ.19 मार्च को योगी सरकार के गठन के बाद से ही सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर कई मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों की जांच शुरू की। करीब आधा दर्जन प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण कर समय सीमा तय कर दी गयी कि इन प्रोजेक्ट्स की जांच कर कार्यवाही की जाएगी, लेकिन योगी सरकार के दो महीने बीतने के बाद भी जांच कम्प्लीट नहीं हुई है। ऐसे में विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है कि योगी के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
रिवर फ्रंट की 45 दिन में पूरी होनी थी जांच
– 27 मार्च को सीएम योगी आदित्यनाथ अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट को देखने पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने फव्वारे में गन्दा पानी देखा उनका पारा चढ़ गया और उन्होंने इंजीनियर्स से हिसाब लेना शुरू कर दिया। हेर फेर की आशंका के चलते योगी सरकार ने 1 अप्रैल को रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट की जांच का आदेश दे दिया।
– यही नहीं जांच 45 दिन में कम्प्लीट भी करनी थी। जांच के लिए एक न्यायिक कमिटी भी गठित कर दी थी, लेकिन 45 दिन बाद भी अभी तक जांच का रिजल्ट सामने नहीं आया है। अब तक परियोजना पर 1435 करोड़ रूपए खर्च हो चूका हैं इसके बावजूद अभी 60 फीसदी काम ही पूरा हुआ है।
– सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट सीएम ऑफिस भेज दी गयी है। जल्द ही दोषियों पर कार्यवाही होगी।
समाजवादी पेंशन की एक महीने में जांच होनी थी कम्प्लीट
– इसी तरह 11 अप्रैल को सीएम योगी ने समाज कल्याण विभाग का प्रेजेंटेशन देखने के बाद समाजवादी पेंशन पर रोक लगा दी थी साथ ही जांच के आदेश भी दिए थे।
– इस योजना की जांच के लिए भी एक महीने का वक्त दिया गया था, लेकिन अभी तक जांच के रिजल्ट सामने नहीं आए। हालांकि योगी आदित्यनाथ ने 19 मई को सदन में कहा था कि समाजवादी पेंशन योजना में बड़ा घोटाला हुआ है। एक ही परिवार के 5 लोगों को पेंशन दी जा रही थी।
– वहीं, समाज कल्याण मंत्री से जब tatparpatrika.com ने बात की तो उन्होंने कहा, जांच चल रही है। एक महीने का समय दिया गया था। जल्द ही जांच कम्प्लीट कर सीएम कार्यालय को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि सीएम ने जिन कुपात्रों को पेंशन मिल रही है उस पर रोक लगाने के आदेश दिए थे।
– यह हाल तब है जब बाकायदा इस योजना की जांच के लिए प्रेस नोट जारी कर बताया गया था।
सैफुल्लाह एनकाउंटर की होनी थी मजिस्ट्रेटी जांच
– वहीं, 7 मार्च को 11 घंटे ऑपरेशन चलाकर आतंकी सैफुल्लाह को मार गिराने वाली एटीएस टीम ने खूब वाहवाही बटोरी थी।
– लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक योगी सरकार ने 1 अप्रैल को सैफुल्लाह एनकाउंटर के मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए थे। जोकि सरकार के दो महीने पूरे होने के बाद भी अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है।
जेपीएनआईसी और पुराने लखनऊ के सुंदरीकरण की जांच भी फंसी
– 11 अप्रैल को राज्यमंत्री सुरेश पासी ने अखिलेश सरकार के कार्यकाल में बने जेपीएनआईसी (जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) का इंस्पेक्शन किया था। इसके बाद एक बार फिर 16 अप्रैल को भी उन्होंने निरीक्षण किया था। जहां पर उन्होंने कहा था कि, अधिकारियों ने बताया की यहां काफी काम हो चूका है, लेकिन यहां 50 फ़ीसदी काम भी नहीं हुआ।
– इस प्रोजेक्ट की लागत शुरुआत में लगभग 200 करोड़ थी जो बढ़ कर 883 करोड़ तक पहुंच गयी है। मंत्री ने इंस्पेक्शन के दौरान जांच के आदेश भी दिए थे।
– वहीं, वर्ल्ड हेरिटेज डे के मौके पर लखनऊ के हेरिटेज जोन का सच जानने भी मंत्री पहुंचे थे जहां उन्होंने सड़क तक खुदवा कर देखी थी। यहां भी उन्होंने जांच के आदेश दिए थे। दरअसल, जनता ने मंत्री से शिकायत की थी कि पहले डामर की अच्छी सड़क बनी थी, लेकिन फिर भी कर्नाटक से 35 करोड़ की लागत के पत्थरों को मंगवाकर लगवाया गया।
– इस मामले में मंत्री सुरेश पासी का कहना है कि मैंने अपनी जांच कर सीएम को सौंप दी है अब वह टेक्न‍िकल जांच कराएंगे। हालांकि अभी तक ऐसी किसी भी जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे की भी हो रही है जांच
– इसी तरह अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे की भी जांच के आदेश दिए गए हैं। सीएम योगी ने इसके जांच के आदेश 20 मई को दिए थे।
– इस मामले में दस जिलों के डीएम को निर्देश दिया गया है कि वह लगभग 230 गांवों में हुए भूमि सौदों की जांच करें। इन गांवों से करीब 20456 किसानों से 3500 हेक्टेयर भूमि खरीदी गई थी।
– लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे 302 किलोमीटर लंबा है। इसे बनाने का खर्च 15 हजार करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह एक्सप्रेस-वे इटावा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, उन्नाव, कानपुर, कन्नौज, औरैया और हरदोई होकर गुजरता है। उन्नाव के पास इस पर हवाईपट्टी भी बनी है, जिस पर फाइटर जेट उतर सकते हैं।
– हालांकि एक महीना बीतने के बाद भी अभी तक जांच कम्प्लीट नहीं हो पाई है।
यश भारती अवॉर्ड की भी हो रही है जांच
– 20 अप्रैल को ही संस्कृती विभाग का प्रेजेंटेशन देखने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश सरकार के दौरान बांटे गए यश भारती अवॉर्ड की जांच के आदेश दिए थे।
– सीएम योगी ने निर्देश दिया था कि यह अवॉर्ड पूर्व में किस आधार पर बांटे गए हैं इसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि एक महीने का समय बीत चूका है, लेकिन अभी तक जांच कम्प्लीट नहीं हुई है।
– इस मामले पर जब मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी से बात की गयी तो उन्होंने कहा मामले की जांच चल रही है। जल्द ही जांच कम्प्लीट हो जाएगी। जब उनसे टाइमलाइन पुछा गया तो उन्होंने कहा लगभग एक हफ्ते में जांच कम्प्लीट हो जाएगी।
– आपको बता दें कि यश भारती अवॉर्ड मुलायम सरकार में शुरू हुआ था।
क्या कहना है समाजवादी पार्टी का
– सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि योगी सरकार ने सिर्फ जनता को दिखाने के लिए सपा सरकार की योजनाओं पर जांच के आदेश दिए हैं। अगर योगी सरकार जांच करना चाहती है तो दो महीने बीतने के बावजूद कोई जांच कम्प्लीट क्यों नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा सिर्फ राजनैतिक कारणों से यह प्रपंच किया जा रहा है।
– वहीं, इस सम्बन्ध में जब सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अगरवाल से बात की गयी तो उन्होंने इस मुद्दे पर बोलने से मना कर दिया।

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